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बंकरों और बस में रह कर खुद को सुरक्षित रख रहे छात्र

Mon, 28 Feb 2022 12:29 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Mon, 28 Feb 2022 12:29 AM IST
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Students keeping themselves safe by staying in bunkers and buses
सिधौली (सीतापुर)। यूक्रेन पर रूस द्वारा बरसाए जा रहे बम धमाके से केवल वहां के नागरिकों में ही दहशत नहीं है, बल्कि इन बमों के फटने की दशहत हजारों किलोमीटर दूर यहां सीतापुर जिले में भी दिखाई दे रही है। यूक्रेन में फंसे तीन छात्रों के परिजन सुबह शाम अपने बच्चों की सलामती की दुआ मांगते नहीं थकते। अपने जिगर के टुकड़ों का हाल जानने के लिए मां बाप दिन में कई-कई बार फोन कर कुशलक्षेम पूछ रहे हैं। हर बार फोन पर यूक्रेन से छात्र खुद के सलामत होने का सबूत देते हैं, लेकिन मां बाप इसके बाद भी हर वक्त अपने लाडले के सुरक्षित घर आने की प्रार्थना कर रहे हैं।
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सिधौली कस्बा के मोहल्ला प्रेमनगर निवासी व्यापारी अशोक चौरसिया का पुत्र मृत्युंजय चौरसिया यूक्रेन के इवानों शहर में मेडिकल की पढ़ाई कर रहा था। हमला किए जाने के बाद अन्य भारतीय छात्रों की तरह मृत्युंजय भी देश वापसी के लिए कॉलेस से बस में सवार होकर रोमानिया की ओर चल पड़ा। रोमनिया सीमा पर पहुंचते ही बार्डर का गेट बंद कर दिया गया। जिसके बाद से मृत्युंजय समेत लगभग 500 अन्य भारतीय छात्र वहीं फंस गये हैं। मृत्युंजन ने परिजनों को बताया कि ठंड बहुत है, ऐसे में बस में रात गुजरना पड़ रहा है। जिस पर परिजनों ने रोमानिया बार्डर पर ही रहने की सलाह दी हैै। परिजन लगातार मृत्युंजय से बात कर हाल पूछ रहे हैं और उसकी कुशलता के लिए प्रार्थना कर रहे हैं।
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कस्बा के मोहल्ला बाजार निवासी मलय सिंह का पुत्र आदित्य सिंह भी यूक्रेन के कीव शहर में मेडिकल की पढ़ाई कर रहा था। हमले का आशंका होने पर वह कीव से निकलने की तैयारी में था, लेकिन आदित्य वहां से निकल पाता इससे पहले ही यूक्रेन में हमले शुरू हो गए। छात्रों को सुरक्षित रखने के लिए कॉलेज प्रशासन ने लगभग 800 छात्रों को बंकर में रहने की हिदायत दी। इन 800 छात्रों में कई छात्र भारतीय हैं।
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सिधौली इलाके के गड़िया हसनपुर निवासी फैज खान भी यूक्रेन के जफरोजिया शहर में फंसे हुए हैं। फैज भी कॉलेेज के अन्य छात्रों के साथ बंकर में रह रहे हैं। आदित्य और फैज के परिजन अपने पुत्रों की सुरक्षा को लेकर काफी चिंतित हैं। दिन में कई कई बार अपने लाडलों को फोन करके उनका कुशलक्षेम पूछ रहे हैं। दोनों छात्रों ने अपने परिजनों को बताया है कि अगर कभी फोन से संपर्क न हो पाए तो परेशान न होना, क्योंकि बंकर की गहराई अधिक होने के कारण मोबाइल में नेटवर्क की समस्या बनी रहती है। छात्रों के परिजन अपने लाडलों की सुरक्षा की प्रार्थना के साथ ही भारत सरकार से उनको सकुशल वापस लाने की गुहार भी लगा रहे हैं।
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