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बाघ की मौजूदगी से छात्र दहशत में
सीतापुर/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 28 Dec 2015 11:08 PM IST
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क्षेत्र में बाघ की चहलकदमी से दहशत का माहौल है। खासकर स्कूली बच्चे कुछ अधिक खौफजदा हैं। दहशत इस कदर है कि या तो वे ग्रामीणों के साथ घर से निकल रहे हैं या फिर रास्ता बदलकर झुंड में स्कूल जा रहे हैं।
मछरेहटा से मिश्रिख आने वाले मार्ग पर इन दिनों सन्नाटा पसरा है। सभी को भय है कि उस मार्ग पर गुजरते समय न जाने कब व कहां उनका बाघ से उनका सामना हो जाए।
ऐसे में लोग जरूरी काम पड़ने पर ही इस मार्ग पर गुजर रहे हैं, वह भी अकेले नहीं, बल्कि कई लोगों का झुंड बनाकर शोर करते हुए मार्ग से गुजरते हैं। ताकि भीड़ को देख व शोर को सुनकर बाघ सड़क पर न आने पाए। हालांकि वन विभाग अब भी इस बात की पुष्टि नहीं कर रहा है कि उस क्षेत्र में बाघ मौजूद है। छावन निवासी स्वतंत्र त्रिपाठी मिश्रिख कस्बा के सरस्वती ज्ञान मंदिर विद्यालय में कक्षा नौ का छात्र है। सोमवार को वह स्कूल जाने के लिए काफी देर तक ग्रामीणों के कस्बा जाने की राह ताकता रहा।
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जब कई ग्रामीण कस्बा के लिए निकले। तब स्वतंत्र भी उन्हीं के साथ स्कूल के लिए निकला। स्वतंत्र कह रहा है कि उसे बाघ का भय सता रहा है।
गदखेरवा निवासी अकील भी कस्बे के एक विद्यालय में कक्षा नौ का छात्र है। सोमवार को स्कूल जाने से पहले वह गांव में उन लोगों से मिला, जो बाजार जाने की तैयारी कर रहे थे। जब सभी ग्रामीण बाजार को निकले, तभी अकील भी उनके साथ हो लिया।
अकील ने कहा कि अब वह रास्ता बदलकर घर लौटेगा।रौंसिंहपुर निवासी विशेष मिश्र को स्कूल छोड़ने के लिए परिवार के कई सदस्य साथ में आए थे। उनके हाथ में लाठी व डंडे थे। विशेष बताने लगा कि घरवालों का मन है कि वह कुछ दिनों के लिए स्कूल जाए ही न। ताकि बाघ जब पकड़ लिया जाए और खतरा टल जाए, तब वह घर से निकले।
रौंसिंहपुर निवासी अनुराग त्रिपाठी भी बाघ के आने की खबर से भयभीत है। वह भी पढ़ने के लिए कस्बे के एक स्कूल में आया था। अनुराग बोला कि गांव के लोग अपने काम पर निकल चुके थे, घर से मैं अकेले निकला, साइकिल को तेजी से दौड़ाई, तब कहीं जाकर आगे चल रहे गांव के लोगों के साथ हो पाया। रास्ते भर गांव के अन्य लोग भी दहशत में ही रहे। सभी बड़ी चौकन्नी नजरों से रास्ते व करीब के जंगल को देखते हुए, आगे को बढ़ते रहे। ताकि अगर आसपास बाघ हो तो नजर आ जाए और सभी अपना बचाव कर सकें।
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मछरेहटा से मिश्रिख आने वाले मार्ग पर इन दिनों सन्नाटा पसरा है। सभी को भय है कि उस मार्ग पर गुजरते समय न जाने कब व कहां उनका बाघ से उनका सामना हो जाए।
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ऐसे में लोग जरूरी काम पड़ने पर ही इस मार्ग पर गुजर रहे हैं, वह भी अकेले नहीं, बल्कि कई लोगों का झुंड बनाकर शोर करते हुए मार्ग से गुजरते हैं। ताकि भीड़ को देख व शोर को सुनकर बाघ सड़क पर न आने पाए। हालांकि वन विभाग अब भी इस बात की पुष्टि नहीं कर रहा है कि उस क्षेत्र में बाघ मौजूद है। छावन निवासी स्वतंत्र त्रिपाठी मिश्रिख कस्बा के सरस्वती ज्ञान मंदिर विद्यालय में कक्षा नौ का छात्र है। सोमवार को वह स्कूल जाने के लिए काफी देर तक ग्रामीणों के कस्बा जाने की राह ताकता रहा।
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जब कई ग्रामीण कस्बा के लिए निकले। तब स्वतंत्र भी उन्हीं के साथ स्कूल के लिए निकला। स्वतंत्र कह रहा है कि उसे बाघ का भय सता रहा है।
गदखेरवा निवासी अकील भी कस्बे के एक विद्यालय में कक्षा नौ का छात्र है। सोमवार को स्कूल जाने से पहले वह गांव में उन लोगों से मिला, जो बाजार जाने की तैयारी कर रहे थे। जब सभी ग्रामीण बाजार को निकले, तभी अकील भी उनके साथ हो लिया।
अकील ने कहा कि अब वह रास्ता बदलकर घर लौटेगा।रौंसिंहपुर निवासी विशेष मिश्र को स्कूल छोड़ने के लिए परिवार के कई सदस्य साथ में आए थे। उनके हाथ में लाठी व डंडे थे। विशेष बताने लगा कि घरवालों का मन है कि वह कुछ दिनों के लिए स्कूल जाए ही न। ताकि बाघ जब पकड़ लिया जाए और खतरा टल जाए, तब वह घर से निकले।
रौंसिंहपुर निवासी अनुराग त्रिपाठी भी बाघ के आने की खबर से भयभीत है। वह भी पढ़ने के लिए कस्बे के एक स्कूल में आया था। अनुराग बोला कि गांव के लोग अपने काम पर निकल चुके थे, घर से मैं अकेले निकला, साइकिल को तेजी से दौड़ाई, तब कहीं जाकर आगे चल रहे गांव के लोगों के साथ हो पाया। रास्ते भर गांव के अन्य लोग भी दहशत में ही रहे। सभी बड़ी चौकन्नी नजरों से रास्ते व करीब के जंगल को देखते हुए, आगे को बढ़ते रहे। ताकि अगर आसपास बाघ हो तो नजर आ जाए और सभी अपना बचाव कर सकें।