{"_id":"64496a8161cff710fb03dc8c","slug":"there-is-an-ultrasound-machine-but-there-is-no-one-to-operate-it-sitapur-news-c-13-1-202227-2023-04-26","type":"story","status":"publish","title_hn":"Sitapur News: अल्ट्रासाउंड मशीन तो है लेकिन चलाने वाला कोई नहीं","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Sitapur News: अल्ट्रासाउंड मशीन तो है लेकिन चलाने वाला कोई नहीं
Wed, 26 Apr 2023 11:46 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
Updated Wed, 26 Apr 2023 11:46 PM IST
विज्ञापन
सीतापुर। जिला महिला अस्पताल की अल्ट्रासाउंड जांच व्यवस्था सुधरने का नाम नहीं ले रही है। यहां अल्ट्रासाउंड मशीन तो चालू हालत में है, लेकिन इसको चलाने वाला कोई चिकित्सक नहीं। जबकि जिला अस्पताल में दो-दो चिकित्सकों की तैनाती है।
इस पर जिलाधिकारी ने महिलाओं की समस्या को देखते हुए यहां के एक चिकित्सक की तीन दिन ड्यूटी महिला अस्पताल में लगाई थी। इसके अलावा अन्य दिनों में जिला अस्पताल बुलाया जाता है। वहां पर पहले से ही अतिरिक्त भार होने से महिलाओं को बाहर से जांच करवानी पड़ती है। इससे रोजाना 20 से 30 महिलाएं प्रभावित होती हैं।
अगर महिला अस्पताल की मरीज जिला अस्पताल जाती हैं तो उन्हें उसी दिन जांच करवा पाना मुश्किल होता है। जिला अस्पताल में पहले से ही काफी भार है। रोजाना 60 से 70 वहां पर जांचें होती है। ऐसे में बाहर से जांच मजबूरी हो जाती है। बाहर जांच करवाने के लिए करीब 800 रुपये अतिरिक्त खर्च करने पड़ते है।
विज्ञापन
15 मिनट तक फंसी एंबुलेंस, पार्किंग देखने वाला कोई नहीं
जिला अस्पताल में जब भी मरीज आते है तो वह जांच केंद्र व हदय रोग तक पहुंचने के लिए ओपीडी के पड़ोस से निकलते है। यहां पर लोग अपने वाहन बेतरतीब तरीके से खड़ा कर देते है। जिला अस्पताल में पार्किंग का ठेका समाप्त होने से इस पार्किंग को देखने वाला कोई नहीं है। इससे जिसकी जहां पर मर्जी होती है वह वहां पर वाहन खड़ा कर देता है। इससे दिनभर एंबुलेंस यहां पर फंसी रहती है। बुधवार को भी एक एंबुलेंस करीब 15 मिनट तक फंसी रही।
कैसे निपटेंगे कोरोना से, नहीं हो रहा पालन
जिला अस्पताल में कोरोना के बढ़ते संक्रमण को देखते हुए प्रोटोकॉल का पालन करने के निर्देश दिए गए है। इसके लिए पर्चा काउंटर के बाहर गोले बना दिए गए थे। इन गोलों पर ही मरीजों को खड़े होने के निर्देश है, लेकिन इसकी धज्जियां उड़ती हुई दिखाई दी। अधिकतर मरीज न तो गोले पर खड़े दिखाई दिए न ही वह मॉस्क लगाए हुए थे। इससे अस्पताल में संक्रमण के फैलाव की संभावना बनी हुई है।
विज्ञापन
इस पर जिलाधिकारी ने महिलाओं की समस्या को देखते हुए यहां के एक चिकित्सक की तीन दिन ड्यूटी महिला अस्पताल में लगाई थी। इसके अलावा अन्य दिनों में जिला अस्पताल बुलाया जाता है। वहां पर पहले से ही अतिरिक्त भार होने से महिलाओं को बाहर से जांच करवानी पड़ती है। इससे रोजाना 20 से 30 महिलाएं प्रभावित होती हैं।
विज्ञापन
अगर महिला अस्पताल की मरीज जिला अस्पताल जाती हैं तो उन्हें उसी दिन जांच करवा पाना मुश्किल होता है। जिला अस्पताल में पहले से ही काफी भार है। रोजाना 60 से 70 वहां पर जांचें होती है। ऐसे में बाहर से जांच मजबूरी हो जाती है। बाहर जांच करवाने के लिए करीब 800 रुपये अतिरिक्त खर्च करने पड़ते है।
विज्ञापन
15 मिनट तक फंसी एंबुलेंस, पार्किंग देखने वाला कोई नहीं
जिला अस्पताल में जब भी मरीज आते है तो वह जांच केंद्र व हदय रोग तक पहुंचने के लिए ओपीडी के पड़ोस से निकलते है। यहां पर लोग अपने वाहन बेतरतीब तरीके से खड़ा कर देते है। जिला अस्पताल में पार्किंग का ठेका समाप्त होने से इस पार्किंग को देखने वाला कोई नहीं है। इससे जिसकी जहां पर मर्जी होती है वह वहां पर वाहन खड़ा कर देता है। इससे दिनभर एंबुलेंस यहां पर फंसी रहती है। बुधवार को भी एक एंबुलेंस करीब 15 मिनट तक फंसी रही।
कैसे निपटेंगे कोरोना से, नहीं हो रहा पालन
जिला अस्पताल में कोरोना के बढ़ते संक्रमण को देखते हुए प्रोटोकॉल का पालन करने के निर्देश दिए गए है। इसके लिए पर्चा काउंटर के बाहर गोले बना दिए गए थे। इन गोलों पर ही मरीजों को खड़े होने के निर्देश है, लेकिन इसकी धज्जियां उड़ती हुई दिखाई दी। अधिकतर मरीज न तो गोले पर खड़े दिखाई दिए न ही वह मॉस्क लगाए हुए थे। इससे अस्पताल में संक्रमण के फैलाव की संभावना बनी हुई है।