{"_id":"d19e330fcfe2f986d28cb30b1260f69a","slug":"sp-rebel-mla-s-son-got-victory-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"बागी बिसवां विधायक के बेटे ने कब्जाई कुर्सी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बागी बिसवां विधायक के बेटे ने कब्जाई कुर्सी
अमर उजाला ब्यूरो/सीतापुर
Updated Thu, 07 Jan 2016 11:05 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी पर बिसवां विधायक रामपाल यादव के बेटे जितेंद्र ने कब्जा जमाया है। जितेंद्र ने सपा उम्मीदवार सीमा गुप्ता को 12 वोटों से मात दे दी। सीमा को जहां 33 वोट मिले, वहीं जितेंद्र को 45 मत मिले। 79 जिला पंचायत सदस्यों में से सभी ने वोट डाले। एक मत अवैध हो गया।
विज्ञापन
सपा से बर्खास्तगी के बावजूद विधायक रामपाल मलाईदार कुर्सी के इस मुकाबले में सरकार को मात देने में कामयाब रहे। इससे पहले सुबह 11 से दोपहर 3 बजे तक वोट डाले गए। दोपहर बाद नतीजे घोषित होते ही जितेंद्र के समर्थकों ने जीत का जश्न मनाया। बवाल की आशंका को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े बंदोबस्त किए थे।
विज्ञापन
जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए गुरुवार को भारी अव्यवस्थाओं के बीच कलेक्ट्रेट सभागार में सुबह 11 बजे से मतदान शुरू हुआ। पुलिस व पीएसी बलों को तैनात कर कलेक्ट्रेट की सुरक्षा कड़ी कर दी थी। प्रेक्षक सीबी सिंह, निर्वाचन अधिकारी डॉ. इंद्रवीर सिंह यादव की देखरेख में 79 जिला पंचायत सदस्यों ने वोट डाले।
विज्ञापन
जिला पंचायत सदस्य एक-एक कर आते रहे और मतदान कर वापस चले गए। शत-प्रतिशत मतदान के बाद दोपहर तीन बजे से मतगणना शुरू हुई। मतगणना के बाद घोषित नतीजे जितेंद्र यादव के पक्ष में आए। सपा से निष्कासित बिसवां विधायक रामपाल यादव के पुत्र जितेंद्र को 45 मत जबकि सपा उम्मीदवार सीमा गुप्ता को 33 मत प्राप्त हुए।
इसके अलावा एक मत अवैध निकला। निर्दलीय प्रत्याशी जितेंद्र यादव ने 12 मतों के अंतर से जीत दर्ज की। नतीजे घोषित होते जितेंद्र के समर्थकों ने कलेक्ट्रेट के सामने ही जोरदार जश्न मनाया। जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी पर कब्जे का ख्वाब देख रही सपा अपनों से यहां हार गई।
इतिहास ने खुद को दोहराया
जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में इतिहास ने खुद को दोहराया है। यह पहली बार नहीं है, जब सत्तारूढ़ दल के उम्मीदवार को बागी प्रत्याशी के हाथों मुंह की खानी पड़ी।
इसके पहले 2005 में सिधौली से सात बार विधायक रहे तत्कालीन वित्त राज्यमंत्री श्यामलाल रावत की पुत्रवधू व सपा उम्मीदवार निर्मला रावत को पार्टी से बगावत कर निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ने वाले पूर्व मंत्री रामकृष्ण भार्गव के बेटे अजय भार्गव ने हराया था।