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स्वत्रंता संग्राम सेनानियों से सूनी हुई सीतापुर की धरती

Thu, 09 Jun 2022 12:27 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Thu, 09 Jun 2022 12:27 AM IST
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The land of Sitapur was heard from the freedom fighters
जवाहर लाल नेहरू के साथ स्व. स्वतंत्रता संग्राम सेनानी शिव नारायण शर्मा। (एक दम साइड में खड़े सिल्? - फोटो : SITAPUR
सीतापुर। जिले की धरती अब स्वत्रंता संग्राम सेनानियों से खाली हो गई है। जिले के एकमात्र गौरव रहे स्वतंत्रता संग्राम सेनानी पंडित शिव नारायण लाल शर्मा का मंगलवार देर रात लंबी बीमारी के कारण निधन हो गया। करीब 98 वर्ष के शिव नारायण लाल शर्मा कई दिनों से बीमार चल रहे थे। करीब डेढ़ माह से वह जिला अस्पताल में भर्ती थे। उन्होंने आखिरी सांस ली। उनके निधन की खबर सुनते ही जिले में शोक की लहर दौड़ गई। हर दल के नेताओं, समाजसेवियों और प्रशासनिक अमले ने शोक व्यक्त किया है।
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जिला अस्पताल में निधन के बाद बुधवार को जब उनका पार्थिव शरीर शहर कोतवाली स्थित मोहल्ला आलमनगर पहुंचा तो उनके अंतिम दर्शन के लिए लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। उनके आवास पर पहुंचकर एसडीएम सदर अनिल कुमार, सीओ सिटी पियूष कुमार और शहर कोतवाल टीपी सिंह ने तिरंगा ओढ़ाते हुए उनका सम्मान किया।
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नगर विकास मंत्री राकेश राठौर गुरु, कांग्रेस जिलाध्यक्ष उत्कर्ष अवस्थी, जिला उपाध्यक्ष शिशिर बाजपेई, हरीश बाजपेई आदि ने उनके अंतिम दर्शन किए। बुधवार को दोपहर करीब दो बजे उनका पार्थिव शरीर शहर के गोपालाघाट मुक्तिधाम पहुंचा, जहां उनको राजकीय शोक के साथ सलामी दी गई। इसके बाद बेटे ने उनका अंतिम संस्कार किया। शुक्रवार को उनके घर शांति हवन किया जाएगा।
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1924 में हुआ था जन्म, आजादी के थे दीवाने
स्वतंत्रता संग्राम स्मृति संस्थान के अध्यक्ष हरीश वाजपेई ने बताया कि पं. शिवनारायण लाल शर्मा का जन्म 1924 को नवंबर माह में राजस्थान प्रांत में हुआ था। फिर अपने रिश्तेदार के यहां कानपुर में रहे और चार साल की उम्र में वह अपने परिवार के साथ सीतापुर शहर के मोहल्ला होली नगर में एक किराये के मकान में रहने लगे थे। 11 वर्ष की आयु में उनके पिता का देहावसान हो गया था। धन के अभाव के कारण वह सिर्फ सात वीं कक्षा तक ही पढ़ाई कर सके।
1942 महात्मा गांधी के आह्वान पर शुरू हुए भारत छोड़ो आंदोलन में उन्होंने महती भूमिका निभाई थी। उन्होंने भारत का झंडा बुलंद कर ब्रिटिश सत्ता का विरोध किया था। जिसके बाद अंग्रेजों ने उनको गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। जिसके कुछ दिनों बाद लालबाग पार्क में गोलियां चली थी और कई लोग शहीद हो गए थे। इस कांड के भी वह प्रत्यक्षदर्शी थे।
आखिरी गौरव थे शिवनारायण
हरीश वाजपेई ने बताया कि एक समय था जब यहां कई स्वत्रंता संग्राम सेनानी थे। वह हर वर्ष कार्यक्रम का आयोजन कर सभी को सम्मानित किया करते थे। उनके समय में हनुमान प्रसाद, शिवनारायण लाल शर्मा, कृष्ण चंद्र गुप्त, कन्हैया लाल महेंद्र, अवधेश, संतशास्त्री, जगन्नाथ प्रसाद, हरीश चंद्र, कृपा दयाल, इंदू शेखर सिंह स्वत्रंता संग्राम सेनानी के रूप में रहे हैं। शिव नारायण लाल शर्मा के पहले महोली के हनुमान प्रसाद का निधन हुआ था।
भरा पूरा परिवार छोड़ गए शिव नारायण
पंडित शिव नारायण लाल शर्मा अपने पीछे एक भरा पूरा परिवार छोड़ गए हैं। उनके पोते बिक्कू ने बताया कि उनके पांच बेटे थे। ओमप्रकाश शर्मा, विजय कुमार शर्मा, अजय शर्मा पहले ही दिवंगत हो चुके हैं। इसके अलावा उनके दो बेटे अशोक शर्मा, राजकुमार शर्मा और एक बेटी विमला शर्मा अभी जीवित है। परिवार में किसी चीज की कोई कमी नहीं थी।
राजनीति पर अलग ही रखते थे राय
एक साक्षात्कार में उन्होंने कहा था कि उनके समय में जो राजनीति हुआ करती थी वह प्रलोभन की नहीं होती थी। लोगों को अपने प्रत्याशी पर इतना भरोसा होता था कि वह उसे नि:स्वार्थ वोट देते थे, तब चुनाव लड़ने वाला प्रत्याशी साइकिल से वोट मांगता था और जीत भी हासिल करता था। उनका कहना था कि एक समय था हर दल का प्रत्याशी उनके पास आकर जीत का आशीर्वाद लेता था। कई चुनावी सभाओं में उनको बुलाया भी जाता था लेकिन बदलते समय के साथ नेता भी बदल गए। अब शायद किसी को उनकी जरूरत नहीं थी। उन्होंने अपने पास मौजूद एक चित्र में दिखाया था कि वह पंडित जवाहरलाल नेहरू, कांग्रेस की महासचिव प्रियंका गांधी के साथ काफी समय रहे हैं।
आखिरी समय में हुए थे उपेक्षा का शिकार
जीवन के आखिरी सालों में पंडित शिव नारायण लाल शर्मा अफसरों की कारगुजारी का भी शिकार हुए। जिनके आंदोलनों से यह देश आज खुली हवा में सांस ले रहा है, उनका सम्मान आखिरी समय में ही नहीं हुआ। करीब दो साल पहले वह जिला अस्पताल दवा लेने गए थे तो उनके साथ तत्कालीन सीएमएस डॉ. एके अग्रवाल ने अभद्रता की थी। इस पर कई समाजसेवियों ने नाराजगी जाहिर की थी। इसके बाद वह धरने पर बैठ गए थे। जिलाधिकारी ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तीन सदस्यीय कमेटी बनाई थी। उसके बाद सीएमएस ने सार्वजनिक तौर पर माफी मांगकर पूरे मामले का पटाक्षेप किया था।

26 जनवरी व 15 अगस्त को डीएम करते थे सम्मानित
पंडित शिवनारायण लाल शर्मा जिले में इकलौते स्वतंत्रता संग्राम सेनानी थे। इसलिए प्रत्येक वर्ष 26 जनवरी 15 अगस्त को उन्हें कलेक्ट्रेट सभागार में बुलाया जाता था। जिलाधिकारी उन्हें सम्मानित करते थे। वह देश की आजादी में दिए गए योगदान को लोगों को बताते थे। इनके जाने से हर तरफ लोगों की आंखें नम है। इनकी याद करके लोगों की आंखों में आंसू आ गए।
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