{"_id":"6ab96413122f65bbbd011a44","slug":"relying-on-candles-amidst-the-power-crisis-sitapur-news-c-102-1-stp1002-164773-2026-09-28","type":"story","status":"publish","title_hn":"Sitapur News: बिजली संकट के बीच मोमबत्ती का सहारा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Sitapur News: बिजली संकट के बीच मोमबत्ती का सहारा
विज्ञापन
मोमबत्ती का सहारा
सीतापुर। लगातार बारिश से बिजली व्यवस्था चरमरा गई है। ग्रामीण क्षेत्रों में शनिवार दोपहर से गुल बिजली रविवार शाम तक बहाल नहीं हो सकी। इन्वर्टर और इमरजेंसी लाइटें डिस्चार्ज होने से घरों में अंधेरा छा गया। लोग मोमबत्ती जलाकर काम चला रहे हैं। इससे मोमबत्ती की बिक्री बढ़ गई है। वहीं, पानी की टंकी भरने के लिए लोग किराये पर जेनरेटर लेते नजर आए।
बृहस्पतिवार रात से रविवार सुबह तक लगातार बारिश होती रही। तेज हवा से बिजली के खंभे और पेड़ गिरने से लाइनें क्षतिग्रस्त हुई हैं। बिजली न आने से घरों के इन्वर्टर जवाब दे गए। व्यापारी संदीप निगम ने बताया कि कई महीनों तक मोमबत्ती का ग्राहक नहीं आया था, लेकिन रविवार को करीब 30 पैकेट बिक गए।
जयकृष्ण पांडेय ने बताया कि बिजली के बिना इमरजेंसी लाइटें भी चार्ज नहीं हो पा रही हैं। घरों में ढिबरी और लालटेन भी अब नहीं हैं, इसलिए मोमबत्ती ही सहारा है। अंकित ने बताया कि पानी की टंकी खाली होने पर किराये का जेनरेटर लाकर उसे भरना पड़ा। जेनरेटर चलता देख कई पड़ोसी पानी लेने और मोबाइल चार्ज करने पहुंच गए। विजय ने कहा कि कई वर्षों बाद ऐसे हालात बने हैं।
विज्ञापन
आटा चक्की संचालक रोहित तिवारी ने बताया कि दो दिन से बिजली न आने से गेहूं का स्टॉक बढ़ता जा रहा है। आटा और सरसों पिराई के ऑर्डर समय पर पूरे नहीं हो पा रहे हैं। जनरेटर से चक्की चलाने में खर्च अधिक आता है। मोहित ने बताया कि घर के लिए गेहूं दिया था, लेकिन पिसाई नहीं हो सकी, इसलिए बाजार से आटा खरीदना पड़ा। मयंक ने बताया कि सरसों तेल समय पर नहीं मिला तो बाजार से खरीदना पड़ा।
विज्ञापन
बृहस्पतिवार रात से रविवार सुबह तक लगातार बारिश होती रही। तेज हवा से बिजली के खंभे और पेड़ गिरने से लाइनें क्षतिग्रस्त हुई हैं। बिजली न आने से घरों के इन्वर्टर जवाब दे गए। व्यापारी संदीप निगम ने बताया कि कई महीनों तक मोमबत्ती का ग्राहक नहीं आया था, लेकिन रविवार को करीब 30 पैकेट बिक गए।
विज्ञापन
जयकृष्ण पांडेय ने बताया कि बिजली के बिना इमरजेंसी लाइटें भी चार्ज नहीं हो पा रही हैं। घरों में ढिबरी और लालटेन भी अब नहीं हैं, इसलिए मोमबत्ती ही सहारा है। अंकित ने बताया कि पानी की टंकी खाली होने पर किराये का जेनरेटर लाकर उसे भरना पड़ा। जेनरेटर चलता देख कई पड़ोसी पानी लेने और मोबाइल चार्ज करने पहुंच गए। विजय ने कहा कि कई वर्षों बाद ऐसे हालात बने हैं।
विज्ञापन
आटा चक्की संचालक रोहित तिवारी ने बताया कि दो दिन से बिजली न आने से गेहूं का स्टॉक बढ़ता जा रहा है। आटा और सरसों पिराई के ऑर्डर समय पर पूरे नहीं हो पा रहे हैं। जनरेटर से चक्की चलाने में खर्च अधिक आता है। मोहित ने बताया कि घर के लिए गेहूं दिया था, लेकिन पिसाई नहीं हो सकी, इसलिए बाजार से आटा खरीदना पड़ा। मयंक ने बताया कि सरसों तेल समय पर नहीं मिला तो बाजार से खरीदना पड़ा।