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मां ललिता देवी मंदिर के कपाट बंद

Sat, 21 Mar 2020 09:03 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Sat, 21 Mar 2020 09:03 PM IST
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The doors of Maa Lalitha Devi temple closed
सीतापुर। जिले में कोरोना के असर से सदियों पुरानी धार्मिक व पौराणिक परंपराएं भी टूट गई हैं। विश्व प्रसिद्ध नैमिषारण्य तीर्थ में अग्रिम आदेशों तक मां ललिता देवी मंदिर के कपाट बंद कर दिए गए हैं। खैराबाद के प्राचीन मिलाद और कमलापुर के महोठेरानी मेला समेत कई धार्मिक आयोजनों पर ब्रेक लगा दिया गया है।
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पुरातन काल से चले आ रहे इन धार्मिक आयोजनों को पहली बार स्थगित किया गया है। इसकी सूचना शनिवार को जारी करते हुए कोरोना से बचाव के लिए संयम व सावधानी बरतने को कहा गया है।
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88 हजार ऋषि-मुनियों की तप स्थली पावन नैमिषारण्य तीर्थ पर शक्तिपीठ मां ललिता देवी के दर्शन भक्त नहीं कर सकेंगे। इस प्राचीन मंदिर को अग्रिम आदेशों तक पूरी तरह से बंद कर दिया गया है। रिसीवर/अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश कोर्ट संख्या 5 रामकुशल ने इस आशय के निर्देश जारी किए हैं।
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जिसमें कहा गया है कि विश्वव्यापी महामारी कोविद-19 कोरोना वायरस के प्रभाव को दृष्टिगत रखते हुए केन्द्र व प्रदेश सरकार के दिशा निर्देश के अनुपालन में मां ललिता देवी मंदिर समिति की आकस्मिक बैठक 21 मार्च को आयोजित की गई।
बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि 31 मार्च या अग्रिम आदेश तक भक्तों के आवागमन को प्रतिबंधित करने के लिए मां ललिता देवी मंदिर को पूर्णतया बंद कर दिया जाए। मंदिर प्रबंधक मुन्नालाल श्रीमाली ने बताया यह निर्णय तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है। चक्रतीर्थ का गेट भी बंद कर दिया गया है।
कमलापुर क्षेत्र में लगभग 200 वर्षों से मां महोठेरानी मेला का आयोजन हर साल चैत्र माह में होता चला आ रहा है। कसमंडा स्टेट का राजपरिवार इस मेले कही देखरेख करता है। इतिहास में यह पहला मौका है, जब आस्था के प्रमुख स्थल महोठेरानी मंदिर पर लगने वाला मेला स्थगित कर दिया गया है।
राजपरिवार के मुखिया दिव्यकर प्रताप सिंह ने राष्ट्रहित व मानवहित में यह निर्णय लिया है। कसमंडा स्टेट के मैनेजर मधुकृष्ण पांडेय ने बताया कि हर साल चैत्र माह की पूर्णिमा से मटकी चढ़ाने के साथ शुरू होने वाला यह प्राचीन मेला इस बार 8 अप्रैल से 8 मई तक प्रस्तावित था।
कोरोना वायरस के खतरे को देखते हुए राष्ट्रहित, मानवहित व भारतीय संवैधानिक व्यवस्था को दृष्टिगत रखते हुए प्रबंध कमेटी द्वारा मां महोठेरानी मेला इस साल स्थगित करने का निर्णय लिया गया है। इसलिए मेला कमेटी द्वारा जारी निविदाएं निरस्त की जाती हैं।
150 साल पुरानी मिलाद रोकी
खैराबाद के मोहल्ला मियासरांय में रहने वाले मो. साद फारूकी कहते हैं कि इंसानियत से बड़ा कोई धर्म नहीं होता। मानवता की भलाई को लेकर 150 साल पुरानी परंपरा फिलहाल स्थगित कर दी गई है। उन्होंने बताया हमारे पूर्वजों ने मिलाद की नींव रखी थी। पिछले 150 साल से लगातार हर साल 22 मार्च को आवास पर मिलाद कार्यक्रम आयोजित कराया जा रहा है।

इस साल भी शाम 7 बजे से मिलाद होना प्रस्तावित था। इसमें दिल्ली, लखनऊ सहित कई जगहों से लगभग दो हजार जायरीन शिरकत करते हैं। इस बार कोरोना वायरस के खतरे को देखते हुए जनहित में मिलाद स्थगित कर दी गई है। मो. साद फारूकी ने जनता कफ्यू के दौरान देश के साथ खड़े रहने का संकल्प लेते हुए लोगों से इसमें सहयोग की अपील की है।
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