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आठ सचिवों को कारण बताओ नोटिस
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सीतापुर। जिले के आठ सचिव को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। यह कार्रवाई शौचालय की धनराशि का दुरुपयोग पाए जाने पर की गई है। यह जांच डीसी एसबीएम ने की थी। एक दर्जन ग्रामसभाओं की जांच में धनराशि का दुरुपयोग पाए जाने पर संबंधित सचिवों पर कार्रवाई नहीं की गई।
इस मामले को लेकर ‘अमर उजाला’ ने 10 दिसम्बर के अंक में ‘ग्राम सभाओं की जांच में दोषी सचिवों पर कार्रवाई नहीं’ शीर्षक से एक खबर प्रकाशित की थी। जिले में कुल 1601 ग्राम पंचायतें हैं। यहां के बाशिंदों को खुले में शौच से मुक्ति दिलाने के लिए बेसलाइन एवं एलओबी लाभार्थियों के शौचालय बनवाने के लिए ग्राम निधि-6 के खातों में धनराशि भेजी गई थी।
इसका बड़े पैमाने पर दुरुपयोग किया गया। खातों से धनराशि निकालने के बाद भी जिम्मेदारों ने शौचालय नहीं बनवाए। ठेकेदारी प्रथा से अधोमानक शौचालय बनवाए जाने के कारण वह प्रयोग लायक नहीं हैं। अधिकांश लाभार्थियों के खाते में धनराशि नहीं दी गई। परिणाम स्वरूप बड़ी संख्या में शौचालय नहीं बने।
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जो बने हैं, वह मानकों पर नही खरे उतर रहे हैं। इससे इनके फोटो अप्रूब्ड नहीं हो सके। इसकी हकीकत जानने के लिए सीडीओ ने चार डीसी एसबीएम को खराब स्थिति वाले ब्लाकों की जांच के निर्देश दिए थे। इनकी जांच में बड़ा खुलासा हुआ।
धनराशि निकालने के बाद भी शौचालय नहीं बनवाए गए। बने हुए शौचालयों की गुणवत्ता खराब मिली। जांच रिपोर्ट के आधार पर सीडीओ ने आठ मामलों में जिला विकास अधिकारी को एवं पांच मामलों में जिला पंचायत राज अधिकारी को संबंधित सचिवों के विरुद्ध कार्रवाई के लिए पत्र भेजा था।
इन पत्रों पर निर्धारित समय में कार्रवाई नहीं की गई और न ही सीडीओ को इसकी जानकारी दी गई। इससे संबंधित सचिवों के विरुद्ध कार्रवाई नहीं हो सकी है। इस मामले को ‘अमर उजाला’ ने खबर प्रकाशित की थी। प्रकरण में जिला विकास अधिकारी राकेश कुमार पांडे ने आठ ग्राम विकास अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है।
उन्होंने ब्लॉक महोली में तैनात ग्राम विकास अधिकारी पवन जौहरी, बिसवंा के अजय कुमार शुक्ल, मनोज यादव एवं प्यारेलाल, खैराबाद के संजय प्रजापति, सेवकराम, कनक सुंदरी, सकरन के अर्पित गुप्ता से जवाब तलब किया है।
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इस मामले को लेकर ‘अमर उजाला’ ने 10 दिसम्बर के अंक में ‘ग्राम सभाओं की जांच में दोषी सचिवों पर कार्रवाई नहीं’ शीर्षक से एक खबर प्रकाशित की थी। जिले में कुल 1601 ग्राम पंचायतें हैं। यहां के बाशिंदों को खुले में शौच से मुक्ति दिलाने के लिए बेसलाइन एवं एलओबी लाभार्थियों के शौचालय बनवाने के लिए ग्राम निधि-6 के खातों में धनराशि भेजी गई थी।
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इसका बड़े पैमाने पर दुरुपयोग किया गया। खातों से धनराशि निकालने के बाद भी जिम्मेदारों ने शौचालय नहीं बनवाए। ठेकेदारी प्रथा से अधोमानक शौचालय बनवाए जाने के कारण वह प्रयोग लायक नहीं हैं। अधिकांश लाभार्थियों के खाते में धनराशि नहीं दी गई। परिणाम स्वरूप बड़ी संख्या में शौचालय नहीं बने।
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जो बने हैं, वह मानकों पर नही खरे उतर रहे हैं। इससे इनके फोटो अप्रूब्ड नहीं हो सके। इसकी हकीकत जानने के लिए सीडीओ ने चार डीसी एसबीएम को खराब स्थिति वाले ब्लाकों की जांच के निर्देश दिए थे। इनकी जांच में बड़ा खुलासा हुआ।
धनराशि निकालने के बाद भी शौचालय नहीं बनवाए गए। बने हुए शौचालयों की गुणवत्ता खराब मिली। जांच रिपोर्ट के आधार पर सीडीओ ने आठ मामलों में जिला विकास अधिकारी को एवं पांच मामलों में जिला पंचायत राज अधिकारी को संबंधित सचिवों के विरुद्ध कार्रवाई के लिए पत्र भेजा था।
इन पत्रों पर निर्धारित समय में कार्रवाई नहीं की गई और न ही सीडीओ को इसकी जानकारी दी गई। इससे संबंधित सचिवों के विरुद्ध कार्रवाई नहीं हो सकी है। इस मामले को ‘अमर उजाला’ ने खबर प्रकाशित की थी। प्रकरण में जिला विकास अधिकारी राकेश कुमार पांडे ने आठ ग्राम विकास अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है।
उन्होंने ब्लॉक महोली में तैनात ग्राम विकास अधिकारी पवन जौहरी, बिसवंा के अजय कुमार शुक्ल, मनोज यादव एवं प्यारेलाल, खैराबाद के संजय प्रजापति, सेवकराम, कनक सुंदरी, सकरन के अर्पित गुप्ता से जवाब तलब किया है।