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अब बिजली बिल वसूलने घर-घर जाएंगी समूह की दीदी

Sun, 21 Feb 2021 11:38 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Sun, 21 Feb 2021 11:38 PM IST
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Now the sister of the group will go door to door to collect electricity bill
सीतापुर। महिलाएं अब किसी भी क्षेत्र में पुरुषों से पीछे नहीं हैं। हर जगह वह अपना परचम फहरा रही हैं। अभी तक घरों में चूल्हा-चौका और सिलाई-कढ़ाई तक सीमित रहने वाली महिलाओं के जज्बे और हौसले की वजह से उन्हें आत्मनिर्भर बनने की दिशा एक सराहनीय कदम उठाया गया है। अब स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाओं ने जिले के बिजली विभाग को घाटे से उबारने के लिए पतवार संभाल ली है। समूह की ये दीदियां अब गांवों में घर-घर जाकर बिजली बिल वसूलकर विभाग का राजस्व बढ़ाने के साथ रोजगार बढ़ाकर स्वावलंबी भी बनेंगी।
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दरअसल, बिजली विभाग बकाया वसूलने के लिए शहर में अभियान चलाकर कार्रवाई करता है, लेकिन ग्रामीण इलाकों में ऐसा नहीं हो पाता है। समय से लोग बिजली का बिल नहीं भरते हैं, इससे विभाग घाटे में चला जाता है। यही वजह है कि, पावर कॉर्पोरेशन को घाटे से उबारने के लिए राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन और विद्युत विभाग के बीच अनुबंध हुआ है। इसके तहत गांवों में संचालित स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाओं को ग्रामीण कनेक्शन धारकों से बिजली बिल वसूलने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। जिले में मंगलवार से ये नई व्यवस्था शुरू होने जा रही है।
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समूह की 22 दीदियों ने संभाली कमान
उपायुक्त स्वत: रोजगार के अनुसार, जिले में स्वयं सहायता समूह के लिए ये योजना इसी साल 2020-21 में लागू की गई है। अब तक बिसवां, महमूदाबाद, गोंदलामऊ, कसमंडा, बिसवां, हरगांव ब्लॉक से स्वयं सहायता समूह में करीब 29 सदस्यों ने इस योजना में काम करने के लिए आवेदन किए हैं, लेकिन शर्तों को अभी 22 सदस्यों ने ही पूरा किया है।
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ये होगा फायदा
जानकारों की माने तो इस योजना को लागू कर स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को जोड़कर बिजली का बकाया वसूलने के पीछे सरकार की मंशा है कि इससे एक तो महिलाएं स्वावलंबी बनेगी। महीने में अच्छी कमाई कर लेंगी, इससे वह आत्मनिर्भर बनेंगी। दूसरा बिजली विभाग का घाटा पूरा हो सकेगा। बिजली अफसरों और कर्मियों को बकाया वसूलने के लिए बार-बार गांवों को जाना नहीं पड़ेगा। ऐसा होने से पॉवर कॉर्पोरेशन के मेन पावर से लेकर भागदौड़ में आने वाले ईंधन का खर्च भी बचेगा और बैठे-बैठे बिल भी जमा होता रहेगा।
योजना में जुड़ने के लिए ये करना होगा
इस योजना से जुड़ने के लिए स्वयं सहायता समूह की दीदियों को पेटीएम की ही तरह ई-वैलेट करना होगा, जिसमें अकाउंट में 10 हजार रुपये एडवासं जमा करने होंगे। ये पैसे यूपीपीसीए की वेबसाइट के जरिए जमा होंगे। इसके लिए सीएलएफ एजेंसी के नोडल अधिकारी को पैसे की जिम्मेदारी सौंपी गई है। ये एजेंसी मछरेहटा में है।
महीने में 20 से 50 हजार तक कमा सकेंगी
जानकार बताते हैं कि इस योजना से जुड़ने वाली महिलाओं को अभी फिलहाल एक समूह की दीदी को एक हजार उपभोक्ताओं से बिजली बिल वसूलने की जिम्मेदारी दी गई है। 100 रुपये से लेकर 2000 का बिल जमा कराने पर एक उपभोक्ता के हिसाब से 20 रुपये समूह की महिलाओं को मिलेंगे। जानकार बताते हैं कि अगर महीने में एक हजार लोगों से बिल जमा कराया गया तो कम से कम 20 हजार रुपये की आमदनी दीदी को होगी। वहीं, अगर 2000 हजार से ऊपर बिल जमा कराती हैं तो वसूले गए बिल का आधा फीसदी पैसा उन्हें मिलेगा। अभी 1000 उपभोक्ताओं का ही टॉरगेट है। जानकार बताते हैं कि आने वाले दिनों में टॉरगेट 2500 तक किया जा सकता है। ऐसा होने से समूह की दीदी कम से कम महीने में 50 हजार रुपये तक कमा सकती है। एक सदस्य को पांच से सात गांव देने का प्लान है। अपने गांव जवार में रहते हुए इतनी कमाई होने से काफी संख्या में समूह के सदस्य जुड़ेंगे।

10 से 20 सदस्यों का एक समूह होता है। 22 समूह के 22 सदस्यों ने आवेदन करके इस योजना से जुड़ गए हैं। मंगलवार से जिले में ये व्यवस्था लागू होने जा रही है। 29 सदस्यों ने आवेदन किए थे, लेकिन 7 ने अभी ई-वैलेट में एडवांस नहीं जमा किया है। स्वयं सहायता समूह की इन महिलाओं का नाम समूह की दीदी है। समूह की दीदीयों के पास बिलिंग की मशीन रहेगी। उपभोक्ता से बिल का पैसा नकद लेने के बाद जैसे ही मशीन से पक्की रसीद देंगी, तत्काल इनके ई-वैलेट से उतना पैसा कट जाएगा। छह ब्लॉकों से शुरुआत होने जा रही है। पूरे जिले में ये लागू होगा।
-महेंद्र प्रताप यादव, उपायुक्त स्वत: रोजगार
5569 सदस्य हैं पूरे जिले में स्वयं सहायता समूह के
3148 सदस्य सक्रिय हैं
10 से 20 सदस्यों का होता एक समूह
01 समूह से एक ही सदस्य जुड़ेगा
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