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44 माह से मानदेय के लिए भटक रहे प्रेरक
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सीतापुर। साक्षर भारत मिशन योजना को सफल बनाने वाले शिक्षा प्रेरक बकाया मानदेय पाने के लिए जूझ रहे हैं। इन्हें करीब 44 माह से मानदेय नहीं मिला है लेकिन इनकी सुनवाई कहीं न हो रही है।
गौरतलब है कि 15 साल से ऊपर के निरक्षरों को साक्षर करने के लिए केंद्र सरकार की तरफ से साक्षर भारत मिशन योजना शुरू हुई थी। इस योजना के तहत प्रत्येक ग्राम पंचायत में दो प्रेरक रखे गए थे।
इन्हें दो हजार रुपये प्रतिमाह मानदेय मिलता था। तीन साल तक यह योजना चली। 31 मार्च 2018 को इस योजना के क्रियान्वयन पर रोक लगा दी गई थी। जब योजना बंद हुई तो उस समय प्रेरकों का करीब 44 माह का मानदेय बकाया था।
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मानदेय दिलाने के लिए प्रेरकों ने दिल्ली तक आवाज बुलंद की। जनप्रतिनिधियों से लेकर अफसरों तक से गुहार लगाई लेकिन न तो अफसर और न जनप्रतिनिधि ही मानदेय दिला सके।
अब हालात ये हैं कि प्रेरकों के लिए बेसिक शिक्षा विभाग के पास कोई भी बजट नहीं है। जब भी प्रेरक फरियाद करते हैं तो जिम्मेदार बजट न होने की बात कहकर उनको शांत करा देते है।
नहीं मिला भुगतान
जिले में साक्षर भारत मिशन योजना करीब तीन साल तक सफलतापूर्वक संचालित की गई। इन तीन सालो में कभी भी प्रेरकों को प्रतिमाह भुगतान नहीं मिला। अगर मिला तो वह भी पांच माह से अधिक का कभी नहीं रहा। इससे इनका बकाया बढ़ता गया।
भेज दी है सूचना
जिले में एक प्रेरक का करीब 44 माह के मानदेय का औसत आ रहा है। सभी प्रेरकों के बकाया मानदेय की सूचना सूची सहित शासन को उपलब्ध कराई जा चुकी है। बजट आने पर ही इन्हें मानदेय दिया जाएगा।
-अजय कुमार, बीएसए
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गौरतलब है कि 15 साल से ऊपर के निरक्षरों को साक्षर करने के लिए केंद्र सरकार की तरफ से साक्षर भारत मिशन योजना शुरू हुई थी। इस योजना के तहत प्रत्येक ग्राम पंचायत में दो प्रेरक रखे गए थे।
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इन्हें दो हजार रुपये प्रतिमाह मानदेय मिलता था। तीन साल तक यह योजना चली। 31 मार्च 2018 को इस योजना के क्रियान्वयन पर रोक लगा दी गई थी। जब योजना बंद हुई तो उस समय प्रेरकों का करीब 44 माह का मानदेय बकाया था।
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मानदेय दिलाने के लिए प्रेरकों ने दिल्ली तक आवाज बुलंद की। जनप्रतिनिधियों से लेकर अफसरों तक से गुहार लगाई लेकिन न तो अफसर और न जनप्रतिनिधि ही मानदेय दिला सके।
अब हालात ये हैं कि प्रेरकों के लिए बेसिक शिक्षा विभाग के पास कोई भी बजट नहीं है। जब भी प्रेरक फरियाद करते हैं तो जिम्मेदार बजट न होने की बात कहकर उनको शांत करा देते है।
नहीं मिला भुगतान
जिले में साक्षर भारत मिशन योजना करीब तीन साल तक सफलतापूर्वक संचालित की गई। इन तीन सालो में कभी भी प्रेरकों को प्रतिमाह भुगतान नहीं मिला। अगर मिला तो वह भी पांच माह से अधिक का कभी नहीं रहा। इससे इनका बकाया बढ़ता गया।
भेज दी है सूचना
जिले में एक प्रेरक का करीब 44 माह के मानदेय का औसत आ रहा है। सभी प्रेरकों के बकाया मानदेय की सूचना सूची सहित शासन को उपलब्ध कराई जा चुकी है। बजट आने पर ही इन्हें मानदेय दिया जाएगा।
-अजय कुमार, बीएसए