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Sitapur News: सत्संग से प्रशस्त होता है विवेक, वैराग्य और आत्मकल्याण का मार्ग
Mon, 20 Jul 2026 12:09 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
Updated Mon, 20 Jul 2026 12:09 AM IST
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सिद्धेश्वर महादेव मंदिर में कथा सुनाते व्यास। संवाद
सिधौली। शनिदेव महाराज के 18वें वार्षिकोत्सव के उपलक्ष्य में श्री सिद्धेश्वर महादेव धाम में आयोजित श्री सिद्धेश्वर रुद्र महायज्ञ व भक्ति-ज्ञान संत सम्मेलन के पांचवें दिन रविवार को यज्ञ संपन्न हुआ। यज्ञाचार्य पं. अंबादत्त त्रिपाठी तथा सहयोगी आचार्यों ने पूजन कराया गया।
बन्नी धाम से पधारे नारायण स्वामी महाराज ने कहा कि संतों की संगति ही मनुष्य के जीवन को सही दिशा देती है। सत्संग से विवेक, वैराग्य और आत्मकल्याण का मार्ग प्रशस्त होता है। अयोध्या धाम से आए दामोदर दास महाराज ने नारद मोह प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन करते हुए कहा कि जब देवर्षि नारद के मन में अपने रूप और तप का अहंकार उत्पन्न हुआ तब उन्होंने राजकुमारी से विवाह की इच्छा व्यक्त की। भगवान विष्णु ने अपने भक्त के कल्याण के लिए ऐसी लीला रची कि उनका मुख वानर के समान हो गया। स्वयंवर में उपहास होने पर वे व्यथित होकर भगवान शिव के पास पहुंचे। भगवान शिव ने उन्हें समझाया कि भगवान कभी भी अपने भक्त का अहित नहीं करते, बल्कि उनकी प्रत्येक लीला अहंकार का नाश कर सच्चे ज्ञान और भक्ति की ओर अग्रसर करती है।
उन्होंने कहा कि विपरीत परिस्थितियों में भी प्रभु पर अटूट विश्वास बनाए रखना ही सच्ची भक्ति है। आयोजक स्वामी प्रकाशानंद सरस्वती जी महाराज ने कहा कि जो भक्त अनन्य भाव से भगवान का स्मरण करता है, उसके योग-क्षेम का भार स्वयं भगवान वहन करते हैं। उन्होंने श्रद्धालुओं से महायज्ञ, सत्संग व धार्मिक अनुष्ठानों में अधिकाधिक सहभागिता कर धर्म और संस्कृति के संरक्षण में अपना योगदान देने का आह्वान किया। इस दौरान नगर पंचायत अध्यक्ष गंगाराम राजपूत, अनूप बाजपेई, विमल शुक्ल, रामआसरे पांडेय, वेद मिश्र, राजेश मिश्र, प्रमोद राजपूत, ज्ञानेश पाल, विनोद तिवारी, रामसनेही आदि मौजूद रहे।
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बन्नी धाम से पधारे नारायण स्वामी महाराज ने कहा कि संतों की संगति ही मनुष्य के जीवन को सही दिशा देती है। सत्संग से विवेक, वैराग्य और आत्मकल्याण का मार्ग प्रशस्त होता है। अयोध्या धाम से आए दामोदर दास महाराज ने नारद मोह प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन करते हुए कहा कि जब देवर्षि नारद के मन में अपने रूप और तप का अहंकार उत्पन्न हुआ तब उन्होंने राजकुमारी से विवाह की इच्छा व्यक्त की। भगवान विष्णु ने अपने भक्त के कल्याण के लिए ऐसी लीला रची कि उनका मुख वानर के समान हो गया। स्वयंवर में उपहास होने पर वे व्यथित होकर भगवान शिव के पास पहुंचे। भगवान शिव ने उन्हें समझाया कि भगवान कभी भी अपने भक्त का अहित नहीं करते, बल्कि उनकी प्रत्येक लीला अहंकार का नाश कर सच्चे ज्ञान और भक्ति की ओर अग्रसर करती है।
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उन्होंने कहा कि विपरीत परिस्थितियों में भी प्रभु पर अटूट विश्वास बनाए रखना ही सच्ची भक्ति है। आयोजक स्वामी प्रकाशानंद सरस्वती जी महाराज ने कहा कि जो भक्त अनन्य भाव से भगवान का स्मरण करता है, उसके योग-क्षेम का भार स्वयं भगवान वहन करते हैं। उन्होंने श्रद्धालुओं से महायज्ञ, सत्संग व धार्मिक अनुष्ठानों में अधिकाधिक सहभागिता कर धर्म और संस्कृति के संरक्षण में अपना योगदान देने का आह्वान किया। इस दौरान नगर पंचायत अध्यक्ष गंगाराम राजपूत, अनूप बाजपेई, विमल शुक्ल, रामआसरे पांडेय, वेद मिश्र, राजेश मिश्र, प्रमोद राजपूत, ज्ञानेश पाल, विनोद तिवारी, रामसनेही आदि मौजूद रहे।
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