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देवों के गांव पहुंचा रामादल

Sat, 04 Mar 2017 11:20 PM IST
Amar ujala Bureau
Amar ujala Bureau Updated Sat, 04 Mar 2017 11:20 PM IST
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Ramadal rached the village Devgaun
गोमती के तट पर शनिवार भोर रामादल के जयघोष से चारों दिशाएं गूंज उठी। ऐसा लग रहा था जैसे कि हर तरफ भक्ति की बयार बह रही हो। पुल के नीचे तो आदि गंगा गोमती की जलधारा बह रही थी, जबकि पुल के ऊपर भक्तों का सैलाब उमड़ता नजर आ रहा था।
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कुछ इसी तरह से रामादल ने हरदोई सीमा से सीतापुर जिले में प्रवेश किया। प्रभु श्रीराम, माता सीता, भगवान हनुमान के गगनभेदी जयकारों से क्षेत्र के नागरिकों समेत पक्षियों की नींद टूटी। साखिन गोपालपुर से चला रामादल बड़ी तेजी से देवगवां पड़ाव की तरफ बढ़ता जा रहा था।
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नजारा ऐसा कि जिसने भी देखा, वह भक्ति की लहर से भीगे बिना नहीं बच सका। हरदोई के साखिन गोपालपुर में ठहरे श्रद्धालु शनिवार की भोर शंख, घंटे, घड़ियाल की ध्वनि सुनकर जाग गए। उन्होंने स्नान पूजन कर छठे पड़ाव के लिए कूच कर दिया।
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यह ऐसा मौका था, जब परिक्रमार्थी सीतापुर जिले में लौटकर आ रहे थे। देवगवां आने से पहले आदि गंगा गोमती नदी को श्रद्धालुओं को पार करना पड़ता है, उसी पुल पर एक तरफ सीतापुर जिले का पुलिस बल तैनात था, तो दूसरी तरफ हरदोई जिले का।

भोर के वक्त श्रद्धालुओं के कदम जो पुल पर पड़े, उसके बाद आगमन का सिलसिला ही शुरू हो गया। जहां पर आम श्रद्धालु साइकिल, ट्रैक्टर ट्राली, बैलगाड़ी, मोटर साइकिल, मोपेड, पैदल चल रहा था। वहीं साधु संत विशेष भूषा में पालकी, हाथी, घोड़े, लग्जरी कार पर सवार होकर परिक्रमा कर रहे थे।

इस परिक्रमा के स्वागत के लिए क्षेेत्र के बाशिंदे पहले से ही पलक पांवड़े बिछाए हुए थे, ये ग्रामीण श्रद्धालुओं का हौसला बढ़ाने व स्वागत करने के लिए भगवान सियाराम के जयघोष लगा रहे थे। साधु संत भी अपने अंदाज से परिक्रमा कर रहे थे।

कोई डमरू की ध्वनि पर, कोई बांसुरी के स्वर पर, कोई ढोल की थाप पर तो कोई ढपली पर की धुन पर नृत्य कर रहा था। नाचते गाते श्रद्धालु भक्ति में लीन होकर आगे बढ़े जा रहे थे। बच्चे, महिलाएं, युवा व बुजुर्ग भक्ति गीत व भजन गाते हुए, परिक्रमा के माहौल को कुछ और ही भक्तिमय बना रहे थे।


श्रद्धालुओं ने गत सोमवार 27 फरवरी को 84 कोसी परिक्रमा के लिए नैमिषारण्य से कूच किया था। अब तक श्रद्धालु पांच पड़ाव पार कर चुके हैं, इसके बाद भी उनके चेहरे पर थकान नजर नहीं आ रही थी। श्रद्धालुओं ने कुतुब नगर मिश्रिख मार्ग, कुतब नगर पिसावां मार्ग, देवगवां मड़रुवा मार्ग समेत खेत व खलिहानों में डेरा डाल रखा था।
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