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Sitapur News: चुनावी माहौल में संतों की नब्ज टटोल रहा संघ

Fri, 09 Oct 2026 11:07 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Fri, 09 Oct 2026 11:07 PM IST
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The Sangh is gauging the mood of the saints amidst the election atmosphere.
रामाश्रम में संतों से मुलाकात करते संघ के प्रांत प्रचारक कौशल किशोर
अयोध्या। विधानसभा चुनाव की आहट के बीच रामनगरी में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) का संत संपर्क अभियान एक बार फिर सक्रिय नजर आ रहा है। संघ के पदाधिकारी अयोध्या के मठ-मंदिरों में पहुंचकर साधु-संतों से मुलाकात कर रहे हैं। उनके साथ बैठकर भोजन करने और संवाद के जरिये संत समाज के बीच चल रही चर्चाओं और प्रमुख मुद्दों की जानकारी जुटाई जा रही है। खास तौर पर राम मंदिर में चढ़ावा चोरी प्रकरण का संत समाज और धार्मिक क्षेत्र पर पड़े असर का फीडबैक लिया जा रहा है।
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पिछले करीब एक पखवाड़े में संघ के क्षेत्र प्रचारक अनिल और प्रांत प्रचारक कौशल किशोर अयोध्या पहुंचकर संतों से मुलाकात कर चुके हैं। इसके अलावा संघ से जुड़े अन्य पदाधिकारियों का संतों से संपर्क लगातार जारी है। वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले अयोध्या में संत समाज के बीच संघ की बढ़ती सक्रियता को राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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संपर्क अभियान में जातीय और पंचायती मंदिरों पर विशेष जोर दिया जा रहा है। अयोध्या में छोटे-बड़े करीब आठ हजार मठ-मंदिर हैं। इनकी अपनी परंपराएं, सामाजिक आधार और धार्मिक महत्व हैं। जातीय और पंचायती मंदिरों का अपने-अपने समाज और समुदाय में विशेष प्रभाव माना जाता है। ऐसे में इन मंदिरों के संतों से संवाद के जरिये संघ रामनगरी के धार्मिक और सामाजिक माहौल को करीब से समझने की कोशिश कर रहा है।
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इसके साथ ही यह भी जानने का प्रयास किया जा रहा है कि राम मंदिर से जुड़े विवादों का धार्मिक क्षेत्र में कितना असर है और आगामी विधानसभा चुनाव में इसका कितना प्रभाव पड़ सकता है। हालांकि, संघ के एक वरिष्ठ पदाधिकारी इसे चुनाव से जोड़कर देखने से इन्कार करते हैं। उनका कहना है कि संतों से संपर्क करना संघ की नियमित गतिविधि है। इसके लिए अलग से कोई अभियान नहीं चलाया जा रहा है।

चढ़ावा चोरी प्रकरण के बाद भी हुई थी पहल
राम मंदिर में चढ़ावा चोरी का मामला सामने आने के बाद संत समाज के बीच ट्रस्ट की कार्यप्रणाली को लेकर चर्चाएं तेज हो गई थीं। इसके बाद संघ के प्रयास से संतों की एक बैठक हुई थी। बैठक में संतों ने ट्रस्ट और तत्कालीन महासचिव चंपत राय के पक्ष में अपनी बात रखी थी। संतों ने चंपत राय को निर्दोष बताते हुए उनके प्रति समर्थन जताया था। बाद में एसआईटी की जांच में चंपत राय को आरोपी नहीं बनाया गया और उन्हें गवाह के रूप में शामिल किया गया।
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