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शौचालय के नाम पर 35.69 लाख का घोटाला
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सीतापुर। जिले में शौचालय निर्माण के लिए ग्राम पंचायतों में भेजी गई धनराशि का बड़े पैमाने पर दुरुपयोग किया गया है। इसके लगातार खुलासे हो रहे हैं। एक ग्राम पंचायत में स्वच्छ भारत मिशन के तहत उपलब्ध कराई गई धनराशि व निर्मित कराए गए शौचालयों का एडीओ पंचायत ने स्थलीय सत्यापन किया। इसमें 35 लाख 69 हजार 869 रुपये का दुरुपयोग पाया गया। जिसकी वसूली संबंधित सचिव व प्रधान से करने की संस्तुति की गई है।
प्रकरण विकास खंड रामपुर मथुरा की ग्राम पंचायत ग्वाहडीह का है। यहां स्वच्छ भारत मिशन के तहत शौचालयों के निर्माण के लिए धनराशि उपलब्ध कराई गई थी। इसके सापेक्ष बनवाए गए शौचालयों का एडीओ पंचायत संजय कुमार सिंह ने सत्यापन किया। इसमें बड़ी गड़बड़ी पाई गई। 147 शौचालयों की धनराशि 1754600 रुपये बैंक से निकालने के बाद भी कार्य नहीं कराया गया। यह धनराशि प्रधान एवं सचिव द्वारा स्वयं बैंक से निकाली गई। 69 शौचालयों में एक भी गड्ढा, सीट, दरवाजा ने लगे होने के कारण इनका प्रयोग नहीं हो रहा है। इससे आठ लाख 28 हजार धनराशि का दुरुपयोग किया गया। 144 शौचालयों में पानी की टंकी नहीं बनवाई गई। प्रति पानी की टंकी दो हजार रुपये का लागत आती है। इससे दो लाख 88 हजार रुपये का दुुरुपयोग हुआ। आहरण योग्य धनराशि से 674269 रुपये अधिक निकाले गए। साथ ही आईइसी मद के 25 हजार रुपये निकालने के कोई कार्य नहीं कराया गया।
सत्यापन आख्या के अनुसार 35 लाख 69 हजार 869 रुपये का दुरुपयोग पाया गया। यह धनराशि 17 दिसंबर 2018 से छह फरवरी 2020 के मध्य आहरित की गई। यदि इस धनराशि को बैंक से नहीं निकाला जाता तो 3.5 प्रतिशत वार्षिक ब्याज की दर से 19 अक्तूबर तक ब्याज के रूप में दो लाख नौ हजार 815 रुपये अर्जित होते। दुरुपयोग की गई धनराशि की वसूली की संस्तुति तत्कालीन सचिव कुलदीप कुमार ग्राम विकास अधिकारी एवं प्रधान गौरी से करने की संस्तुति की गई है।
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इस संबंध में सीडीओ संदीप कुमार ने बताया कि जिला पंचायत राज अधिकारी को निर्देश दिए गए हैं कि सत्यापन आख्या का परीक्षण कर नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित कराएं। प्रकरण शौचालय मद की धनराशि के दुरुपयोग से संबंधित है। ऐसी स्थिति में सभी संबंधितों का उत्तरदायित्व निर्धारित करते हुए समयबद्ध रूप से कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
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प्रकरण विकास खंड रामपुर मथुरा की ग्राम पंचायत ग्वाहडीह का है। यहां स्वच्छ भारत मिशन के तहत शौचालयों के निर्माण के लिए धनराशि उपलब्ध कराई गई थी। इसके सापेक्ष बनवाए गए शौचालयों का एडीओ पंचायत संजय कुमार सिंह ने सत्यापन किया। इसमें बड़ी गड़बड़ी पाई गई। 147 शौचालयों की धनराशि 1754600 रुपये बैंक से निकालने के बाद भी कार्य नहीं कराया गया। यह धनराशि प्रधान एवं सचिव द्वारा स्वयं बैंक से निकाली गई। 69 शौचालयों में एक भी गड्ढा, सीट, दरवाजा ने लगे होने के कारण इनका प्रयोग नहीं हो रहा है। इससे आठ लाख 28 हजार धनराशि का दुरुपयोग किया गया। 144 शौचालयों में पानी की टंकी नहीं बनवाई गई। प्रति पानी की टंकी दो हजार रुपये का लागत आती है। इससे दो लाख 88 हजार रुपये का दुुरुपयोग हुआ। आहरण योग्य धनराशि से 674269 रुपये अधिक निकाले गए। साथ ही आईइसी मद के 25 हजार रुपये निकालने के कोई कार्य नहीं कराया गया।
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सत्यापन आख्या के अनुसार 35 लाख 69 हजार 869 रुपये का दुरुपयोग पाया गया। यह धनराशि 17 दिसंबर 2018 से छह फरवरी 2020 के मध्य आहरित की गई। यदि इस धनराशि को बैंक से नहीं निकाला जाता तो 3.5 प्रतिशत वार्षिक ब्याज की दर से 19 अक्तूबर तक ब्याज के रूप में दो लाख नौ हजार 815 रुपये अर्जित होते। दुरुपयोग की गई धनराशि की वसूली की संस्तुति तत्कालीन सचिव कुलदीप कुमार ग्राम विकास अधिकारी एवं प्रधान गौरी से करने की संस्तुति की गई है।
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इस संबंध में सीडीओ संदीप कुमार ने बताया कि जिला पंचायत राज अधिकारी को निर्देश दिए गए हैं कि सत्यापन आख्या का परीक्षण कर नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित कराएं। प्रकरण शौचालय मद की धनराशि के दुरुपयोग से संबंधित है। ऐसी स्थिति में सभी संबंधितों का उत्तरदायित्व निर्धारित करते हुए समयबद्ध रूप से कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।