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दीपदान से बिखरी मनमोहक छटा
सीतापुर/अमरउजाला ब्यूरो
Updated Mon, 16 Nov 2015 11:27 PM IST
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छठ पूजा के दूसरे दिन सोमवार को श्रद्धालुओं ने परंपरा के अनुसार खरना की रस्म निभाई। इस दौरान श्रद्धालुओं ने व्रत रखा और घरों पर अपने इष्ट देव की पूजा अर्चन की। सायं की बेला में नदी, नहर, तालाब के तटों पर श्रद्धालुओं ने दीपदान किया। भगवान को खीर पूड़ी के साथ मौसमी फलों का भोग लगाया। साथ ही घाटों पर बेदी बनाने का सिलसिला भी जारी रहा।
चार दिवसीय छठ पूजा जिले भर में धूमधाम के साथ मनाई जा रही है। पूजा के दूसरे दिन सोमवार को खरना हुआ। सुबह से ही श्रद्धालुओं ने व्रत रखा। इस दौरान अपने घरों की साफ सफाई करके देवी देवताओं की विधि विधान से पूजा अर्चना की। उसके बाद शाम के समय तालाब, नदी, नहर के तटों पर जाकर दीपदान किया।
शहर में मुख्य रूप से 27वीं वाहिनी पीएसी, गोल्फ ग्राउंड के तालाब तथा ताड़कनाथ मंदिर परिसर में छठ पूजा होती है। श्रद्धालुओं ने यहां तालाब व सरायन नदी में दीपदान किया। शाम के समय खीर-पूड़ी के साथ मौसमी फलों का भोग लगाया। इसके साथ ही तटों पर देर रात्रि तक बेदी बनाने का सिलसिला चलता रहा।
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गौरतलब है कि छठ पूजा परिवार में सुख-समृद्धि, शांति, वैभव और अपनी संतानों की उन्नति के लिए की जाती है। अपने पाल्यों की समृद्धि और मंगलकामना के लिए होने वाली इस पूजा में पवित्रता का विशेष ख्याल रखा जाता है। उगते सूरज और ढलते सूरज को अर्ध्य देने के साथ ही यह पूजा सम्पन्न होती है।
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चार दिवसीय छठ पूजा जिले भर में धूमधाम के साथ मनाई जा रही है। पूजा के दूसरे दिन सोमवार को खरना हुआ। सुबह से ही श्रद्धालुओं ने व्रत रखा। इस दौरान अपने घरों की साफ सफाई करके देवी देवताओं की विधि विधान से पूजा अर्चना की। उसके बाद शाम के समय तालाब, नदी, नहर के तटों पर जाकर दीपदान किया।
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शहर में मुख्य रूप से 27वीं वाहिनी पीएसी, गोल्फ ग्राउंड के तालाब तथा ताड़कनाथ मंदिर परिसर में छठ पूजा होती है। श्रद्धालुओं ने यहां तालाब व सरायन नदी में दीपदान किया। शाम के समय खीर-पूड़ी के साथ मौसमी फलों का भोग लगाया। इसके साथ ही तटों पर देर रात्रि तक बेदी बनाने का सिलसिला चलता रहा।
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गौरतलब है कि छठ पूजा परिवार में सुख-समृद्धि, शांति, वैभव और अपनी संतानों की उन्नति के लिए की जाती है। अपने पाल्यों की समृद्धि और मंगलकामना के लिए होने वाली इस पूजा में पवित्रता का विशेष ख्याल रखा जाता है। उगते सूरज और ढलते सूरज को अर्ध्य देने के साथ ही यह पूजा सम्पन्न होती है।