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Sitapur News: सैलाब में फंसे, नहीं मिल रही मदद, पैदल ही पलायन
Wed, 09 Aug 2023 11:58 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
Updated Wed, 09 Aug 2023 11:58 PM IST
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रेउसा इलाके में बाढ़ के बीच से होकर गुजरते ग्रामीण।
रामपुर मथुरा/सीतापुर। बाढ़ की विभीषिका के बीच बुधवार दोपहर करीब एक बजे अंगरौरा के मुन्नीलाल घर का जरूरी सामान सिर पर रखे तटबंध की ओर पैदल ही चल पड़े। जब उनसे पूछा कि हर तरफ बाढ़ का पानी भरा होने से पैदल जाना जोखिम भरा साबित हो सकता है, तो बोले- नाव ढूंढ़े नहीं मिल रही और पानी लगातार बढ़ रहा है। सामान नहीं बचाएंगे तो खाने का संकट भी खड़ा हो जाएगा। अंगरौरा गांव में दाखिल होने पर हर तरफ पानी ही पानी नजर आ रहा था।
यहां मिश्री, राम हजारी, पुत्ती लाल, शिवराज, सोहन, मंगम, नरेश, बिक्रम, पिंटू, सहजू, बुधानी, दुजई तथा रघुनाथ के घरों में अंदर तक 2 से 3 फीट पानी भर गया है। ग्रामीणों ने बताया कि सबसे बड़ी समस्या खाना बनाने की है। किसी ने चूल्हा तख्त पर रखकर तो कोई ईंटों का छोटा सा चबूतरा बनाकर उसके ऊपर चूल्हा रखने का इंतजाम कर रहा है। सुकून से बैठने व सुस्ताने तक की जगह नहीं बची।
रामहजारी, पुत्तीलाल तथा बृजलाल आदि ने बताया कि प्रशासन हर बार पहले अलर्ट जारी कर देता था लेकिन इस बार कोई सूचना नहीं दी गई। अचानक हालात बेकाबू हो गए तो बड़ी मुश्किल से सामान तटबंध पर पहुंचा सके हैं। ग्रामीणों ने बताया कि तहसील प्रशासन से अब तक कोई मदद नहीं मिली। कोई अफसर हाल जानने तक नहीं आया है।
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रत्तीलाल व सर्वजीत ने कहा कि घर में रखा सारा भूसा पानी में डूब चुका है। जानवरों के चारे की किल्लत हो गई है। यदि प्रशासन चारे की व्यवस्था कराएगा तभी इन्हें जीवित रखा जा सकता है। कुछ यही हालात चंद्रिका पुरवा, अर्जुन पुरवा, अखरी, अंगरौरा, शंकर पुरवा, बाबाकुटी, फत्तेपुरवा, नया पुरवा, निरंजन पुरवा, प्यारे पुरवा, कोठार, बैजू पुरवा, बंगाली पुरवा, मिश्रण पुरवा, बक्सी पुरवा, सोती पुरवा, कनरखी, खुन्ना पुरवा समेत करीब 35 से अधिक गांवों के हैं।
बाढ़ की चपेट में आए इन गांवों की लगभग 30 हजार की आबादी सैलाब में फंसकर रह गई है। दरअसल, सरयू का जलस्तर बुधवार को 40 सेमी इजाफे के साथ 119.40 मीटर पर पहुंचने से बाढ़ विकराल हो गई है। तराई क्षेत्र के सैकड़ों बीघा खेतों में खड़ी फसल बाढ़ की चपेट में आ गई है। खेत, रास्ते, गांव के गलियारे और घरों के अंदर जिधर नजर उठाओ बस पानी ही पानी नजर आ रहा है। उधर, बैराजों से बुधवार को 4 लाख 48 हजार 592 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। यह पानी जिले में पहुंचने पर हालात और खराब हो सकते हैं।
पलायन के लिए नाव तक मयस्सर नहीं
बाढ़ से 35 गांवों की 30 हजार आबादी प्रभावित है। प्रशासन की ओर से बाढ़ पीड़ितों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने के लिए सिर्फ 17 नावें लगाई गई हैं। ऐसे में एक गांव के हिस्से में एक नाव भी नहीं है। नावों के अभाव में ग्रामीण जोखिम उठाकर पैदल ही पलायन करने को मजबूर हैं।
नौ गांवों का संपर्क कटा
बाढ़ की चपेट में आए सोती पुरवा, बलेसर पुरवा, अर्जुन पुरवा, धांधी रेती, निरंजन पुरवा, बाबाकुटी ,शंकर पुरवा, प्यारे पुरवा तथा अंगरौरा गावों के संपर्क मार्ग पानी से डूब गए हैं। इन गांवों का संपर्क पूरी तरह से टूट गया है। प्रशासन की ओर से बाढ़ के पूर्व सारे इंतजाम मुकम्मल होने के दावे अब हवा-हवाई साबित हो रहे हैं।
खुले आसमान तले बिताई रात
तटबंध पर अस्थाई आश्रय के लिए मंगलवार शाम को ही कई परिवार पहुंच गए थे। प्रशासनिक मदद नहीं मिलने पर कई परिवारों ने खुले आसमान तले किसी तरह रात बिताई। सुबह अपने पैसे से तिरपाल व पॉलीथिन खरीदकर परिवार को सुरक्षित किया। ग्रामीणों के मुताबिक हर साल जिनके घरों में पानी भर जाता था, उनके लिए तहसील प्रशासन तिरपाल, लंच पैकेट आदि की व्यवस्था करता था। इस बार भीषण बाढ़ के बाद भी कोई पूछने वाला नहीं है।
हर संभव मदद की जा रही
बाढ़ पीड़ितों के लिए लंच पैकेट की व्यवस्था करने के निर्देश प्रधानों व कोटेदारों को दिए गए हैं। आवागमन के लिए 17 नावें लगाई गई हैं। हर संभव मदद उपलब्ध कराई जा रही है।
- प्रीती सिंह, नायब तहसीलदार महमूदाबाद
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यहां मिश्री, राम हजारी, पुत्ती लाल, शिवराज, सोहन, मंगम, नरेश, बिक्रम, पिंटू, सहजू, बुधानी, दुजई तथा रघुनाथ के घरों में अंदर तक 2 से 3 फीट पानी भर गया है। ग्रामीणों ने बताया कि सबसे बड़ी समस्या खाना बनाने की है। किसी ने चूल्हा तख्त पर रखकर तो कोई ईंटों का छोटा सा चबूतरा बनाकर उसके ऊपर चूल्हा रखने का इंतजाम कर रहा है। सुकून से बैठने व सुस्ताने तक की जगह नहीं बची।
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रामहजारी, पुत्तीलाल तथा बृजलाल आदि ने बताया कि प्रशासन हर बार पहले अलर्ट जारी कर देता था लेकिन इस बार कोई सूचना नहीं दी गई। अचानक हालात बेकाबू हो गए तो बड़ी मुश्किल से सामान तटबंध पर पहुंचा सके हैं। ग्रामीणों ने बताया कि तहसील प्रशासन से अब तक कोई मदद नहीं मिली। कोई अफसर हाल जानने तक नहीं आया है।
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रत्तीलाल व सर्वजीत ने कहा कि घर में रखा सारा भूसा पानी में डूब चुका है। जानवरों के चारे की किल्लत हो गई है। यदि प्रशासन चारे की व्यवस्था कराएगा तभी इन्हें जीवित रखा जा सकता है। कुछ यही हालात चंद्रिका पुरवा, अर्जुन पुरवा, अखरी, अंगरौरा, शंकर पुरवा, बाबाकुटी, फत्तेपुरवा, नया पुरवा, निरंजन पुरवा, प्यारे पुरवा, कोठार, बैजू पुरवा, बंगाली पुरवा, मिश्रण पुरवा, बक्सी पुरवा, सोती पुरवा, कनरखी, खुन्ना पुरवा समेत करीब 35 से अधिक गांवों के हैं।
बाढ़ की चपेट में आए इन गांवों की लगभग 30 हजार की आबादी सैलाब में फंसकर रह गई है। दरअसल, सरयू का जलस्तर बुधवार को 40 सेमी इजाफे के साथ 119.40 मीटर पर पहुंचने से बाढ़ विकराल हो गई है। तराई क्षेत्र के सैकड़ों बीघा खेतों में खड़ी फसल बाढ़ की चपेट में आ गई है। खेत, रास्ते, गांव के गलियारे और घरों के अंदर जिधर नजर उठाओ बस पानी ही पानी नजर आ रहा है। उधर, बैराजों से बुधवार को 4 लाख 48 हजार 592 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। यह पानी जिले में पहुंचने पर हालात और खराब हो सकते हैं।
पलायन के लिए नाव तक मयस्सर नहीं
बाढ़ से 35 गांवों की 30 हजार आबादी प्रभावित है। प्रशासन की ओर से बाढ़ पीड़ितों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने के लिए सिर्फ 17 नावें लगाई गई हैं। ऐसे में एक गांव के हिस्से में एक नाव भी नहीं है। नावों के अभाव में ग्रामीण जोखिम उठाकर पैदल ही पलायन करने को मजबूर हैं।
नौ गांवों का संपर्क कटा
बाढ़ की चपेट में आए सोती पुरवा, बलेसर पुरवा, अर्जुन पुरवा, धांधी रेती, निरंजन पुरवा, बाबाकुटी ,शंकर पुरवा, प्यारे पुरवा तथा अंगरौरा गावों के संपर्क मार्ग पानी से डूब गए हैं। इन गांवों का संपर्क पूरी तरह से टूट गया है। प्रशासन की ओर से बाढ़ के पूर्व सारे इंतजाम मुकम्मल होने के दावे अब हवा-हवाई साबित हो रहे हैं।
खुले आसमान तले बिताई रात
तटबंध पर अस्थाई आश्रय के लिए मंगलवार शाम को ही कई परिवार पहुंच गए थे। प्रशासनिक मदद नहीं मिलने पर कई परिवारों ने खुले आसमान तले किसी तरह रात बिताई। सुबह अपने पैसे से तिरपाल व पॉलीथिन खरीदकर परिवार को सुरक्षित किया। ग्रामीणों के मुताबिक हर साल जिनके घरों में पानी भर जाता था, उनके लिए तहसील प्रशासन तिरपाल, लंच पैकेट आदि की व्यवस्था करता था। इस बार भीषण बाढ़ के बाद भी कोई पूछने वाला नहीं है।
हर संभव मदद की जा रही
बाढ़ पीड़ितों के लिए लंच पैकेट की व्यवस्था करने के निर्देश प्रधानों व कोटेदारों को दिए गए हैं। आवागमन के लिए 17 नावें लगाई गई हैं। हर संभव मदद उपलब्ध कराई जा रही है।
- प्रीती सिंह, नायब तहसीलदार महमूदाबाद