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पानी में डूबी एक हजार बीघा फसल
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रामपुर मथुरा (सीतापुर)। रामपुर मथुरा में उफनाई शारदा व सरयू नदी ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया है। बेमौसम बरसात व बैराजों से छोड़े जाने वाले पानी ने सालभर की मेहनत को एक झटके में पानी में बहाकर रख दिया है। जून व जुलाई में तैयार होने वाली फसल इस बार पकने से पहले ही बहकर चली गई। किसानों को मुनाफा तो दूर की बात अब उनकी लागत भी नहीं निकल पा रही है। करीब एक हजार बीघा फसल पानी में डूब गई है। खेत में हर तरफ पानी ही पानी है।
रामपुर मथुरा क्षेत्र में शारदा व सरयू नदी बहती है। नदी की तलहटी में किसानों ने तरबूज, खरबूजा, ककड़ी व मेंथा की फसल की बुआई की थी। किसानों का कहना है कि यह फसल जून व जुलाई में पककर तैयार हो जाती थी। इससे घर का खर्चा चलाते थे। जून के प्रथम सप्ताह में मेंथा की फसल तैयार हो रही थी। अब फसल की पेराई होना बाकी थी।
लेकिन इस बार बेमौसम बरसात व नदियों में अचानक जलस्तर बढ़ने से फसल चौपट हो गई है। पानी आने से पूरी फसल डूब गई है। इससे किसानों की मेहनत एक ही झटके में पानी में बह गई है। मेहनत करके जब फसल का उत्पादन करने का लाभ मिलने का मौका आया तो किसानों के अरमानों पर पानी फिर गया। अब किसान फसल डूबने से परेशान हैं। किसानों का कहना है कि अब वे सरकार की तरफ मुआवजा की आस लगाए है। वरना अब खाने के लाले पड़ जाएंगे। क्षेत्र के 150 से अधिक किसान प्रभावित हुए है।
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अब किसानों को मुआवजे आस
रामपुर मथुरा विकासखंड के तुलसीपुर निवासी अशोक कुमार ने बताया कि करीब दो बीघा तरबूज की खेती की थी। लेकिन अधिक बरसात और नदी में जल्द पानी आने से फसल डूब गई। इससे काफी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है। रामपुर मथुरा के पंडितपुरवा निवासी बाबूराम ने बताया कि 10 बीघा में तरबूज व खरबूजा की फसल बोई थी।
नदी में जलस्तर बढ़ने से फसल खराब हो गई। अब मुनाफा तो दूर लागत भी नहीं निकल रही है। इससे काफी आर्थिक समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। रामपुर मथुरा के अंगरौरा निवासी सत्यनारायण ने बताया कि नदी के किनारे करीब पांच बीघे मेंथा फसल लगाई थी। जल्दी जलस्तर बढ़ने के कारण डूब गई। रामखेलावन निवासी बंगालीपुरवा ने बताया कि पांच बीघे खरबूजा की फसल नदी में जल्द पानी आने के कारण बर्बाद हो गई। पिछले बरस नदी में काफी देर से पानी आया था। इसकी वजह से कुछ कमाई कर ली थी। इस बार यह कमाई पानी में चली गई है।
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रामपुर मथुरा क्षेत्र में शारदा व सरयू नदी बहती है। नदी की तलहटी में किसानों ने तरबूज, खरबूजा, ककड़ी व मेंथा की फसल की बुआई की थी। किसानों का कहना है कि यह फसल जून व जुलाई में पककर तैयार हो जाती थी। इससे घर का खर्चा चलाते थे। जून के प्रथम सप्ताह में मेंथा की फसल तैयार हो रही थी। अब फसल की पेराई होना बाकी थी।
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लेकिन इस बार बेमौसम बरसात व नदियों में अचानक जलस्तर बढ़ने से फसल चौपट हो गई है। पानी आने से पूरी फसल डूब गई है। इससे किसानों की मेहनत एक ही झटके में पानी में बह गई है। मेहनत करके जब फसल का उत्पादन करने का लाभ मिलने का मौका आया तो किसानों के अरमानों पर पानी फिर गया। अब किसान फसल डूबने से परेशान हैं। किसानों का कहना है कि अब वे सरकार की तरफ मुआवजा की आस लगाए है। वरना अब खाने के लाले पड़ जाएंगे। क्षेत्र के 150 से अधिक किसान प्रभावित हुए है।
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अब किसानों को मुआवजे आस
रामपुर मथुरा विकासखंड के तुलसीपुर निवासी अशोक कुमार ने बताया कि करीब दो बीघा तरबूज की खेती की थी। लेकिन अधिक बरसात और नदी में जल्द पानी आने से फसल डूब गई। इससे काफी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है। रामपुर मथुरा के पंडितपुरवा निवासी बाबूराम ने बताया कि 10 बीघा में तरबूज व खरबूजा की फसल बोई थी।
नदी में जलस्तर बढ़ने से फसल खराब हो गई। अब मुनाफा तो दूर लागत भी नहीं निकल रही है। इससे काफी आर्थिक समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। रामपुर मथुरा के अंगरौरा निवासी सत्यनारायण ने बताया कि नदी के किनारे करीब पांच बीघे मेंथा फसल लगाई थी। जल्दी जलस्तर बढ़ने के कारण डूब गई। रामखेलावन निवासी बंगालीपुरवा ने बताया कि पांच बीघे खरबूजा की फसल नदी में जल्द पानी आने के कारण बर्बाद हो गई। पिछले बरस नदी में काफी देर से पानी आया था। इसकी वजह से कुछ कमाई कर ली थी। इस बार यह कमाई पानी में चली गई है।