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जागरूकता का नहीं असर, 72 घंटे में भूले जिम्मेदारी

Thu, 28 Apr 2022 12:27 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Thu, 28 Apr 2022 12:27 AM IST
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No effect of awareness, forgotten responsibility in 72 hours
लालबाग चौराहे से बिना हेलमेट एक बाइक पर चार लोग बैठकर जाते हुए। -संवाद - फोटो : SITAPUR
सीतापुर। जिले में एक सप्ताह तक मनाया गया सड़क सुरक्षा सप्ताह रस्मअदायगी तक सीमित होकर रह गया है। एक सप्ताह तक अभियान चलाकर लोगों को जागरूक करने की हुई कोशिशों का शहर की सड़कों पर तीसरे दिन कोई असर नहीं दिखा। अभियान में परिवहन विभाग और यातायात पुलिस की ओर से चालान किए गए लेकिन सप्ताह का समापन होते ही शायद अब जिम्मेदारी भी खत्म हो गई है। न लोग गंभीर हो रहे हैं और न ही जिम्मेदार, जिनके कंधों पर नियम-कानून के पालन कराने की जिम्मेदारी है। पुलिसकर्मी भी नियम-कानून की खुलेआम अनदेखी कर वाहनों को सड़कों पर दौड़ा रहे हैं।
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बुधवार को अमर उजाला की पड़ताल में नियमों की हो रही अनदेखी की हकीकत सामने आई। 18 अप्रैल से जिले में शुुरू हुआ चतुर्थ सड़क सुरक्षा एक सप्ताह तक मनाया गया। 24 अप्रैल को इसका समापन हो गया। इन सात दिनों में एआरटीओ प्रवर्तन डॉ. उदित नारायण पांडेय, टीआई फरीद अहमद ने संयुक्त रूप से कार्रवाईयां की। खूब अभियान चलाए।
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नियमों की अनदेखी पर कानूनी कार्रवाई कर लापरवाह लोगों को आगे के लिए सबक भी सिखाया। 24 अप्रैल को सड़क सुरक्षा सप्ताह का समापन कर लोगों को नियमों के पालन की शपथ भी दिलाई गई, लेकिन इसके तीसरे दिन ही लोग नियम-कानून के पालन को भूल गए। उन्हें न तो पुलिस की कार्रवाई का डर दिखा और न ही अपनी सलामती की फिक्र दिखी और न ही अपनों की चिंता।
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सड़क सुरक्षा सप्ताह का लोगों पर कितना असर पड़ा, लोग कितने जागरूक हुए, इसकी पड़ताल के लिए बुधवार को अमर उजाला की टीम शहर में निकली। हमारी पड़ताल में पग-पग पर लोग नियम-कानून की धज्जियां उड़ाते नजर आएं। कहीं भी नियमों का पालन करते लोग नहीं दिखे। आम लोग ही नहीं, जिनके कंधों पर नियमों के पालन कराने की जिम्मेदारी है, वह भी मनमानी करते नजर आए।
पड़ताल में कई पुलिसकर्मी ऐसे नजर आए, जिन्होंने हेलमेट नहीं लगा रखा था। कोई ट्रिपलिंग तो कोई बाइक चलाते समय मोबाइल पर बात करने में मशगूल था। ये हाल सड़क सुरक्षा सप्ताह के तीसरे दिन का है। ऐसे में आसानी से समझा जा सकता है कि सड़क सुरक्षा सप्ताह से लोगों में कितनी जागरूकता आ रही है। कैमरे में कैद तस्वीरें ही सब कुछ बयां कर रही हैं।
पुलिसकर्मी भी नहीं समझ रहे अपनी जिम्मेदारी
सड़क सुरक्षा सप्ताह के तीसरे दिन बुधवार को जो लापरवाही भरी तस्वीरें सामने आईं हैं, वह इस बात की गवाही दे रही हैं कि ऐसे कार्यक्रमों का लोगों पर कितना असर पड़ रहा है। सिर्फ आम लोगों की बात नहीं पुलिस पर भी इसका कोई असर नहीं है। अगर होता तो जिम्मेदारी को जरूर समझते। पुलिस के नियमों के पालन न करने से समाज के लोगों पर भी इसका विपरीत संदेश जाता है।
हालात जस के तस
ऐसा नहीं है कि सड़क सुरक्षा सप्ताह के बाद ही सड़कों पर नियमों के पालन को लेकर लापरवाही दिख रही हो, इससे पहले भी सड़क सुरक्षा सप्ताह में भी लोग अनदेखी करते रहे। सिर्फ लोग ही नहीं पुलिसकर्मी भी नहीं माने। उन्होंने भी नियम-कानून खूब तोड़े। उम्मीद थी कि ऐसे कार्यक्रमों से कुछ असर पड़ेगा, लेकिन हालात जस के तस हैं।

सभी लोगों से अपील है कि वह ट्रैफिक नियमों का पूरा पालन करें, इससे वह सलामत रहेंगे। उनमें जागरूकता लाने के लिए ही कार्यक्रम किए जाते हैं। नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई की जाती है। आगे भी ऐसे लोगों पर कार्रवाई होगी।
- फरीद अहमद, टीआई
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