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Sitapur News: जीरामजी के विरोध में थाली बजाकर किया प्रदर्शन
Wed, 14 Jan 2026 12:51 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
Updated Wed, 14 Jan 2026 12:51 AM IST
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प्रदर्शन करतीं महिलाएं।
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सीतापुर। संगतिन किसान मजदूर संगठन (एसकेएमएस) की ओर से मनरेगा के नए कानून जीरामजी के विरोध में कई ब्लॉकों में थाली बजाकर विरोध प्रदर्शन किया गया। ग्रामीणों ने रैली भी निकाली। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि मनरेगा के नए कानून को वापस लेकर मजदूरों के हित में पुराने स्वरूप में मनरेगा नहीं चलाया गया तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।
एसकेएमएस के आह्वान पर मंगलवार को ब्लाॅक मिश्रिख, मछरेहटा, गोंदलामऊ, पिसावां, महोली, एलिया, हरगांव, खैराबाद, परसेंडी के सैकड़ो गांवों के मजदूरों ने नए कानून विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार आजीविका मिशन ग्रामीण के विरोध में रैली निकाली। थाली बजाकर विरोध जताया।
इस दौरान हमारी थाली खाली है के नारे गांव-गांव में गूंज उठे। एसकेएमएस की ओर से मनरेगा बचाओ अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान के 13वें दिन मंगलवार को थाली बजाकर विरोध जताया गया। प्रदर्शन कारियों के मुताबिक मजदूरों की जिंदगी को बेहतर करने में मनरेगा की बड़ी भूमिका है। लेकिन नए कानून के माध्यम से मनरेगा के मूल स्वरूप को कमजोर किया जा रहा है।
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मनरेगा में काम की मांग करने के साथ ही काम का मिलना मजदूर का अधिकार हो जाता था जो अब नहीं रहेगा। पहले मनरेगा में 100 दिन के काम की गारंटी थी। नए कानून में 125 दिन काम देने का वादा किया जा रहा है।
अब मनरेगा में काम कहां चलेगा यह अधिकार केंद्र सरकार के पास होगा जबकि पहले हमारी ग्राम पंचायत योजना निर्माण में अपनी भूमिका निभाती थी। पहले मजदूरी का पूरा खर्च केंद्र सरकार उठाती थी और अब इसका 40 प्रतिशत राज्यों को उठाना होगा। अगर राज्य नहीं उठा पाता है तो काम नहीं मिलेगा।
इस कानून से गरीब, मजदूर, महिलाएं और सीमांत कृषक बुरी तरह प्रभावित होंगे। प्रदर्शन में जगन्नाथ, सुरेन्द्र, जमुना, रोशन लाल, सुधीर, पप्पू, राजाराम, रामदेवी, राजेश, कमला, रामबेटी, नीतू, सीता, कलावती आदि शामिल रहीं।
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एसकेएमएस के आह्वान पर मंगलवार को ब्लाॅक मिश्रिख, मछरेहटा, गोंदलामऊ, पिसावां, महोली, एलिया, हरगांव, खैराबाद, परसेंडी के सैकड़ो गांवों के मजदूरों ने नए कानून विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार आजीविका मिशन ग्रामीण के विरोध में रैली निकाली। थाली बजाकर विरोध जताया।
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इस दौरान हमारी थाली खाली है के नारे गांव-गांव में गूंज उठे। एसकेएमएस की ओर से मनरेगा बचाओ अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान के 13वें दिन मंगलवार को थाली बजाकर विरोध जताया गया। प्रदर्शन कारियों के मुताबिक मजदूरों की जिंदगी को बेहतर करने में मनरेगा की बड़ी भूमिका है। लेकिन नए कानून के माध्यम से मनरेगा के मूल स्वरूप को कमजोर किया जा रहा है।
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मनरेगा में काम की मांग करने के साथ ही काम का मिलना मजदूर का अधिकार हो जाता था जो अब नहीं रहेगा। पहले मनरेगा में 100 दिन के काम की गारंटी थी। नए कानून में 125 दिन काम देने का वादा किया जा रहा है।
अब मनरेगा में काम कहां चलेगा यह अधिकार केंद्र सरकार के पास होगा जबकि पहले हमारी ग्राम पंचायत योजना निर्माण में अपनी भूमिका निभाती थी। पहले मजदूरी का पूरा खर्च केंद्र सरकार उठाती थी और अब इसका 40 प्रतिशत राज्यों को उठाना होगा। अगर राज्य नहीं उठा पाता है तो काम नहीं मिलेगा।
इस कानून से गरीब, मजदूर, महिलाएं और सीमांत कृषक बुरी तरह प्रभावित होंगे। प्रदर्शन में जगन्नाथ, सुरेन्द्र, जमुना, रोशन लाल, सुधीर, पप्पू, राजाराम, रामदेवी, राजेश, कमला, रामबेटी, नीतू, सीता, कलावती आदि शामिल रहीं।