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सपा ने दलित वोट बैंक को साधने का चला दांव

Mon, 31 Jan 2022 12:03 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Mon, 31 Jan 2022 12:03 AM IST
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SP made a bet to reach the Dalit vote bank
सीतापुर। सत्ता में वापसी के लिए हुंकार भर रहे समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव की नजर इस बार दलित वोट बैंक पर भी है। यही वजह है कि बसपा का वोट बैंक माने जाने वाले दलित (अनुसूचित) जाति के मतदाताओं में सेंध लगाने के लिए सपा ने टिकट बंटवारे में जातीय समीकरणों को साधते हुए प्रत्याशियों को उतारा है। जातीय कार्ड के दांव से सपा ने जिले की हरगांव और सिधौली विधानसभा क्षेत्र की सीटों पर बसपा के दिग्गज रहे नेताओं पर इस बार जीत का भरोसा जताया है।
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जिले में नौ विधानसभा क्षेत्र हैं। सपा ने सभी सीटों पर अपने प्रत्याशी उतार दिए हैं। सदर, महोली, महमूदाबाद, बिसवां, सेवता में पुराने चेहरों पर दांव लगाया है। जबकि मिश्रिख सीट पर पूर्व मंत्री रामपाल राजवंशी के बेटे को टिकट मिला है। लहरपुर में अनिल वर्मा को सपा ने टिकट दिया है। हरगांव से पूर्व विधायक रमेश राही टिकट के लिए प्रयासरत थे।
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वह लंबे समय से पार्टी से जुड़े थे। चुनावी मौसम देखकर सक्रिय भी हो गए थे, लेकिन जब टिकट देने की बारी आई तो पार्टी ने उन्हें नजरअंदाज करते हुए चंद दिन पहले भाजपा छोड़कर सपा में आए पूर्व मंत्री रामहेत भारती को टिकट दे दिया। सियासत के चश्मे से देखें तो रामहेत भारती को टिकट देने के पीछे सपा की मंशा दलित वोट बैंक में सेंध लगाना है। जानकारों की माने तो रामहेत भारती का दलित मतदाताओं के बीच अच्छी पैठ है। यही वजह है कि वह तीन बार हरगांव विधानसभा क्षेत्र से बसपा सरकार में विधायक रहे, फिर मंत्री में भी बने।
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अब बात करते हैं सिधौली विधानसभा क्षेत्र की सीट को लेकर। काफी समय से इस सीट पर प्रत्याशी उतारने को लेकर चल रही रस्साकस्सी के बीच पिछले दिनों आखिरकार सपा ने बसपा के टिकट से 2017 में जीते विधायक डॉ. हरगोविंद भार्गव को चुनावी मैदान में उतार दिया। पूर्व विधायक मनीष रावत को टिकट नहीं दिया। सियासी पंडितों की माने तो इसके पीछे सपा का जीत का दांव है।
हरगोविंद भार्गव बसपा सरकार में 2007 में यहां से चुनाव लड़े थे। जीते थे। 2012 में हार गए थे। सपा से मनीष रावत विधायक बने थे। 2017 में मोदी लहर के बावजूद हरगोविंद भार्गव यहां से बसपा का खाता खोलने में कामयाब हो गए थे। जानकार बताते हैं कि सिधौली और हरगांव में बसपा के दिग्गजों पर दांव खेलने से सपा की मंशा साफ हो गई कि वह इस चुनाव में अपने पक्ष में दलित वोटों का ध्रुवीकरण कर बसपा और भाजपा को झटका देना चाहती है।

...उम्मीदों पर उतर पाएंगे खरा
सपा ने जिस तरह अपनों को किनारा कर बाहरी दलों से आए नेताओं पर जीत की उम्मीद जताते हुए टिकट दिया है, अब सवाल यह है कि दोनों प्रत्याशी उम्मीदों पर कितना खरा उतर पाएंगे। इसके लिए नतीजों तक इंतजार करना पड़ेगा। लेकिन सियासी बयार में जो चर्चाएं हैं, वह इस ओर इशारा कर रही हैं कि लड़ाई कांटे की होगी। फिर चाहे हरगांव हो या फिर सिधौली।
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