फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Sitapur News ›   Prisoners will save the environment by making incense sticks from flowers

Sitapur News: फूलों से अगरबत्तियां बनाकर पर्यावरण बचाएंगे बंदी

Fri, 07 Jun 2024 08:52 PM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर Updated Fri, 07 Jun 2024 08:52 PM IST
विज्ञापन
Prisoners will save the environment by making incense sticks from flowers
सीतापुर। जेल में बंद कैदी अब फूलों से अगरबत्ती बनाकर पर्यावरण को बचाएंगे। ललिता देवी मंदिर में चढ़े हुए फूलों से सुगंधित धूपबत्ती और अगरबत्ती तैयारी की जाएगी। पर्यावरण को बचाने के लिए सीमैप और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ने यह पहल की है। केंद्रीय औषधीय एवं सघन पौधा संस्थान (सीमैप) बंदियों को तकनीकी सहायता आदि प्रदान करेगा।
विज्ञापन

सीमैप के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. रमेश श्रीवास्तव ने बताया कि मंदिर में चढ़ाने के बाद फूल सूख जाते हैं। इसके बाद पुजारी इन फूलों को नदी-नालों में फेंक देेते हैंं। ऐसे में फूल सड़ते हैं। पानी में पड़े रहने से वह ऑक्सीजन खींचकर पर्यावरण को नुकसान पहुंचाते हैं। फूलों के बेहतर इस्तेमाल के लिए अब इनसे धूपबत्ती व अगरबत्ती बनाई जाएगी।
विज्ञापन

बताया कि जेल में बंद महिला कैदियों को धूपबत्ती बनाने का हुनर सिखाया जाएगा। जब वह जेल से छूटकर बाहर जाएंगी, तो हो सकता है कि समाज उनके साथ पहले जैसा बर्ताव न करे। वह खुद आत्मनिर्भर हों इसलिए यह कदम उठाया गया है। जो महिला बंदी जितना उत्पाद बनाएंगी उनको उस हिसाब से रुपये भी दिए जाएंगे। पुरुष बंदी भी यह काम कर सकते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

डॉ. रमेश ने बताया कि अगरबत्ती व धूपबत्ती बनाने के लिए एक दिन का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इस दौरान मास्टर ट्रेनर बनाया जाएगा, जो कि अन्य लोगों को सिखाएगा। संस्थान किसी भी फॉर्मूला को बताने के लिए पांच लाख रुपये लेता है, लेकिन जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सहयोग से यह प्रशिक्षण निशुल्क दिया जाएगा।
फूल लाने से अगरबत्ती बेचने तक का काम नैमिष की ही किसी संस्था को दिया जाएगा। बंदी सिर्फ निर्माण करेंगे। अपर जिला जज व प्राधिकरण सचिव नरेंद्र नाथ त्रिपाठी ने बताया कि बंदियों को सबल बनाने में यह योजना कारगर साबित होगी।


गोरखपुर जेल से हुई शुरुआत
सीमैप के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. रमेश श्रीवास्तव ने बताया कि संस्थान ने लखनऊ, अयोध्या, लखीमपुर व गोरखपुर जेल में कार्यक्रम किए हैं। गोरखपुर से इसकी शुरुआत हुई थी। सीएम योगी आदित्यनाथ ने इसका उद्घाटन किया था। देश के बड़े मंदिर जैसे मां वैष्णो देवी, महाकालेश्वर, अयोध्या आदि से भी फूलों को लाया जाएगा, क्योंकि यहां भारी मात्रा में फूल चढ़ते हैं।

2010 से चल रहा काम
सीमैप वर्ष 2010 से यह काम कर रहा है। अगरबत्ती बनाने के लिए फूल का पाउडर, जिगर (एक पेड़) का पाउडर, लकड़ी का पाउडर, एक किलो में 600 ग्राम फूल पाउडर, 200 ग्राम जिगर पाउडर व 200 ग्राम लकड़ी पाउडर पड़ेगा। अगरबत्ती सूखने के बाद उसे खुशबू में डाला जाएगा। खास बात यह है कि इसमें कोयला नहीं होगा, जिससे पर्यावरण को नुकसान नहीं होगा।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed