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आरक्षण से बिगड़ेगी दावेदारों की गणित
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सीतापुर। निकाय चुनाव को लेकर हर गुजरते दिन के साथ सरगर्मियां तेज होती जा रही हैं। चुनावी दंगल में किस्मत आजमाने के लिए दावेदारों ने ताकत झोंकनी शुरू कर दी है, लेकिन अभी आरक्षण का निर्धारण नहीं हुआ है। शासन से संभावित चक्रानुक्रम व्यवस्था लागू होने से सीटों के आरक्षण में बदलाव हो जाएगा। इससे कई दावेदारों का चुनावी समीकरण बिगड़ सकता है। उन्हें चुनाव लड़ने के लिए नया ठिकाना तलाश करना पड़ सकता है।
निकाय चुनाव की तैयारियां तेजी से चल रही हैं। इसी के तहत वार्डों के आरक्षण का प्रस्ताव शासन स्तर से चार नवंबर तक मांगा गया था। इस प्रस्ताव को अंतिम रूप दिया गया है। जिले की 11 निकायों के 228 वार्डों का प्रस्तावित आरक्षण शासन को भेज दिया गया है। चक्रानुक्रम व्यवस्था अपनाए जाने से सीटों के आरक्षण में बदलाव तय माना जा रहा है।
जिले में छह नगर पालिका और पांच नगर पंचायत हैं। नगर पंचायत महोली और तंबौर-अहमदाबाद का सीमा विस्तार किए जाने से यहां तीन-तीन वार्ड बढ़े हैं। इससे 11 निकायों में वार्डों की संख्या बढ़कर 228 हो गई है। इन वार्डों के आरक्षण का प्रस्ताव भेजने के निर्देश शासन ने दिए थे। इसके लिए चार नवंबर की तिथि तय की गई थी।
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प्रशासन ने काफी मशक्कत के बाद सभी वार्डों के प्रस्तावित आरक्षण को तय कर समिति के हस्ताक्षरों से इसकी सूचना विशेष सचिव नगर विकास केे विशेष वाहक के माध्यम से भेजी है। अब आगे की कार्रवाई शासन को करनी है। इसके लिए आरक्षण का अनंतिम प्रकाशन कर उस पर आपत्तियां ली जाएंगी। उसके निस्तारण के बाद अंतिम प्रकाशन होगा। विभागीय जानकार बताते हैं कि इस बार चक्रानुक्रम में वार्डों का आरक्षण प्रस्तावित किया गया है।
इससे पूर्व की आरक्षित सीटों में बदलाव होगा। यह उन उम्मीदवारों के लिए मुश्किलें खड़ी करेगा, जो काफी समय से तैयारी कर रहे हैं। हालांकि जब तक आरक्षण का अंतिम प्रकाशन नहीं होता है, तब तक उनकी उम्मीद का दीया रोशन जरूर है। दावेदार बड़ी बेसब्री से आरक्षण का इंतजार कर रहे हैं। एडीएम राम भरत तिवारी ने बताया कि शासन के आदेश के अनुसार चक्रानुक्रम में निकाय चुनाव का प्रस्तावित आरक्षण तैयार किया गया है। प्रस्तावित आरक्षण शासन को भेज दिया गया है।
ओबीसी के लिए प्रस्तावित की गईं 27 फीसदी सीटें
शासन की ओर से वार्डों के आरक्षण के लिए मांगे गए प्रस्ताव में आदेशों का पालन किया गया है। जानकारों के मुताबिक प्रस्तावित आरक्षण में 27 फीसदी ओबीसी के लिए सीटें आरक्षित की गई हैं। साथ ही 21 फीसदी आरक्षण अनुसूचित जाति के लिए है। सभी वर्गों को मिलाते हुए ओवर ऑल 33 फीसदी भागीदारी महिलाओं की रहेगी। चक्र चलने से वर्ग विशेष की आबादी बाहुल्य वाले वार्ड दूसरे वर्ग के लिए आरक्षित हो सकते हैं।
महोली में बढ़ी एससी की आबादी
निकायों के सीमा विस्तार का असर आरक्षण पर भी पड़ेगा। इससे वहां की सीटों के आरक्षण में बड़े उलटफेर की संभावना जताई जा रही है। इससे अध्यक्ष सहित वार्डों के आरक्षण पर प्रभाव पड़ेगा। सीमा विस्तार से नगर पंचायत महोली में अनुसूचित जाति की आबादी बढ़ी है। इसी प्रकार नगर पालिका परिषद महमूदाबाद में पिछड़े वर्ग की आबादी पिछले निकाय चुनाव की अपेक्षा अधिक बढ़ी है।
अंतिम समय तक चला सिफारिशों का दौर
11 निकायों के 228 वार्डों के आरक्षण में प्रशासन की टीम ने बड़ी सजगता बरती है, जिससे कोई आरक्षण पर उंगली न उठा सके। सूत्रों का कहना कि कुछ वार्डोँ का आरक्षण बदलने के लिए प्रभावशाली लोगों ने दबाव बनाने का प्रयास किया। राजनीतिक दबाव भी रहा, लेकिन इसका असर प्रशासन पर नहीं पड़ा। इस कार्य में प्रशासन के निचले से ऊपर तक के जिम्मेदारों ने सख्ती बरकरार रखते हुए प्रस्तावित आरक्षण को अंतिम रूप देकर इसे समय से शासन को भेज दिया है। प्रत्येक निकाय के वार्ड आरक्षण की प्रस्तावित सूची पर ईओ, संबंधित एसडीएम, एडीएम और डीएम के हस्ताक्षर हैं।
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निकाय चुनाव की तैयारियां तेजी से चल रही हैं। इसी के तहत वार्डों के आरक्षण का प्रस्ताव शासन स्तर से चार नवंबर तक मांगा गया था। इस प्रस्ताव को अंतिम रूप दिया गया है। जिले की 11 निकायों के 228 वार्डों का प्रस्तावित आरक्षण शासन को भेज दिया गया है। चक्रानुक्रम व्यवस्था अपनाए जाने से सीटों के आरक्षण में बदलाव तय माना जा रहा है।
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जिले में छह नगर पालिका और पांच नगर पंचायत हैं। नगर पंचायत महोली और तंबौर-अहमदाबाद का सीमा विस्तार किए जाने से यहां तीन-तीन वार्ड बढ़े हैं। इससे 11 निकायों में वार्डों की संख्या बढ़कर 228 हो गई है। इन वार्डों के आरक्षण का प्रस्ताव भेजने के निर्देश शासन ने दिए थे। इसके लिए चार नवंबर की तिथि तय की गई थी।
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प्रशासन ने काफी मशक्कत के बाद सभी वार्डों के प्रस्तावित आरक्षण को तय कर समिति के हस्ताक्षरों से इसकी सूचना विशेष सचिव नगर विकास केे विशेष वाहक के माध्यम से भेजी है। अब आगे की कार्रवाई शासन को करनी है। इसके लिए आरक्षण का अनंतिम प्रकाशन कर उस पर आपत्तियां ली जाएंगी। उसके निस्तारण के बाद अंतिम प्रकाशन होगा। विभागीय जानकार बताते हैं कि इस बार चक्रानुक्रम में वार्डों का आरक्षण प्रस्तावित किया गया है।
इससे पूर्व की आरक्षित सीटों में बदलाव होगा। यह उन उम्मीदवारों के लिए मुश्किलें खड़ी करेगा, जो काफी समय से तैयारी कर रहे हैं। हालांकि जब तक आरक्षण का अंतिम प्रकाशन नहीं होता है, तब तक उनकी उम्मीद का दीया रोशन जरूर है। दावेदार बड़ी बेसब्री से आरक्षण का इंतजार कर रहे हैं। एडीएम राम भरत तिवारी ने बताया कि शासन के आदेश के अनुसार चक्रानुक्रम में निकाय चुनाव का प्रस्तावित आरक्षण तैयार किया गया है। प्रस्तावित आरक्षण शासन को भेज दिया गया है।
ओबीसी के लिए प्रस्तावित की गईं 27 फीसदी सीटें
शासन की ओर से वार्डों के आरक्षण के लिए मांगे गए प्रस्ताव में आदेशों का पालन किया गया है। जानकारों के मुताबिक प्रस्तावित आरक्षण में 27 फीसदी ओबीसी के लिए सीटें आरक्षित की गई हैं। साथ ही 21 फीसदी आरक्षण अनुसूचित जाति के लिए है। सभी वर्गों को मिलाते हुए ओवर ऑल 33 फीसदी भागीदारी महिलाओं की रहेगी। चक्र चलने से वर्ग विशेष की आबादी बाहुल्य वाले वार्ड दूसरे वर्ग के लिए आरक्षित हो सकते हैं।
महोली में बढ़ी एससी की आबादी
निकायों के सीमा विस्तार का असर आरक्षण पर भी पड़ेगा। इससे वहां की सीटों के आरक्षण में बड़े उलटफेर की संभावना जताई जा रही है। इससे अध्यक्ष सहित वार्डों के आरक्षण पर प्रभाव पड़ेगा। सीमा विस्तार से नगर पंचायत महोली में अनुसूचित जाति की आबादी बढ़ी है। इसी प्रकार नगर पालिका परिषद महमूदाबाद में पिछड़े वर्ग की आबादी पिछले निकाय चुनाव की अपेक्षा अधिक बढ़ी है।
अंतिम समय तक चला सिफारिशों का दौर
11 निकायों के 228 वार्डों के आरक्षण में प्रशासन की टीम ने बड़ी सजगता बरती है, जिससे कोई आरक्षण पर उंगली न उठा सके। सूत्रों का कहना कि कुछ वार्डोँ का आरक्षण बदलने के लिए प्रभावशाली लोगों ने दबाव बनाने का प्रयास किया। राजनीतिक दबाव भी रहा, लेकिन इसका असर प्रशासन पर नहीं पड़ा। इस कार्य में प्रशासन के निचले से ऊपर तक के जिम्मेदारों ने सख्ती बरकरार रखते हुए प्रस्तावित आरक्षण को अंतिम रूप देकर इसे समय से शासन को भेज दिया है। प्रत्येक निकाय के वार्ड आरक्षण की प्रस्तावित सूची पर ईओ, संबंधित एसडीएम, एडीएम और डीएम के हस्ताक्षर हैं।