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चार करोड़ के अनाज घोटाले के जिम्मेदारों पर गिरेगी गाज
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सीतापुर। रामकोट इलाके में राज्य भंडारण निगम के गोदाम से गेहूं व चावल से भरे 23 हजार से अधिक बोरों के गायब होने के मामले में कई अन्य की भी मुश्किलें बढ़ सकती हैं। जांच में कई जिम्मेदारों पर कार्रवाई की गाज गिर सकती है। जांच कब तक पूरी होगी और कार्रवाई की जद में कौन-कौन आएगा... यह भी बता पाना अभी मुमकिन नहीं है। वजह, करीब 17 साल पहले हुए एक और अनाज घोटाले में अब भी जांच हाशिये पर है। मामले में सीबीआई जांच कर रही है, लेकिन अभी तक कोई निष्कर्ष नहीं निकल सका है।
रामकोट इलाके के नेरी कलां में उत्तर प्रदेश राज्य भंडारण निगम का गोदाम है, जिसमें सरकारी गेहूं, चावल का स्टॉक रहता है। गोदाम से गेहूं व चावल से भरे 23 हजार 148 बोरे गायब हो गए। जांच में मामला सामने आने के बाद विभाग से जुड़े अफसरों के होश उड़ गए। गायब सरकारी राशन की कीमत चार करोड़ 14 लाख 938 रुपये बताई गई है। इतने बड़े पैमाने पर हुए अनाज घोटाले ने एक बार फिर से सीतापुर को चर्चा में ला दिया है।
उत्तर प्रदेश राज्य भंडारण निगम क्षेत्रीय कार्यालय लखनऊ के प्रबंधक संजीव कुमार ने मंगलवार को रामकोट थाने में तहरीर देकर चार करोड़ 14 लाख 58 हजार 938 रुपये के गबन का मामला प्राविधिक सहायक लखीमपुर के ऑफीसर कालोनी के निवासी अशोक कुमार शुक्ला पर दर्ज कराया था। अशोक के पास पास गोदाम का चार्ज था। इसके अलावा केंद्र के प्रभारी भी थे।
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करोड़ों के सरकारी अनाज के गबन होने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। सूत्रों की माने तो करोड़ों के हुए इस खेल में कई और जिम्मेदारों पर कार्रवाई की जा सकती है। सूत्रों का कहना है कि अगर मामले में निष्पक्ष पड़ताल की गई तो कई पर कार्रवाई होना तय है। जिले में अनाज घोटाले का यह कोई पहला मामला नहीं है, इससे पहले भी 2004 में अनाज घोटाला हुआ था। मामला काफी चर्चा में रहा था। इसकी जांच सीबीआई कर रही हैं। जांच के दायरे में नेता, अफसर से लेकर कोटेदार तक आए थे, लेकिन अभी तक इस मामले में कार्रवाई आगे नहीं बढ़ सकी है।
करोड़ों के खेल में कई और है किरदार
विभागीय सूत्रों की माने तो भले ही इस मामले में शुुरुआती दौर में गोदाम इंचार्ज की जिम्मेदारी तय करते हुए करोड़ों के गबन का केस दर्ज करा दिया गया हो, लेकिन इस पूरे खेल का वह अकेला किरदार नहीं है, इसमें कई और जिम्मेदार भी शामिल हो सकते हैं। जानकार बताते हैं कि इतना बड़ा घोटाला गोदाम इंचार्ज अकेले नहीं कर सकता। अब इस पूरे खेल में कौन-कौन शामिल है। यह तो जांच के बाद ही साफ हो सकेगा।
जांच के दायरे में आए कई और, हटेगा पूरा स्टाफ
घोटाले में गोदाम इंचार्ज अशोक शुक्ला पर गबन का केस दर्ज कराने के बाद मामले में जांच का दायरा और बढ़ा दिया गया है। निगम के क्षेत्रीय प्रबंधक संजीव कुमार की माने तो राज्य भंडारण निगम के एमडी श्रीकांत गोस्वामी ने रामकोट के नेरी कलां स्थित गोदाम के प्राविधिक सहायक सरोज कुमार, वीरभान यादव, कनिष्ठ सहायक मुकलेश शुक्ला के खिलाफ जांच के आदेश दे दिए हैं।
तीनों लोग संदेह के घेरे में हैं। बताया कि इसके अलावा गोदाम में तैनात सभी कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय की जाएगी, जिसमें छोटे से लेकर बड़े कर्मचारी तक शामिल होंगे। सभी को यहां से हटाया जाएगा। पूरा स्टाफ नया रखा जाएगा।
गोदाम से मांगी गई है सूची
निगम के क्षेत्रीय प्रबंधक संजीव कुमार ने बताया कि गोदाम में तैनात सभी कर्मचारियों की सूची गोदाम से मांगी गई है। सूची मिलने के बाद पता चल सकेगा कि यहां पर कितने लोग तैनात थे। यह भी देखा जाएगा कि कैसे और किस आदेश के तहत किस-किस को यहां पर रखा गया है। गबन के मामले की जांच एमडी ने निगम के उप प्रबंधक मनीष सोनकर को सौंपी है। वह पूरे मामले की जांच करेंगे। जांच के बाद मामले में शामिल जिम्मेदारों पर जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई की जाएगी।
गोदाम इंचार्ज निलंबित, नए को जिम्मेदारी
गबन के आरोप में फंसे गोदाम इंचार्ज अशोक शुक्ला पर केस दर्ज होने के साथ ही उन्हें नेरी गोदाम से हटा दिया गया है। क्षेत्रीय प्रबंधक संजीव कुमार ने बताया कि गोदाम इंचार्ज को सस्पेंड भी कर दिया गया है। उन्हें अब फैजाबाद में अटैच किया गया है। नेरी गोदाम पर नए गोदाम इंचार्ज की तैनाती हो गई है।
बंगाल और नेपाल भेजा गया था गरीबों का निवाला
17 साल पहले जिले में हुए अनाज घोटाले को लेकर फ्लैश बैक में चलते हैं। मामला 2004 का है। केंद्र सरकार ने गरीबों के लिए अनाज योजना लागू की थी। योजना की मंशा गांवों में मजदूरी करने वाले श्रमिकों को काम के एवज में अनाज मुहैया कराना था, लेकिन इसमें भी बड़े पैमाने पर खेल हुआ था। सूत्रों की माने तो गरीबों के लिए आने वाले अनाज को घोटालेबाजों ने बंगाल और नेपाल भेज दिया था।
करोड़ों का बड़ा घोटाला सामने आने के बाद मामले की जांच सीबीआई को सौंपी गई थी। इस मामले में जिले के कई नेता से लेकर अफसर, कोटेदार, प्रधानों तक की गर्दनें फंसी थी। केस दर्ज हुआ था। कई बार सीबीआई जिले में आकर जांच कर चुकी है। कोटेदारों को बुलाकर पूछताछ की जा चुकी है, लेकिन जांच अंजाम तक नहीं पहुंच सकी है।
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रामकोट इलाके के नेरी कलां में उत्तर प्रदेश राज्य भंडारण निगम का गोदाम है, जिसमें सरकारी गेहूं, चावल का स्टॉक रहता है। गोदाम से गेहूं व चावल से भरे 23 हजार 148 बोरे गायब हो गए। जांच में मामला सामने आने के बाद विभाग से जुड़े अफसरों के होश उड़ गए। गायब सरकारी राशन की कीमत चार करोड़ 14 लाख 938 रुपये बताई गई है। इतने बड़े पैमाने पर हुए अनाज घोटाले ने एक बार फिर से सीतापुर को चर्चा में ला दिया है।
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उत्तर प्रदेश राज्य भंडारण निगम क्षेत्रीय कार्यालय लखनऊ के प्रबंधक संजीव कुमार ने मंगलवार को रामकोट थाने में तहरीर देकर चार करोड़ 14 लाख 58 हजार 938 रुपये के गबन का मामला प्राविधिक सहायक लखीमपुर के ऑफीसर कालोनी के निवासी अशोक कुमार शुक्ला पर दर्ज कराया था। अशोक के पास पास गोदाम का चार्ज था। इसके अलावा केंद्र के प्रभारी भी थे।
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करोड़ों के सरकारी अनाज के गबन होने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। सूत्रों की माने तो करोड़ों के हुए इस खेल में कई और जिम्मेदारों पर कार्रवाई की जा सकती है। सूत्रों का कहना है कि अगर मामले में निष्पक्ष पड़ताल की गई तो कई पर कार्रवाई होना तय है। जिले में अनाज घोटाले का यह कोई पहला मामला नहीं है, इससे पहले भी 2004 में अनाज घोटाला हुआ था। मामला काफी चर्चा में रहा था। इसकी जांच सीबीआई कर रही हैं। जांच के दायरे में नेता, अफसर से लेकर कोटेदार तक आए थे, लेकिन अभी तक इस मामले में कार्रवाई आगे नहीं बढ़ सकी है।
करोड़ों के खेल में कई और है किरदार
विभागीय सूत्रों की माने तो भले ही इस मामले में शुुरुआती दौर में गोदाम इंचार्ज की जिम्मेदारी तय करते हुए करोड़ों के गबन का केस दर्ज करा दिया गया हो, लेकिन इस पूरे खेल का वह अकेला किरदार नहीं है, इसमें कई और जिम्मेदार भी शामिल हो सकते हैं। जानकार बताते हैं कि इतना बड़ा घोटाला गोदाम इंचार्ज अकेले नहीं कर सकता। अब इस पूरे खेल में कौन-कौन शामिल है। यह तो जांच के बाद ही साफ हो सकेगा।
जांच के दायरे में आए कई और, हटेगा पूरा स्टाफ
घोटाले में गोदाम इंचार्ज अशोक शुक्ला पर गबन का केस दर्ज कराने के बाद मामले में जांच का दायरा और बढ़ा दिया गया है। निगम के क्षेत्रीय प्रबंधक संजीव कुमार की माने तो राज्य भंडारण निगम के एमडी श्रीकांत गोस्वामी ने रामकोट के नेरी कलां स्थित गोदाम के प्राविधिक सहायक सरोज कुमार, वीरभान यादव, कनिष्ठ सहायक मुकलेश शुक्ला के खिलाफ जांच के आदेश दे दिए हैं।
तीनों लोग संदेह के घेरे में हैं। बताया कि इसके अलावा गोदाम में तैनात सभी कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय की जाएगी, जिसमें छोटे से लेकर बड़े कर्मचारी तक शामिल होंगे। सभी को यहां से हटाया जाएगा। पूरा स्टाफ नया रखा जाएगा।
गोदाम से मांगी गई है सूची
निगम के क्षेत्रीय प्रबंधक संजीव कुमार ने बताया कि गोदाम में तैनात सभी कर्मचारियों की सूची गोदाम से मांगी गई है। सूची मिलने के बाद पता चल सकेगा कि यहां पर कितने लोग तैनात थे। यह भी देखा जाएगा कि कैसे और किस आदेश के तहत किस-किस को यहां पर रखा गया है। गबन के मामले की जांच एमडी ने निगम के उप प्रबंधक मनीष सोनकर को सौंपी है। वह पूरे मामले की जांच करेंगे। जांच के बाद मामले में शामिल जिम्मेदारों पर जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई की जाएगी।
गोदाम इंचार्ज निलंबित, नए को जिम्मेदारी
गबन के आरोप में फंसे गोदाम इंचार्ज अशोक शुक्ला पर केस दर्ज होने के साथ ही उन्हें नेरी गोदाम से हटा दिया गया है। क्षेत्रीय प्रबंधक संजीव कुमार ने बताया कि गोदाम इंचार्ज को सस्पेंड भी कर दिया गया है। उन्हें अब फैजाबाद में अटैच किया गया है। नेरी गोदाम पर नए गोदाम इंचार्ज की तैनाती हो गई है।
बंगाल और नेपाल भेजा गया था गरीबों का निवाला
17 साल पहले जिले में हुए अनाज घोटाले को लेकर फ्लैश बैक में चलते हैं। मामला 2004 का है। केंद्र सरकार ने गरीबों के लिए अनाज योजना लागू की थी। योजना की मंशा गांवों में मजदूरी करने वाले श्रमिकों को काम के एवज में अनाज मुहैया कराना था, लेकिन इसमें भी बड़े पैमाने पर खेल हुआ था। सूत्रों की माने तो गरीबों के लिए आने वाले अनाज को घोटालेबाजों ने बंगाल और नेपाल भेज दिया था।
करोड़ों का बड़ा घोटाला सामने आने के बाद मामले की जांच सीबीआई को सौंपी गई थी। इस मामले में जिले के कई नेता से लेकर अफसर, कोटेदार, प्रधानों तक की गर्दनें फंसी थी। केस दर्ज हुआ था। कई बार सीबीआई जिले में आकर जांच कर चुकी है। कोटेदारों को बुलाकर पूछताछ की जा चुकी है, लेकिन जांच अंजाम तक नहीं पहुंच सकी है।