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नोटबंदी से गई एक और जान

Fri, 09 Dec 2016 10:40 PM IST
Amarujala Bureau
Amarujala Bureau Updated Fri, 09 Dec 2016 10:40 PM IST
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One dies in cash crunch
पुराने नोटों का जखीरा बरामद

करेंसी की किल्लत से अब लोगों की जान पर बन आ रही है। बैंक से भुगतान न होने पर एक युवक अपनी मां की दवा नहीं खरीद सका। इलाज के अभाव में महिला ने दम तोड़ दिया। बेटे ने बैंक प्रबंधन व कर्मियों पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए प्रधानमंत्री व डीएम को पत्र लिखकर मामले की शिकायत की है। इस जिले में नोटबंदी की वजह से यह तीसरी मौत है। इससे पहले गुरुवार को दो ग्रामीणों की जान जा चुकी है। 

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रामकोट के इमलिया सरांय भांट निवासी उदरेश सिंह की मां मुन्नी देवी बीमार थी। डॉक्टरों ने उसे लखनऊ मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया था। उदरेश सिंह का कहना है कि वहां पर डॉक्टरों ने दवाएं बाहर से लिखीं, लेकिन रुपये न होने के कारण वह दवा नहीं खरीद सका। उदरेश की मानें तो उसकी पत्नी उमा सिंह का खाता इलाहाबाद यूपी ग्रामीण बैंक रायपुर में है।
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पत्नी कई दिनों से इलाज की खातिर रुपये निकालने के लिए बैंक के चक्कर लगाती रहीं, लेकिन बैंक ने उसे भुगतान नहीं किया। पत्नी ने इलाज की खातिर रुपये निकालने की बात भी की लेकिन बैंक मैनेजर ने ध्यान नहीं दिया।
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पैसा न होने से दवा नहीं खरीद पाया और मां ने इलाज के अभाव में दम तोड़ दिया। उदरेश ने इस संबंध में प्रधानमंत्री व जिलाधिकारी को पत्र लिखकर शिकायत की है। उसने आरोप लगाया कि यदि बैंक समय पर भुगतान कर देती तो उसकी मां की जान बच सकती थी। 

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