{"_id":"6acb4c9b7f1fb1a9b224bbdf62d4d4e7","slug":"sp-divided-in-two-camps-for-seat-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"कुर्सी के लिए दो खेमों में बंटी सपा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कुर्सी के लिए दो खेमों में बंटी सपा
सीतापुर/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 01 Jan 2016 10:55 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जिले का प्रथम नागरिक बनने की होड़ ने सत्तारूढ़ समाजवादी पार्टी दो खेमों में बंटी दिखी। जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए शुक्रवार को यहां तीन दावेदारों ने नामांकन दाखिल किया।
ये तीनों दावेदार सपा से ताल्लुक रखते हैं। इनमें दो एक गुट के जबकि दूसरे खेमे का एक दावेदार शामिल है। कलेक्ट्रेट में नामांकन के दौरान दोनों गुटों का आमना-सामना भी हुआ।
इस पर परिसर में ही जिंदाबाद-मुर्दाबाद के नारे भी लगाए गए। इससे कुछ देर के लिए माहौल भी गर्माया गया। आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी चला। दोनों खेमों ने सियासी जुमलों के तीर चलाए।
विज्ञापन
जिला पंचायत अध्यक्ष पद हथियाने की ललक में बिसवां विधायक रामपाल यादव और पीसीएफ के पूर्व उपाध्यक्ष शिव कुमार गुप्ता ने आमने-सामने ताल ठोंक दी है।
शिव कुमार गुप्ता ने अपनी पत्नी सीमा गुप्ता को सपा नेतृत्व से पार्टी का अधिकृत उम्मीदवार घोषित करवाने में कामयाबी पाई तो इस कुर्सी पर निगाह गड़ाए बैठे विधायक रामपाल यादव बगावत पर उतर आए। पार्टी का अनुशासन ताख पर रखते हुए अपने बेटे जितेंद्र यादव तथा पत्नी शांति यादव का नामांकन करा दिया।
विज्ञापन
ये तीनों दावेदार सपा से ताल्लुक रखते हैं। इनमें दो एक गुट के जबकि दूसरे खेमे का एक दावेदार शामिल है। कलेक्ट्रेट में नामांकन के दौरान दोनों गुटों का आमना-सामना भी हुआ।
विज्ञापन
इस पर परिसर में ही जिंदाबाद-मुर्दाबाद के नारे भी लगाए गए। इससे कुछ देर के लिए माहौल भी गर्माया गया। आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी चला। दोनों खेमों ने सियासी जुमलों के तीर चलाए।
विज्ञापन
जिला पंचायत अध्यक्ष पद हथियाने की ललक में बिसवां विधायक रामपाल यादव और पीसीएफ के पूर्व उपाध्यक्ष शिव कुमार गुप्ता ने आमने-सामने ताल ठोंक दी है।
शिव कुमार गुप्ता ने अपनी पत्नी सीमा गुप्ता को सपा नेतृत्व से पार्टी का अधिकृत उम्मीदवार घोषित करवाने में कामयाबी पाई तो इस कुर्सी पर निगाह गड़ाए बैठे विधायक रामपाल यादव बगावत पर उतर आए। पार्टी का अनुशासन ताख पर रखते हुए अपने बेटे जितेंद्र यादव तथा पत्नी शांति यादव का नामांकन करा दिया।