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तेज कटान में बह गई चौकीपुरवा की 9 झोपड़ियां
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- फोटो : SITAPUR
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रेउसा/रामपुर मथुरा। सरयू के जलस्तर में उतार-चढ़ाव के बीच तेज गति से कटान जारी है। रेउसा व रामपुर मथुरा में शनिवार को लगभग 90 बीघा खेत कटान में समा गए। इसके अलावा 9 झोपड़ियां, 12 पेड़ भी कटान की जद में आकर सरयू में समा गए। वहीं, बैराजों से पौने तीन लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया है।
ब्लॉक रेउसा क्षेत्र के चौकीपुरवा निवासी उमेश, संदीप, दिनेश, प्रदीप, बनवारी, कमलेश, श्रीकेशन, हरद्वारी व मुंशी की झोपड़ी शनिवार को सरयू की तेज धारा में बह गई। खतरा भांपकर यह लोग पहले ही पलायन कर चुके थे। कटान इतनी तेज है कि फौजदारपुरवा के सदानंद अपने आम, जामुन व सेमर के पेड़ काट पाते उससे पहले ही 12 पेड़ नदी में समा गए।
जटपुरवा, गौडीबजहा से लेकर फौजदारपुरवा तक लगभग 60 बीघा कृषि योग्य भूमि कटान की भेंट चढ़ गई। कटान का सिलसिला नहीं थमने से तटीय क्षेत्र के बाशिंदे परेशान हैं। दूसरी तरफ रामपुर मथुरा इलाके में अखरी के पास सरयू नदी ने तेजी से कटान करते हुए प्रह्लाद, राजेश, रमेश बाबू, राजू व सोहनलाल की करीब 20 बीघा जमीन निगल ली। नदी की धारा हरिशंकर के पक्के घर से महज 5 मीटर दूर है।
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वहीं सरयू की धारा करीब 20 मीटर की चौड़ाई में कटान कर आज जसुई नाले में मिल गई है। इससे अखरी गांव के आस्तित्व पर दोहरा संकट खड़ा हो गया है। अंगरौरा में हुई तेज कटान से खेलावन, कृपाराम, बसोहन लाल, काजू, जुगुल किशोर, अवध, नरेश आदि लोगों की करीब 10 बीघा जमीनें नदी में समा गई हैं। वहीं अखरी के ब्रजेश, मोहित, राम, तीरथ, राजू, राकेश, नरेंद्र, अनिल, गोविंद, रमेश, बाबू आदि की जमीन के साथ घर भी कटान की कगार पर आ गए हैं।
रामपुर मथुरा क्षेत्र के अखरी गांव को कटान से बचाने के लिए ग्रामीणों की गुहार पर सेवता विधायक ज्ञान तिवारी के प्रयास से बाढ़ खंड के अधिशाषी अभियंता उत्कर्ष भारद्वाज द्वारा आनन-फानन में अस्थाई स्टड का निर्माण शुरू कर दिया गया है।
हालांकि यहां के ग्रामीण गांव के मिटते आस्तित्व को बचाने के लिए कई बार प्रशासन से गुहार लगा चुके हैं। लेकिन समय रहते प्रशासन के कान पर जूं नहीं रेंगी। अब जब सरयू की तेज धारा गांव के कई घरों का कटान करते हुए लगातार आगे बढ़ती जा रही है, तब प्रशासन ने इस धारा को रोकने के लिए अस्थाई स्टड बनाने की कवायद शुरू की है। अस्थाई स्टड का निर्माण गांव के आस्तित्व को बचा पाएगा या नहीं यह फिलहाल भविष्य के गर्भ में है।
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ब्लॉक रेउसा क्षेत्र के चौकीपुरवा निवासी उमेश, संदीप, दिनेश, प्रदीप, बनवारी, कमलेश, श्रीकेशन, हरद्वारी व मुंशी की झोपड़ी शनिवार को सरयू की तेज धारा में बह गई। खतरा भांपकर यह लोग पहले ही पलायन कर चुके थे। कटान इतनी तेज है कि फौजदारपुरवा के सदानंद अपने आम, जामुन व सेमर के पेड़ काट पाते उससे पहले ही 12 पेड़ नदी में समा गए।
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जटपुरवा, गौडीबजहा से लेकर फौजदारपुरवा तक लगभग 60 बीघा कृषि योग्य भूमि कटान की भेंट चढ़ गई। कटान का सिलसिला नहीं थमने से तटीय क्षेत्र के बाशिंदे परेशान हैं। दूसरी तरफ रामपुर मथुरा इलाके में अखरी के पास सरयू नदी ने तेजी से कटान करते हुए प्रह्लाद, राजेश, रमेश बाबू, राजू व सोहनलाल की करीब 20 बीघा जमीन निगल ली। नदी की धारा हरिशंकर के पक्के घर से महज 5 मीटर दूर है।
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वहीं सरयू की धारा करीब 20 मीटर की चौड़ाई में कटान कर आज जसुई नाले में मिल गई है। इससे अखरी गांव के आस्तित्व पर दोहरा संकट खड़ा हो गया है। अंगरौरा में हुई तेज कटान से खेलावन, कृपाराम, बसोहन लाल, काजू, जुगुल किशोर, अवध, नरेश आदि लोगों की करीब 10 बीघा जमीनें नदी में समा गई हैं। वहीं अखरी के ब्रजेश, मोहित, राम, तीरथ, राजू, राकेश, नरेंद्र, अनिल, गोविंद, रमेश, बाबू आदि की जमीन के साथ घर भी कटान की कगार पर आ गए हैं।
रामपुर मथुरा क्षेत्र के अखरी गांव को कटान से बचाने के लिए ग्रामीणों की गुहार पर सेवता विधायक ज्ञान तिवारी के प्रयास से बाढ़ खंड के अधिशाषी अभियंता उत्कर्ष भारद्वाज द्वारा आनन-फानन में अस्थाई स्टड का निर्माण शुरू कर दिया गया है।
हालांकि यहां के ग्रामीण गांव के मिटते आस्तित्व को बचाने के लिए कई बार प्रशासन से गुहार लगा चुके हैं। लेकिन समय रहते प्रशासन के कान पर जूं नहीं रेंगी। अब जब सरयू की तेज धारा गांव के कई घरों का कटान करते हुए लगातार आगे बढ़ती जा रही है, तब प्रशासन ने इस धारा को रोकने के लिए अस्थाई स्टड बनाने की कवायद शुरू की है। अस्थाई स्टड का निर्माण गांव के आस्तित्व को बचा पाएगा या नहीं यह फिलहाल भविष्य के गर्भ में है।