फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Sitapur News ›   planning better but disccompline

योजना तो बढ़िया मगर अमल नहीं

Wed, 05 Apr 2017 10:55 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Updated Wed, 05 Apr 2017 10:55 PM IST
विज्ञापन
planning better but disccompline

प्रदेश सरकार ने किसानों का गेहूं शत प्रतिशत खरीदने के लिए खरीद का लक्ष्य बढ़ा दिया है। वहीं किसानों को उचित मूल्य मिल सके, इसको लेकर गेहूं की कीमत भी बढ़ाई है। इतना ही नहीं किसानों को अनाज क्रय केंद्र तक ले जाने में कोई दिक्कत न हो। उसको लेकर अनाज की ढुलाई भी सरकार देगी।

विज्ञापन


सरकार को उम्मीद है कि इस योजना से किसानों को काफी लाभ मिलेगा। वहीं किसानों को इस योजना के शत प्रतिशत अमल होने पर संदेह है। वजह साफ है, कि अब तक सरकारी गेहूं खरीद योजना में जिम्मेदार लक्ष्य पूरा नहीं कर पाये हैं। सरकार की गेहूं खरीद योजना के तहत जिले भर में 71 क्रय केंद्र खोले गए हैं।
विज्ञापन


इन्हीं केंद्रों पर 1,625 रुपये क्विंटल की दर से किसानों से गेंहू खरीदा जाना है। जिले में कुल पंद्रह लाख 50 हजार क्विंटल गेहूं खरीदने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। किसानों को सरकारी क्रय केंद्रों पर पहुंचने में किसी भी तरह की दिक्कत न हो, इसको लेकर किसान को 10 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से अतिरिक्त भुगतान किया जाएगा। गेहूं खरीद योजना में बिचौलिए हावी न होने पाए, इसके तहत सरकार गेहूं खरीद का सारा भुगतान सीधे किसान के खाते में कर रही है।
विज्ञापन
विज्ञापन


सरकार की गेहूं खरीद योजना को लेकर इस बार किसान प्रसन्न हैं, लेकिन उन्हें संदेह है कि बीते वर्षों की तरह कहीं इस बार भी किसानों को परेशान न किया जाए। जिसकी वजह से किसान को मंडी में धान बेचने के लिए मजबूर होना पड़े। किसानों का संदेह जायज भी है, क्योंकि पिछली बार वर्ष 2016 में सरकार ने गेहूं खरीद का लक्ष्य 12 लाख 35 हजार क्विंटल रखा था। जिसकी सापेक्ष जिम्मेदार किसानों से महज 3 लाख 45,800 क्विंटल ही गेहूं खरीद सके थे।

यह खरीद का 28 प्रतिशत ही था। यही वजह है कि इस बार तो लक्ष्य पहले से 3 लाख 15 हजार क्विंटल बढ़कर आया है। ऐसे में लक्ष्य कैसे पूरा हो सकेगा। किसानों का कहना है कि अभी तक क्रय केंद्रों पर मानक को लेकर किसानों को इस कदर परेशान कर दिया जाता था, कि वे मंडी में कम दामों पर अनाज बेचने के लिए मजबूर हो जाते थे।


हालांकि जिम्मेदारों का अलग ही तर्क है। उनका कहना है कि वर्ष 2016 में सरकार द्वारा तय किया गया गेहूं का मूल्य बेहद कम था। जबकि खुले बाजार में उसका मूल्य अधिक था। यही वजह है कि किसानों ने सरकारी क्रय केंद्रों पर गेहूं खरीदने की बजाय, बाजार में बेचना बेहतर समझा।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed