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तय समय से पहले साइट बंद, बच्चों को स्कूल में नहीं मिला दाखिला
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सीतापुर। निशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा अधिनियम के तहत तमाम अभिभावक अपने बच्चों का दाखिला करने से वंचित रह गए है। कारण, तीसरे चरण की अंतिम तिथि 15 जुलाई थी। लेकिन ऑनलाइन आवेदन के चलते यह साइट तीन दिन पहले ही बंद हो गई थी। उसके बाद अभिभावक दो दिन तक समय सीमा बढ़ने का इंतजार करते रहे। अंतिम तिथि न बढ़ने से वे आवेदन करने से वंचित रह गए है।
अभिभावकों का कहना है कि जब निर्धारित समय से पहले ही साइट बंद हो गई थी तो समय सीमा बढ़ाई जानी चाहिए। ऐसे में अभिभावक आवेदन न कर पाने के कारण परेशान हैं। निशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा अधिनियम के तहत प्राइवेट स्कूलों को अपने यहां 25 प्रतिशत सीटों पर जरूरतमंद बच्चों का दाखिला लेना होता है। इन बच्चों का दाखिला कक्षा एक में होता है।
इनकी फीस की भरपाई राज्य सरकार करती है। बशर्ते उस बच्चे को दाखिल अपने वार्ड के ही स्कूल मेें करीब एक किलोमीटर के दायरे में हो। इसके लिए अप्रैल से प्रक्रिया शुरू हुई थी। तीसरे चरण की आवेदन प्रक्रिया की अंतिम तिथि 15 जुलाई निर्धारित की गई थी। अभिभावक बबलू राठौर का कहना है कि 12 जुलाई को आवेदन करने गए थे।
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उस समय बताया गया कि साइट बहुत ही धीमी चल रही है। दुकानदार ने आवेदन रख लिया था। कहा, दो दिन बाद आना जैसे ही साइट चलेगी, आपका आवेदन कर दिया जाएगा। लेकिन 15 जुलाई बीत गई। साइट ही नहीं चली। इसकी वजह से अपने बेटी का दाखिला नहीं करा सके है। अभिभावक नीरज का कहना है पिछले बरस कोरोना की वजह से एडमिशन नहीं करा सके थे। इस बार सोचा था कि निशुल्क सीट पर दाखिला मिल जाएगा। इससे पढ़ाई में आर्थिक समस्या आड़े नहीं आएगी। लेकिन इस बार भी तकनीकी फॉल्ट के चलते आवेदन से दूर हो गए है।
11 जुलाई को आवेदन करने गए थे। उसके बाद भी आवेदन नहीं कर पाए है। बेसिक शिक्षा विभाग गए तो बताया गया कि हो सकता है एक दो दिन तिथि बढ़ जाए, तब आवेदन कर देना। लेकिन 17 जुलाई गुजर गई है, अभी तिथि नहीं बढ़ सकी है। इससे आवेदन नहीं कर पाए हैं। जिम्मेदार अफसरों को आवेदन की तिथि बढ़ा देनी चाहिए, जिससे आवेदन कर सकें।
दाखिले की स्थिति
बेसिक शिक्षा विभाग के मुताबिक निशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा अधिनियम के तहत 2017-18 में 22 नौनिहालों के दाखिले हुए थे। जबकि 2018-19 में 78, 2019-20 में 201, 2020-21 में 385 व 2021-2022 में अब तक 449 नौनिहालों के दाखिले हो चुके है। अभी तीसरे चरण की प्रक्रिया चल रही है। इससे दाखिलों में इजाफा हो सकता है।
ऑनलाइन आवेदन की तिथि निकल चुकी है। शासन स्तर से अभी तिथि नहीं बढ़ाई गई है। अगर समय सीमा बढ़ाई जाती है तो वंचित अभिभावकों को आवेदन करने का मौका मिल सकेगा।
अजीत कुमार, बीएसए
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अभिभावकों का कहना है कि जब निर्धारित समय से पहले ही साइट बंद हो गई थी तो समय सीमा बढ़ाई जानी चाहिए। ऐसे में अभिभावक आवेदन न कर पाने के कारण परेशान हैं। निशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा अधिनियम के तहत प्राइवेट स्कूलों को अपने यहां 25 प्रतिशत सीटों पर जरूरतमंद बच्चों का दाखिला लेना होता है। इन बच्चों का दाखिला कक्षा एक में होता है।
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इनकी फीस की भरपाई राज्य सरकार करती है। बशर्ते उस बच्चे को दाखिल अपने वार्ड के ही स्कूल मेें करीब एक किलोमीटर के दायरे में हो। इसके लिए अप्रैल से प्रक्रिया शुरू हुई थी। तीसरे चरण की आवेदन प्रक्रिया की अंतिम तिथि 15 जुलाई निर्धारित की गई थी। अभिभावक बबलू राठौर का कहना है कि 12 जुलाई को आवेदन करने गए थे।
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उस समय बताया गया कि साइट बहुत ही धीमी चल रही है। दुकानदार ने आवेदन रख लिया था। कहा, दो दिन बाद आना जैसे ही साइट चलेगी, आपका आवेदन कर दिया जाएगा। लेकिन 15 जुलाई बीत गई। साइट ही नहीं चली। इसकी वजह से अपने बेटी का दाखिला नहीं करा सके है। अभिभावक नीरज का कहना है पिछले बरस कोरोना की वजह से एडमिशन नहीं करा सके थे। इस बार सोचा था कि निशुल्क सीट पर दाखिला मिल जाएगा। इससे पढ़ाई में आर्थिक समस्या आड़े नहीं आएगी। लेकिन इस बार भी तकनीकी फॉल्ट के चलते आवेदन से दूर हो गए है।
11 जुलाई को आवेदन करने गए थे। उसके बाद भी आवेदन नहीं कर पाए है। बेसिक शिक्षा विभाग गए तो बताया गया कि हो सकता है एक दो दिन तिथि बढ़ जाए, तब आवेदन कर देना। लेकिन 17 जुलाई गुजर गई है, अभी तिथि नहीं बढ़ सकी है। इससे आवेदन नहीं कर पाए हैं। जिम्मेदार अफसरों को आवेदन की तिथि बढ़ा देनी चाहिए, जिससे आवेदन कर सकें।
दाखिले की स्थिति
बेसिक शिक्षा विभाग के मुताबिक निशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा अधिनियम के तहत 2017-18 में 22 नौनिहालों के दाखिले हुए थे। जबकि 2018-19 में 78, 2019-20 में 201, 2020-21 में 385 व 2021-2022 में अब तक 449 नौनिहालों के दाखिले हो चुके है। अभी तीसरे चरण की प्रक्रिया चल रही है। इससे दाखिलों में इजाफा हो सकता है।
ऑनलाइन आवेदन की तिथि निकल चुकी है। शासन स्तर से अभी तिथि नहीं बढ़ाई गई है। अगर समय सीमा बढ़ाई जाती है तो वंचित अभिभावकों को आवेदन करने का मौका मिल सकेगा।
अजीत कुमार, बीएसए