{"_id":"6265989d4f57126344675a39","slug":"ration-sitapur-news-lko627652256","type":"story","status":"publish","title_hn":"सरकारी नौकरी वाले भी डकार रहे गरीबों का राशन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सरकारी नौकरी वाले भी डकार रहे गरीबों का राशन
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सीतापुर। 25 बीघा से अधिक जमीन के जोतकार हैं। पक्के दो मंजिला मकान में रहकर जिंदगी जी रहे हैं। लाइसेंसी बंदूक से रौब गांठ रहे है लेकिन जब सरकारी राशन लेने की बात आती है तो वह गरीबों का हक मारकर सबसे पहले हासिल कर रहे हैं। यह सच्चाई राशनकार्डों की स्थलीय जांच में सामने आई है। अभी इसकी शुरुआत हुई है। जिले में इस तरह के कार्डधारकों की जांच शुरू हो गई है। इसके बाद अपात्रों में हड़कंप मच गया है। अफसरों की माने तो इस तरह के करीब 20 फीसदी लोग जरूर मिल जाएंगे।
ग्राम पंचायत कटरा के ही शांती देवी के पति किशोर इंटर कॉलेज सेवता में परिचारक के पद से 2015 में सेवानिवृत्त हुए थे। वर्तमान में यह पेंशनभोगी है। गांव की भाग्यवती का पात्र गृहस्थी के तहत राशनकार्ड बना हुआ है। इनके पति राजितराम जनता इंटर कॉलेज में 1981 से दफ्तरी के पद पर सेवारत है। बीडीओ की जांच में ये लोग अपात्र मिले हैं।
पात्र गृहस्थी व अंत्योदय दो तरह के राशनकार्ड बनवाए गए है। इन कार्डों पर गेहूं, चावल, दाल, नमक, तेल व चना मिलता है। पिछली बार लॉकडाउन के बाद हर माह दो बार राशन मिल रहा है। जिसमें एक बार कार्डधारक को निशुल्क राशन मिलता है लेकिन जिले में राशनकार्ड बनवाने में बहुत ही अनियमितता बरती गई है। राशनकार्डों की सूची में तमाम अपात्र शामिल हो गए है। यह अपात्र कई वर्षों से राशन का लाभ उठा रहे है। इसकी वजह से असली जरूरतमंदों के राशनकार्ड नहीं बन पा रहे है।
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वह ऑनलाइन करके वर्षों से कार्यालयों के चक्कर काट रहे है। जब जिला पूर्ति अधिकारी के पास जाते है तो शहर व ग्रामीण इलाके का कोटा फुल होने की जानकारी देकर उनको वापस कर देते है। इससे जरूरतमंदों की संख्या काफी अधिक बढ़ती जा रही है। इस समस्या को लेकर डीएसओ ने पूरे जिले के राशनकार्डधारकों की जांच के निर्देश दिए है।
शहर में ईओ व ग्रामीण इलाके में बीडीओ इन कार्डो की जांच करेंगे। प्रारंभिक जांच में यह सामने आया है कई कार्डधारकों के पास लाइसेंसी बंदूक है। वह 25 बीघा से अधिक जमीन का मालिकाना हक रखते है। इसके जरिए वह प्रति वर्ष लाखों की कमाई कर रहे है। फिर भी फ्री राशन का मोह नहीं छोड़ पा रहे है। अफसरों की शुरू हुई जांच से अब अपात्रों में बेचैनी पैदा हो गई है। (संवाद)
लाइसेंसी बंदूक है फिर भी ले रहे लाभ
रेउसा विकासखंड के ग्राम पंचायत कटरा निवासिनी विनीता सरकारी राशन का भरपूर आनंद ले रही हैं। विनीता के पास 25 बीघा से अधिक जमीन है। दो मंजिला मकान बना हुआ है। इनका पात्र गृहस्थी के तहत राशनकार्ड बना हुआ है। जब अफसरों ने जांच की तो ये अपात्र मिली है। इसी तरह कुमुद के पास लाइसेंसी बंदूक है। शांती देवी इस समय बीडीसी है। इनके पास काफी अधिक जमीन है। अब इन लोगों के नाम राशनकार्ड सूची से काटे जाएंगे।
कोटा न पहुंचने वाले भी रडार पर
जब राशनकार्डों की जांच शुरू हो गई है तो ऐसे लोग भी रडार पर आ गए हैं, जो लंबे समय से कोटा नहीं जा रहे हैं। डीएसओ का कहना है कि तीन माह से अधिक समय से जो लोग अपना राशन लेने नहीं जा रहे हैं, उनकी भी जांच करवाई जाएगी। आखिर यह लोग क्यों नहीं आ रहे हैं। इनके कार्ड निरस्त किए जाएंगे। इनकी जगह पर नए लोगों को कार्ड की सुविधा दी जाएगी।
कोटा फुल होने से नए लोगों के नहीं बन रहे कार्ड
डीएसओ ने बताया शहरी क्षेत्र में 64 फीसदी व ग्रामीण इलाके में 79 फीसदी जरूरतमंदों के राशनकार्ड बनवाने का कोटा तय है। जिले में शहरी व ग्रामीण दोनों इलाकों में यह कोटा फुल हो चुका है। इसकी वजह से नए लोगों के कार्ड नहीं बन पा रहे हैं।
यह है अपात्रता की श्रेणी
यदि परिवार का कोई सदस्य आयकरदाता है। परिवार के किसी भी सदस्य के स्वामित्व में ट्रैक्टर-ट्रॉली है। पांच केवीए या उससे अधिक क्षमता का जनरेटर है। ग्रामीण में ऐसे परिवार जिनके पास पांच एकड़ से अधिक सिंचित भूमि है। नगरीय क्षेत्र में 100 वर्ग मीटर से अधिक आवासीय प्लाट है। ग्रामीण में दो लाख व शहर में तीन लाख से अधिक की प्रति वर्ष आय है। ऐसे परिवार जिनके पास एक से अधिक शस्त्र लाइसेंस है। इस श्रेणी में आने वाले सभी राशनकार्डधारकों को अपात्र घोषित किया जाएगा।
सभी की होगी जांच
जिले में सभी राशनकार्डधारकों की जांच शुरू हो गई है। अपात्रों की रिपोर्ट मिलते ही उनके निरस्त कर दिए जाएंगे। वेटिंग में जरूरतमंदों के नए सिरे से कार्ड बनवाए जाएंगे। इसलिए जो लोग अपात्र की श्रेणी में आते हैं वह खुद ही अपना कार्ड सरेंडर कर दें। पकड़े जाने पर राशन की रिकवरी की जाएगी।
- संजय प्रसाद, डीएसओ
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ग्राम पंचायत कटरा के ही शांती देवी के पति किशोर इंटर कॉलेज सेवता में परिचारक के पद से 2015 में सेवानिवृत्त हुए थे। वर्तमान में यह पेंशनभोगी है। गांव की भाग्यवती का पात्र गृहस्थी के तहत राशनकार्ड बना हुआ है। इनके पति राजितराम जनता इंटर कॉलेज में 1981 से दफ्तरी के पद पर सेवारत है। बीडीओ की जांच में ये लोग अपात्र मिले हैं।
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पात्र गृहस्थी व अंत्योदय दो तरह के राशनकार्ड बनवाए गए है। इन कार्डों पर गेहूं, चावल, दाल, नमक, तेल व चना मिलता है। पिछली बार लॉकडाउन के बाद हर माह दो बार राशन मिल रहा है। जिसमें एक बार कार्डधारक को निशुल्क राशन मिलता है लेकिन जिले में राशनकार्ड बनवाने में बहुत ही अनियमितता बरती गई है। राशनकार्डों की सूची में तमाम अपात्र शामिल हो गए है। यह अपात्र कई वर्षों से राशन का लाभ उठा रहे है। इसकी वजह से असली जरूरतमंदों के राशनकार्ड नहीं बन पा रहे है।
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वह ऑनलाइन करके वर्षों से कार्यालयों के चक्कर काट रहे है। जब जिला पूर्ति अधिकारी के पास जाते है तो शहर व ग्रामीण इलाके का कोटा फुल होने की जानकारी देकर उनको वापस कर देते है। इससे जरूरतमंदों की संख्या काफी अधिक बढ़ती जा रही है। इस समस्या को लेकर डीएसओ ने पूरे जिले के राशनकार्डधारकों की जांच के निर्देश दिए है।
शहर में ईओ व ग्रामीण इलाके में बीडीओ इन कार्डो की जांच करेंगे। प्रारंभिक जांच में यह सामने आया है कई कार्डधारकों के पास लाइसेंसी बंदूक है। वह 25 बीघा से अधिक जमीन का मालिकाना हक रखते है। इसके जरिए वह प्रति वर्ष लाखों की कमाई कर रहे है। फिर भी फ्री राशन का मोह नहीं छोड़ पा रहे है। अफसरों की शुरू हुई जांच से अब अपात्रों में बेचैनी पैदा हो गई है। (संवाद)
लाइसेंसी बंदूक है फिर भी ले रहे लाभ
रेउसा विकासखंड के ग्राम पंचायत कटरा निवासिनी विनीता सरकारी राशन का भरपूर आनंद ले रही हैं। विनीता के पास 25 बीघा से अधिक जमीन है। दो मंजिला मकान बना हुआ है। इनका पात्र गृहस्थी के तहत राशनकार्ड बना हुआ है। जब अफसरों ने जांच की तो ये अपात्र मिली है। इसी तरह कुमुद के पास लाइसेंसी बंदूक है। शांती देवी इस समय बीडीसी है। इनके पास काफी अधिक जमीन है। अब इन लोगों के नाम राशनकार्ड सूची से काटे जाएंगे।
कोटा न पहुंचने वाले भी रडार पर
जब राशनकार्डों की जांच शुरू हो गई है तो ऐसे लोग भी रडार पर आ गए हैं, जो लंबे समय से कोटा नहीं जा रहे हैं। डीएसओ का कहना है कि तीन माह से अधिक समय से जो लोग अपना राशन लेने नहीं जा रहे हैं, उनकी भी जांच करवाई जाएगी। आखिर यह लोग क्यों नहीं आ रहे हैं। इनके कार्ड निरस्त किए जाएंगे। इनकी जगह पर नए लोगों को कार्ड की सुविधा दी जाएगी।
कोटा फुल होने से नए लोगों के नहीं बन रहे कार्ड
डीएसओ ने बताया शहरी क्षेत्र में 64 फीसदी व ग्रामीण इलाके में 79 फीसदी जरूरतमंदों के राशनकार्ड बनवाने का कोटा तय है। जिले में शहरी व ग्रामीण दोनों इलाकों में यह कोटा फुल हो चुका है। इसकी वजह से नए लोगों के कार्ड नहीं बन पा रहे हैं।
यह है अपात्रता की श्रेणी
यदि परिवार का कोई सदस्य आयकरदाता है। परिवार के किसी भी सदस्य के स्वामित्व में ट्रैक्टर-ट्रॉली है। पांच केवीए या उससे अधिक क्षमता का जनरेटर है। ग्रामीण में ऐसे परिवार जिनके पास पांच एकड़ से अधिक सिंचित भूमि है। नगरीय क्षेत्र में 100 वर्ग मीटर से अधिक आवासीय प्लाट है। ग्रामीण में दो लाख व शहर में तीन लाख से अधिक की प्रति वर्ष आय है। ऐसे परिवार जिनके पास एक से अधिक शस्त्र लाइसेंस है। इस श्रेणी में आने वाले सभी राशनकार्डधारकों को अपात्र घोषित किया जाएगा।
सभी की होगी जांच
जिले में सभी राशनकार्डधारकों की जांच शुरू हो गई है। अपात्रों की रिपोर्ट मिलते ही उनके निरस्त कर दिए जाएंगे। वेटिंग में जरूरतमंदों के नए सिरे से कार्ड बनवाए जाएंगे। इसलिए जो लोग अपात्र की श्रेणी में आते हैं वह खुद ही अपना कार्ड सरेंडर कर दें। पकड़े जाने पर राशन की रिकवरी की जाएगी।
- संजय प्रसाद, डीएसओ