फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Sitapur News ›   rain brings difficulties, flood hit again for villagers

नदियां बनेंगी मुसीबत, बाढ़ राहत कार्य अधूरे

Sun, 03 Jul 2022 01:45 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Sun, 03 Jul 2022 01:45 AM IST
विज्ञापन
rain brings difficulties, flood hit again for villagers
तंबौर/सीतापुर। गांजरी इलाके में हर साल आने वाली बाढ़ से बचाने के लिए इस समय लहरपुर व बिसवां तहसील में तीन बाढ़ राहत परियोजनाएं चल रही है। इन परियोजनाओं का अभी आधा अधूरा काम ही हो सका है। मानसून आने के बाद से प्रदेश में बरसात शुरू हो गई है, नदियों का जलस्तर बढ़ने लगा है।
विज्ञापन

इसकी वजह से ग्रामीण दहशत आने वाले दिनों में बाढ़ को लेकर दहशत में है। अफसरों ने 30 जून तक हर हाल में काम पूर्ण करने के निर्देश दिए थे। जून बीत गया, लेकिन काम पूर्ण नहीं हो पाया है। हालात यह है अगर इस समय नदियों का जलस्तर बढ़ जाए तो ग्रामीणों को बाढ़ से कोई नहीं बचा सकता है।
विज्ञापन

लहरपुर व बिसवां तहसील में पडने वाले शारदा नदी के किनारे बसे गांवों को बाढ़ व कटान से मुक्ति दिलाने के लिये सिंचाई विभाग द्वारा तीन परियोजनाओं पर काम चल रहा है। तटवर्ती गांवों के बाशिंदों को उम्मीद थी कि समय रहते अगर यह पूर्ण हो जाएंगी तो उन्हें बाढ़ व कटान का दंश नहीं झेलना पड़ेगा।
विज्ञापन
विज्ञापन

बिसवां तहसील में पड़ने वाली परियोजना से बढ़ईनपुरवा, शेखूपर, पसियनपुरवा, कालेपुरवा व बढ़ईडीह को कटान व बाढ़ से बचाने के लिये 945 मीटर दूरी में 21 स्टड बनाकर परकुपाईन लगाते हुए बंधे के स्लोप व ऊपर बोरियों में बालू भरकर लगाना था। लेकिन अभी तक न तो परकुपाईन में झाड़ झंखाड़ भरा गया और न ही बंधे के ऊपर बालू भरकर बोरियां लगीं है।
इसी तहसील में पड़ने वाली रतनगंज परियोजना में भी परकुपाईन में भरने के अलावा कई स्थानों पर बंधे के स्लोप में बालू भरी बोरियों से रोक न बनाने के कारण कटान का डर बना हुआ है। बढ़हीडीह परियोजना का 11 जून को कैबिनेट मंत्री सूर्यप्रताप शाही व रतनगंज का सांसद राजेश वर्मा व जिलाधिकारी ने मौके पर जाकर निरीक्षण भी किया था।
तीसरी परियोजना लहरपुर तहसील के तहत बरक्षता, बरेला, लीलापुरवा व हनुमान सिंहपुरवा को कटान व बाढ़ से संचालित 570 लाख की करीब 900 मीटर परियोजना आधी ही बन पाई है। योजना में शामिल 29 स्टडों में केवल 17 स्टड ही पूरे हो पाए, जबकि कटान से बचाव के लिये बने परकुपाईन में कुछ नहीं भरा गया है। स्लोप व बंधे पर पानी को रोक के लिए लगाई जाने वाली बोरियां तमाम जगहों पर लगना बाकी हैं।

नदी में बढ़ते जलस्तर को देखते हुए बरक्षता के तमाम ग्रामीणों ने चार दिन पहले धीमे चल रहे कार्य पर आक्रोश व्यक्त किया था। उनका कहना था कि जिस रफ्तार से काम चल रहा है, वह इस बरसात से पूर्व पूरा होना संभव नहीं दिख रहा है। यह सभी काम 30 जून तक पूर्ण करने की समय सीमा तय की गई थी। बावजूद इसके यह परियोजनाएं आधी अधूरी ही पड़ी हुई है। इससे इस बार भी बाढ़ का कहर झेलना पड़ सकता है।
---
फिलहाल सुरक्षित हैं परियोजनाएं
बाढ़ राहत की चल रही परियोजनाएं सुरक्षित स्तर तक पहुंच गई है। कहीं पर भी कोई दिक्कत नहीं है। बजट न होने के बावजूद बेहतर तरीके से काम कराया जा रहा है।
- विशाल पोरवाल, अधिशाषी अभियंता सिंचाई विभाग
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed