{"_id":"617d95975009ff40a678c826","slug":"police-sitapur-news-lko6025148177","type":"story","status":"publish","title_hn":"मुठभेड़ में इनामी बदमाश गिरफ्तार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मुठभेड़ में इनामी बदमाश गिरफ्तार
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सीतापुर में कोर्ट में सजा के बाद आरोपी को लेकर जाती पुलिस। - संवाद
- फोटो : SITAPUR
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सीतापुर। मछरेहटा इलाके में 12 साल पहले एक शिक्षिका के साथ दुष्कर्म के बाद हत्या के सनसनीखेज मामले में न्यायालय ने शनिवार को एक आरोपी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। उस पर 50 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है।
बेसिक शिक्षा विभाग के मछरेहटा विकासखंड के एक प्राथमिक विद्यालय में तैनात शिक्षिका का शव 10 सितंबर 2009 को एक गन्ने के खेत में मिला था। उसकी गला घोंटकर संदिग्ध परिस्थितियों में हत्या करने की रिपोर्ट उसी दिन उसके पति ने दर्ज कराई थी। प्रथम सूचना रिपोर्ट में शिक्षिका के पति ने बताया था कि सुबह दोनो पति-पत्नी लखनऊ से विद्यालय के लिए ट्रेन से निकले थे।
पति भी सीतापुर के एक प्राथमिक स्कूल में शिक्षक के रूप में तैनात था। वह सिधौली से अपने विद्यालय चला गया था। जबकि शिक्षिका खैराबाद में उतरकर अपने स्कूल जाने के लिए मछरेहटा निकली थी। सुबह 7:10 बजे अंतिम बार पत्नी से बात करने व 10 बजे फोन मिलाने पर फोन रिसीव न होने से किसी अनहोनी की आशंका के चलते पति ने विद्यालय के प्रधानाचार्य को फोन किया। इसके बाद शिक्षिका की तलाश शुरू हुई। उसका मृत शरीर गन्ने के खेत में पड़ा मिला।
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इस मामले में विवेचना करते हुए पुलिस ने ग्राम राजपुर खर्ग निवासी सुरेश उर्फ बाबा उर्फ चैंपियन को गिरफ्तार किया। जांच के बाद दुष्कर्म व हत्या का आरोप लगाते हुए पुलिस ने उसके विरुद्ध न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया। चैंपियन को उसकी फरारी के दौरान संरक्षण देने वाले उसके चार रिश्तेदार राजकुमार, रामशंकर, पप्पू व चिरंजीव के विरुद्ध भी पुलिस ने न्यायालय में आरोप पत्र प्रस्तुत किया।
न्यायालय में अभियोजन पक्ष की ओर से 14 साक्षी पेश किए गए। हालांकि, कुछ साक्षियों ने अभियोजन कथानक का समर्थन नहीं किया। फिर भी पत्रावली पर आए कुल साक्ष्य में से अधिकतर अभियुक्त के खिलाफ होने पर न्यायालय ने उसे दोषी करार दिया और आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। इस मामले में न्यायालय ने अन्य चार आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया है।
अपर सत्र न्यायाधीश अभिषेक उपाध्याय द्वारा दिए इस निर्णय में अभियोजन पक्ष की ओर से पैरवी सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता संदीप कुमार त्रिपाठी ने की।
कई दिनों तक शिक्षकों ने किया था आंदोलन
2009 में शिक्षिका हत्याकांड मामले ने सीतापुर की छवि को पूरे प्रदेश में खराब किया था। कई दिनों तक प्राथमिक शिक्षक संघ के बैनर तले शिक्षक आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए आंदोलनरत रहे थे। जिला मुख्यालय पर लालबाग चौराहे पर जुलूस निकालकर रास्ता जाम करने, मुख्यमंत्री को ज्ञापन देने व गिरफ्तारी न होने तक शिक्षक शिक्षण कार्य से विरत रहने के शिक्षक संघ के निर्णय के बाद न सिर्फ जिला बल्कि प्रदेश में बैठे हुक्मरान तक इस मामले को लेकर गंभीर हुए थे। तब पुलिस ने इस घटना के खुलासे के लिए कई टीमें लगाकर आरोपियों को गिरफ्तार किया था।
शिक्षिका का मोबाइल बना अहम सुराग
आरोपी को अभियोजन ने अपने मुकदमे में शातिर बताते हुए पेश किया। शातिर अपराधी चैंपियन की एक गलती इस पूरे मामले में खुद ही उसके गले की हड्डी बन गई। अभियोजन के अनुसार शिक्षिका का मोबाइल उसे आरोपी सुरेश की निशानदेही पर ही मिला। जिसे आरोपी शिक्षिका की गला घोंटकर हत्या किए जाने के बाद अपने साथ ले गया था।
मोबाइल में उसने अपना सिम डालकर उसका इस्तेमाल भी किया। बस आरोपी की यही गलती उसके लिए काल साबित हुई। मोबाइल के आईईएमआई नंबर के जरिये वह पुलिस द्वारा निकाली गई सीडीआर से पकड़ में आ गया। न्यायालय ने अपने निर्णय में इस तथ्य को काफी प्रमुखता से उठाते हुए कहा कि यह एक ऐसा बिंदु है, जिस पर बचाव पक्ष कोई सार्थक जवाब नहीं दे पाया।
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बेसिक शिक्षा विभाग के मछरेहटा विकासखंड के एक प्राथमिक विद्यालय में तैनात शिक्षिका का शव 10 सितंबर 2009 को एक गन्ने के खेत में मिला था। उसकी गला घोंटकर संदिग्ध परिस्थितियों में हत्या करने की रिपोर्ट उसी दिन उसके पति ने दर्ज कराई थी। प्रथम सूचना रिपोर्ट में शिक्षिका के पति ने बताया था कि सुबह दोनो पति-पत्नी लखनऊ से विद्यालय के लिए ट्रेन से निकले थे।
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पति भी सीतापुर के एक प्राथमिक स्कूल में शिक्षक के रूप में तैनात था। वह सिधौली से अपने विद्यालय चला गया था। जबकि शिक्षिका खैराबाद में उतरकर अपने स्कूल जाने के लिए मछरेहटा निकली थी। सुबह 7:10 बजे अंतिम बार पत्नी से बात करने व 10 बजे फोन मिलाने पर फोन रिसीव न होने से किसी अनहोनी की आशंका के चलते पति ने विद्यालय के प्रधानाचार्य को फोन किया। इसके बाद शिक्षिका की तलाश शुरू हुई। उसका मृत शरीर गन्ने के खेत में पड़ा मिला।
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इस मामले में विवेचना करते हुए पुलिस ने ग्राम राजपुर खर्ग निवासी सुरेश उर्फ बाबा उर्फ चैंपियन को गिरफ्तार किया। जांच के बाद दुष्कर्म व हत्या का आरोप लगाते हुए पुलिस ने उसके विरुद्ध न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया। चैंपियन को उसकी फरारी के दौरान संरक्षण देने वाले उसके चार रिश्तेदार राजकुमार, रामशंकर, पप्पू व चिरंजीव के विरुद्ध भी पुलिस ने न्यायालय में आरोप पत्र प्रस्तुत किया।
न्यायालय में अभियोजन पक्ष की ओर से 14 साक्षी पेश किए गए। हालांकि, कुछ साक्षियों ने अभियोजन कथानक का समर्थन नहीं किया। फिर भी पत्रावली पर आए कुल साक्ष्य में से अधिकतर अभियुक्त के खिलाफ होने पर न्यायालय ने उसे दोषी करार दिया और आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। इस मामले में न्यायालय ने अन्य चार आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया है।
अपर सत्र न्यायाधीश अभिषेक उपाध्याय द्वारा दिए इस निर्णय में अभियोजन पक्ष की ओर से पैरवी सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता संदीप कुमार त्रिपाठी ने की।
कई दिनों तक शिक्षकों ने किया था आंदोलन
2009 में शिक्षिका हत्याकांड मामले ने सीतापुर की छवि को पूरे प्रदेश में खराब किया था। कई दिनों तक प्राथमिक शिक्षक संघ के बैनर तले शिक्षक आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए आंदोलनरत रहे थे। जिला मुख्यालय पर लालबाग चौराहे पर जुलूस निकालकर रास्ता जाम करने, मुख्यमंत्री को ज्ञापन देने व गिरफ्तारी न होने तक शिक्षक शिक्षण कार्य से विरत रहने के शिक्षक संघ के निर्णय के बाद न सिर्फ जिला बल्कि प्रदेश में बैठे हुक्मरान तक इस मामले को लेकर गंभीर हुए थे। तब पुलिस ने इस घटना के खुलासे के लिए कई टीमें लगाकर आरोपियों को गिरफ्तार किया था।
शिक्षिका का मोबाइल बना अहम सुराग
आरोपी को अभियोजन ने अपने मुकदमे में शातिर बताते हुए पेश किया। शातिर अपराधी चैंपियन की एक गलती इस पूरे मामले में खुद ही उसके गले की हड्डी बन गई। अभियोजन के अनुसार शिक्षिका का मोबाइल उसे आरोपी सुरेश की निशानदेही पर ही मिला। जिसे आरोपी शिक्षिका की गला घोंटकर हत्या किए जाने के बाद अपने साथ ले गया था।
मोबाइल में उसने अपना सिम डालकर उसका इस्तेमाल भी किया। बस आरोपी की यही गलती उसके लिए काल साबित हुई। मोबाइल के आईईएमआई नंबर के जरिये वह पुलिस द्वारा निकाली गई सीडीआर से पकड़ में आ गया। न्यायालय ने अपने निर्णय में इस तथ्य को काफी प्रमुखता से उठाते हुए कहा कि यह एक ऐसा बिंदु है, जिस पर बचाव पक्ष कोई सार्थक जवाब नहीं दे पाया।