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नमामि गंगे से स्वच्छ होगा सरायन का पानी

Sat, 18 Jan 2020 12:00 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Sat, 18 Jan 2020 12:00 AM IST
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sarayan river will be clean
सीतापुर। अब सरायन नदी का पानी स्वच्छ और निर्मल होगा। इसके लिए नमामि गंगे कार्यक्रम के अंतर्गत शहर में 6 सीवेज पंपिंग स्टेशन और एक सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट का निर्माण किया जाएगा। जल निगम को इसके लिए डीपीआर तैयार करने के निर्देश जारी किए गए हैं।
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जल निगम के अधिशासी अभियंता ने सीवेज पंपिंग स्टेशनों के लिए शहर में छह जगहों पर 9600 मीटर जमीन और सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट के लिए दो हेक्टेयर जमीन मुहैया कराने को कहा है। ताकि निर्माण के लिए प्राक्कलन बनाया जा सके।
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दरअसल, शहर के मध्य से होकर बहने वाली सरायन नदी में मिलने वाले सभी ड्रेन्स के शुद्धिकरण के लिए नमामि गंगे कार्यक्रम के अंतर्गत एसटीपी का निर्माण किया जाना है। इसके लिए प्रदेश के संयुक्त सचिव की ओर से जल निगम को डीपीआर तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं।
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जल निगम टीम के स्थलीय निरीक्षण के दौरान शहर की परिधि में मछली मंडी, कैंची पुल के करीब, तरीनपुर और दुर्गापुरवा सहित 20 ऐसे स्थान चिन्हित किए गए हैं जहां पर नालों का गंदा पानी सरायन नदी में गिरता है।
जल निगम के अधिशासी अभियंता ने नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी को पत्र लिखकर नेशनल हाईवे के किनारे बाईपास पुल के करीब दो हेक्टेयर जमीन सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट और सरायन नदी के किनारे छह जगहों पर 40 बाई 40 मीटर जमीन मुहैया कराने को पत्र लिखा है।
जमीन मिलने पर प्राक्कलन-विरचन (डीपीआर) का कार्य किया जाएगा। एसटीपी निर्माण के बाद गंदे नालों का पानी सीवर ट्रीटमेंट करके सरायन नदी में गिराया जाएगा। इससे सरायन का पानी स्वच्छ व निर्मल हो सकेगा।
क्या है एसटीपी
सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट में गंदे पानी को विशेष विधि से साफ किया जाता है। इसके लिए भौतिक, रासायनिक और जैविक विधि का प्रयोग किया जाता है। इसके माध्यम से दूषित पानी को स्वच्छ व निर्मल किया जाता है। दूषित पानी से निकलने वाली गंदगी को इस तरह शोधन किया जाता है कि उसका उपयोग वातावरण के सहायक के रूप में किया जाता है।
इस तरह करता है काम
एसटीपी को ऐसी जगह बनाया जाता है जहां विभिन्न स्थानों से दूषित जल पहुंचाया जा सके। दूषित पानी को साफ करने की प्रक्रिया तीन चरणों में होती है। पहले ठोस पदार्थ अलग किया जाता है फिर जैविक पदार्थ को एक ठोस समूह एवं वातावरण के अनुकूल बनाकर इसका प्रयोग खाद व लाभदायक उर्वरक के रूप में किया जाता है। इसके बाद साफ हो चुके पानी को नदी में छोड़ दिया जाता है।

सरायन नदी को स्वच्छ करने के लिए एसटीपी का निर्माण कराया जाना है। इसके लिए नगर पालिका से जमीन मांगी गई है। जमीन मिलते ही प्राक्कलन-विरचन का कार्य शुरू कर दिया जाएगा।
- कमलेश सिंह, अधिशासी अभियंता, जल निगम
जल निगम द्वारा एसटीपी निर्माण के लिए जमीन मांगी गई है। जमीन तलाश की जा रही है। जरूरत के मुताबिक जमीन मिलते ही जल निगम को उपलब्ध करा दी जाएगी।
-गुरु प्रसाद पांडेय, अधिशासी अधिकारी
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