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Sitapur News: कठिना के कछार में फिर बाघ की दहशत

Thu, 20 Mar 2025 12:18 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Thu, 20 Mar 2025 12:18 AM IST
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The terror of the tiger again on the brink of difficulty
महोली (सीतापुर)। करीब चार महीने बाद बाघ एक बार फिर कठिना नदी के कछार में पहुंच गया है। मंगलवार को बाघ ने एक ग्रामीण पर हमला बोला था। लोगों के शोर मचाने पर बाघ छलांग लगाकर झाड़ियों में चला गया था। वन विभाग ने बुधवार को ट्रैप कैमरे लगाने का दावा किया था, लेकिन इस दिशा में कोई कदम नहीं उठाया। इलाके में दोबारा बाघ की चहलकदमी से ग्रामीण खौफजदा हैं। उनका कहना है कि वन विभाग द्वारा बाघ को पकड़ने के लिए ठोस प्रयास नहीं किए जाने से बाघ नदी किनारे बसेरा बनाए है। इससे ग्रामीणों के लिए खतरा बना हुआ है। वहीं, दूसरी ओर वन विभाग इलाके में जल्द ट्रैप कैमरे लगाने की बात कही जा रही है।
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बता दें कि पांच वर्षों से इलाके के एक दर्जन गांवों में बाघ का आतंक बना हुआ था। ग्रामीणों की खेती बाड़ी से लेकर बच्चों की शिक्षा तक प्रभावित हो रही थी। पिछले तीन-चार माह से इलाके में बाघ की चहलकदमी न होने से ग्रामीणों ने राहत की सांस ली थी। लोग कयास लगा रहे थे कि बाघ दूसरे इलाके में चला गया है। धीरे-धीरे लोग अपनी दिनचर्या सामान्य करने लगे थे तथा खेती-बाड़ी की देखरेख भी करने लगे थे। इसी बीच मंगलवार को कठिना नदी की तराई में बसे सीतारामपुर गांव के बुजुर्ग महेश पर बाघ ने उस समय हमला कर दिया जब वह दोपहर में अपने मवेशियों को पानी पिलाने नदी के इमलिया घाट पर ले गए थे।
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बुजुर्ग के मुताबिक अचानक झाड़ियों से निकलकर बाघ ने उन पर हमलाकर दिया। लोगों के शोर मचाने पर बाघ बुजुर्ग को छोड़कर झाड़ियों में चला गया। परिजन घायल बुजुर्ग को सीएचसी ले गए थे, जहां से चिकित्सक ने उन्हें जिला अस्पताल रेफर कर दिया था, वहां उनका इलाज चल रहा है। जानकारी मिलते ही डीएफओ नवीन खंडेलवाल ने घटनास्थल पर पहुंचकर जायजा लिया था और ग्रामीणों से बातचीत कर विभाग के कर्मचारियों को ट्रैप कैमरे लगाने के लिए निर्देश दिए थे। बुधवार को महोली वन रेंज की टीम ने क्षेत्र में कॉम्बिग की। हालांकि, टीम को कोई पगचिह्न नहीं मिले हैं। क्षेत्रीय वनाधिकारी केएन भार्गव ने बताया कि वन विभाग की टीम लगातार निगरानी कर रही है। बुधवार को कॉम्बिग के दौरान ताजा पगचिह्न नहीं मिले हैं। ग्रामीणों को सतर्क रहने के लिए जागरूक किया जा रहा है।
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फैक्ट फाइल -
- नौ अगस्त 2024: विधायक शशांक त्रिवेदी के गांव ब्रम्हावली के क्लेश हरण मंदिर के निकट बाघ के पगचिह्न मिले थे। तत्कालीन उप प्रभागीय वनाधिकारी विकास कुमार यादव ने स्थलीय निरीक्षण किया था। 11 अगस्त को पिंजरा लगाया गया था।

- 21 अगस्त 2024: ब्रम्हावली गांव के बाहर ग्रामीणों ने बाघ के साथ दो शावकों को देखने का दावा किया था। दूसरे दिन यहां तीन ट्रैप कैमरे भी लगाए गए थे।
- 24 अगस्त 2024: पसिगवां गांव के रामकुमार व बनवारी खेतों की तरफ जा रहे थे, इसी दौरान अमरीश यादव के गन्ने के खेत में बाघ को देखने का दावा किया था। वन विभाग को सूचना दी गई थी। ग्रामीणों ने आरोप लगाया था कि वनकर्मियों ने गोला दागकर बाघ को भगा दिया था।
- 21 सिंतबर 2024: श्यामजीरा गांव के निकट बाघ ने एक सांड को निवाला बनाया था। वन विभाग ने पिंजरा व ट्रैप कैमरे भी लगाए थे, लेकिन बाघ न तो पिंजरे में कैद हुआ न उसकी तस्वीर ही कैमरे में आ सकी थी।

- 23 सिंतबर 2024: ब्रम्हावली के मजरा मूड़ा में बाघ ने एक मवेशी का शिकार किया था। मूड़ा के रमाकांत के खेत में एक गाय का क्षत-विक्षत शव मिला था। वन विभाग को ताजा पगचिह्न भी मिले थे। पिंजरा व ट्रैप कैमरा लगाए गए, लेकिन बाघ वनविभाग की पकड़ से दूर रहा।
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