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अनुबंधित 71 बसें भी रूट से हटीं, गहराया संकट
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रोडवेज बस स्टैंड पर बस के इंतजार में खड़े यात्री। - संवाद
- फोटो : SITAPUR
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सीतापुर। यात्रीगण कृपया ध्यान दें... अगर आप बस अड्डे पर बस पकड़ने के लिए जा रहे हैं तो जरा ठहरिए...! डिपो से अनुबंधित सभी 71 बसों का रूट से हटा दिया गया है। चुनाव में प्रशासन की ओर अधिग्रहण किए जाने से समस्या बढ़ गई है। पहले ही बसों की किल्लत से जूझ रहे मुसाफिरों को अब दुश्वारियों का सामना करना पड़ेगा। आसपास के जिलों से लेकर लोकल रूट में सफर करने वाले मुसाफिर रविवार को बस स्टॉप पर परेशान दिखे। वह बसों के लिए भटकते रहे। घंटों इंतजार के बाद भी बसें नहीं मिल रही थी। चुनाव तक यह संकट बरकरार रहने वाला है।
रोडवेज बस अड्डे पर बसों की किल्लत वैसे तो अक्सर ही बनी रहती है, लेकिन पिछले 20 दिनों से यह संकट और गहरा गया है। पहले, दूसरे, तीसरे चरण के चुनाव ड्यूटी में गईं बसों की वजह से समस्या खड़ी हुई थी। यह समस्या अभी दूर भी नहीं हुई थी। निगम की करीब 36 बसें अभी बाहर चुनावी ड्यूटी में हैं, इसी बीच चौथे चरण के तहत 23 फरवरी को जिले में होने वाले चुनाव को लेकर जिला प्रशासन ने अनुबंधित की सभी 71 बसों को अधिग्रहण करते हुए कब्जे में ले लिया है। इससे समस्या और गहरा गई है।
पहले चुनाव की ड्यूटी में गईं 36 बसें लंबी दूरी की थीं। ये बसें नेपाल बार्डर, बनारस, आगरा, जयपुर, दिल्ली, अजमेर शरीफ आदि लांग रूटों पर चलतीं थी। इन बसों के न होने से यात्री पहले से ही काफी परेशान थे। अब अनुबंधित लोकल रूटों पर चलने वाली 71 बसों के और रूट ऑफ होने से समस्या बढ़ गई है। इसका खामियाजा पहले ही दिन रविवार को देखने को मिला।
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रविवार को अमर उजाला की टीम दोपहर एक बजे बस स्टॉप पर पहुंची तो लोकल रूट पर चलने वाली बसों के यात्री लखनऊ, महोली, शाहजहांपुर, हरदोई, हरगांव, बिसवां, महमूदाबाद, लखीमपुर, नैमिषारण्य, हरदोई जाने वाले यात्री काफी परेशान दिखे। पूरे दिन यात्री अपने गंतव्य को जाने के लिए भटकते रहे, लेकिन बसे नहीं मिल पा रहीं थीं। किसी को दिल्ली, महोली और बरेली जाना था तो किसी लखीमपुर, हरदोई और लखनऊ की ओर जाना था।
दिल्ली जाने को नहीं मिली बस
रविवार का दिन होने के बावजूद बस स्टाप पर सैकड़ों की संख्या में यात्री बसों का इंतजार कर रहे थे। बसों की किल्लत का अंदाजा इसी बात से लगा सकते हैं कि कुछ यात्री तो रोडवेज पर ऐसे भी मिले, जिनको बस से दिल्ली जाना था। इसके लिए वह शनिवार को यहां पहुुंचे थे। बस नहीं मिली। घंटों इंतजार के बाद मायूस होकर लौट गए। उम्मीद के साथ रविवार को दोबारा बस स्टॉप पर पहुंचे, लेकिन उसी समस्या दो-चार होना पड़ा।
प्राइवेट वाहनों की ले रहे मदद
बसों की बढ़ती किल्लत को देखते हुए बस अड्डे के पास प्राइवेट वाहन चालकों की चांदी हो गई है। रविवार दोपहर कई प्राइवेट वाहनों के चालक महोली, उरदौली के लिए सवारी भर रहे थे। कैमरे को देखते ही वह पास आकर बोले कि भइया जाने दो। सवारियों को दिक्कत हो रही है। इसलिए हम लोग भी जा रहे हैं। हमारी गाड़ी को भी नोटिस जारी है। शाम को इसे भी चुनाव में भेजना है।
आज बढ़ सकती समस्या
रविवार को छुट्टी का दिन था। ऐसे में मुसाफिरों की संख्या बस स्टॉप पर कम थी, लेकिन सोमवार को वर्किंग डे होने की वजह से बसों का संकट और गहरा सकता है। इसका खामियाजा सीधे तौर पर रोजाना अप-डाउन करने वाले मुसाफिरों को भुगतना पड़ सकता है। वजह, लखनऊ जाने के लिए ज्यादातर अनुबंधित बसें ही हैं, लेकिन वह भी रूट ऑफ हो चुकी हैं।
डिपो की 36 बसें पहले से ही बाहर चुनावी ड्यूटी में हैं। अनुबंधित 71 बसों को जिला प्रशासन ने रविवार को चुनाव होने तक अधिग्रहण कर लिया है, इससे दिक्कत बढ़ गई है। क्या किया जाए, किसी तरह मैनेज किया जा रहा है। अचानक इतनी संख्या में बसों के रूट ऑफ होने से परेशानी बढ़ी है।
- राकेश कुमार, एआरएम
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रोडवेज बस अड्डे पर बसों की किल्लत वैसे तो अक्सर ही बनी रहती है, लेकिन पिछले 20 दिनों से यह संकट और गहरा गया है। पहले, दूसरे, तीसरे चरण के चुनाव ड्यूटी में गईं बसों की वजह से समस्या खड़ी हुई थी। यह समस्या अभी दूर भी नहीं हुई थी। निगम की करीब 36 बसें अभी बाहर चुनावी ड्यूटी में हैं, इसी बीच चौथे चरण के तहत 23 फरवरी को जिले में होने वाले चुनाव को लेकर जिला प्रशासन ने अनुबंधित की सभी 71 बसों को अधिग्रहण करते हुए कब्जे में ले लिया है। इससे समस्या और गहरा गई है।
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पहले चुनाव की ड्यूटी में गईं 36 बसें लंबी दूरी की थीं। ये बसें नेपाल बार्डर, बनारस, आगरा, जयपुर, दिल्ली, अजमेर शरीफ आदि लांग रूटों पर चलतीं थी। इन बसों के न होने से यात्री पहले से ही काफी परेशान थे। अब अनुबंधित लोकल रूटों पर चलने वाली 71 बसों के और रूट ऑफ होने से समस्या बढ़ गई है। इसका खामियाजा पहले ही दिन रविवार को देखने को मिला।
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रविवार को अमर उजाला की टीम दोपहर एक बजे बस स्टॉप पर पहुंची तो लोकल रूट पर चलने वाली बसों के यात्री लखनऊ, महोली, शाहजहांपुर, हरदोई, हरगांव, बिसवां, महमूदाबाद, लखीमपुर, नैमिषारण्य, हरदोई जाने वाले यात्री काफी परेशान दिखे। पूरे दिन यात्री अपने गंतव्य को जाने के लिए भटकते रहे, लेकिन बसे नहीं मिल पा रहीं थीं। किसी को दिल्ली, महोली और बरेली जाना था तो किसी लखीमपुर, हरदोई और लखनऊ की ओर जाना था।
दिल्ली जाने को नहीं मिली बस
रविवार का दिन होने के बावजूद बस स्टाप पर सैकड़ों की संख्या में यात्री बसों का इंतजार कर रहे थे। बसों की किल्लत का अंदाजा इसी बात से लगा सकते हैं कि कुछ यात्री तो रोडवेज पर ऐसे भी मिले, जिनको बस से दिल्ली जाना था। इसके लिए वह शनिवार को यहां पहुुंचे थे। बस नहीं मिली। घंटों इंतजार के बाद मायूस होकर लौट गए। उम्मीद के साथ रविवार को दोबारा बस स्टॉप पर पहुंचे, लेकिन उसी समस्या दो-चार होना पड़ा।
प्राइवेट वाहनों की ले रहे मदद
बसों की बढ़ती किल्लत को देखते हुए बस अड्डे के पास प्राइवेट वाहन चालकों की चांदी हो गई है। रविवार दोपहर कई प्राइवेट वाहनों के चालक महोली, उरदौली के लिए सवारी भर रहे थे। कैमरे को देखते ही वह पास आकर बोले कि भइया जाने दो। सवारियों को दिक्कत हो रही है। इसलिए हम लोग भी जा रहे हैं। हमारी गाड़ी को भी नोटिस जारी है। शाम को इसे भी चुनाव में भेजना है।
आज बढ़ सकती समस्या
रविवार को छुट्टी का दिन था। ऐसे में मुसाफिरों की संख्या बस स्टॉप पर कम थी, लेकिन सोमवार को वर्किंग डे होने की वजह से बसों का संकट और गहरा सकता है। इसका खामियाजा सीधे तौर पर रोजाना अप-डाउन करने वाले मुसाफिरों को भुगतना पड़ सकता है। वजह, लखनऊ जाने के लिए ज्यादातर अनुबंधित बसें ही हैं, लेकिन वह भी रूट ऑफ हो चुकी हैं।
डिपो की 36 बसें पहले से ही बाहर चुनावी ड्यूटी में हैं। अनुबंधित 71 बसों को जिला प्रशासन ने रविवार को चुनाव होने तक अधिग्रहण कर लिया है, इससे दिक्कत बढ़ गई है। क्या किया जाए, किसी तरह मैनेज किया जा रहा है। अचानक इतनी संख्या में बसों के रूट ऑफ होने से परेशानी बढ़ी है।
- राकेश कुमार, एआरएम