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न तो एक्सरे की सुविधा और न ही होता अल्ट्रासाउंड

Sun, 05 Dec 2021 11:42 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Sun, 05 Dec 2021 11:42 PM IST
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Neither X-ray facility nor ultrasound
कमलापुर (सीतापुर)। जिम्मेदार भले ही मरीजों को बेहतर सुविधाएं देने का दावा करते हों, लेकिन हकीकत ठीक इसके उलट है। इलाज की आस में अस्पताल आने वाले मरीजों को मायूसी ही हाथ लग रही है। कसमंडा सीएचसी में भी समस्याओं के साथ ही अव्यवस्थाएं भी हैं। सीएचसी पर हड्डी रोग विशेषज्ञ और स्त्री रोग विशेषज्ञ न होने से मरीजों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
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ऐसे में मरीजों को जिला अस्पताल रेफर करना पड़ रहा है। अमर उजाला टीम की पड़ताल में शनिवार को अव्यवस्थाओं के साथ समस्याएं भी सामने आईं। सुबह टीम नौ बजे सीएचसी पहुंची, इमरजेंसी की ड्यूटी कर रहे डॉक्टर कामरान मिले। एएनएम पुष्पलता डिलीवरी करा रही थीं। कसमंडा से आए मरीज दिनेश कुमार और सीता रसोई से आई शांति देवी ने पेट दर्द की समस्या बताई। सुबह 10:30 बजे तक डॉ. प्रदीप श्रीवास्तव, प्रीती सक्सेना नहीं आईं थीं।
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सीएचसी अधीक्षक अरविंद बाजपेई ने बताया कि परिवार में शादी थी। कसमंडा सीएचसी पर रोजाना लगभग 150 से 220 तक मरीज आते हैं। ज्यादातर मरीजों को वायरल फीवर, सर्दी-जुकाम जैसी बीमारियों का इलाज तो हो जाता है, लेकिन हड्डी रोग विशेषज्ञ और स्त्री रोग विशेषज्ञ जैसे रोगियों को जिला अस्पताल रेफर किया जाता है। काफी समय से खाली चिकित्सकों के पद मरीजों की परेशानी का सबब बने हुए है। जिम्मेदार अगर खाली पदों के लिए उच्चाधिकारियों को अवगत कराकर नियुक्ति करा लें तो मरीजों को काफी सहूलियत होगी। इलाज के लिए मरीजों को इतनी भाग दौड़ नहीं करनी पड़ेगी।
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एक्सरे के लिए जिला मुख्यालय की लगाते दौड़
कहने को तो सीएचसी कसमंडा है, लेकिन यहां पर इलाज तो प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र जैसा ही मिलता है। यहां पर न तो एक्सरे मशीन है, न ही अल्ट्रासाउंड की सुविधा है। ऐसे में अगर कोई चोटिल मरीज आ जाता है तो उसका एक्सरे होना भी मुश्किल हो जाता है। इसी वजह से यहां पर अब धीरे-धीरे मरीजों की संख्या काफी कम होती जा रही है। अधीक्षक अरविंद बाजपेई ने बताया कि इस बाबत उच्च अधिकारियों से पत्राचार किया गया है।

ये आ रही दिक्कतें
सीएचसी के डॉ. कामरान ने बताया कि एक्स-रे मशीन न होने से निमोनिया, अस्थमा, टीबी, निमोथेरेक्स का डायग्नोसिस नहीं हो पाता है। मरीजों को बाहर भेजना पड़ता है। इन सबकी वजह से इलाज नहीं हो पा रहा है। इस केंद्र पर मरीजों को इलाज मिलना मुश्किल हो रहा है। आर्थोपेडिक सर्जन का पद भी खाली चल रहा है। ऐसे में आने वाले मरीजों को सीधे जिला अस्पताल के लिए रेफर कर दिया जाता है। इससे उनको काफी दिक्कतें आ रही हैं।
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