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ब्रह्मलीन हुए महंत भरतदास

Thu, 10 Feb 2022 12:07 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Thu, 10 Feb 2022 12:07 AM IST
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Mahant Bharatdas became Brahman
महंत भरत दास की फाइल फोटो। - फोटो : SITAPUR
नैमिषारण्य (सीतापुर)। चौरासी कोसी परिक्रमा समिति के अध्यक्ष महंत भरत दास का बुधवार सुबह निधन हो गया। वह कई दिनों से बीमार थे। उनके निधन की खबर पाकर तमाम लोगों ने आश्रम पहुंचकर श्रद्धांजलि दी। महंत का जन्म मरौली ग्वाल थाना सांडी जिला हरदोई में हुआ था। वह अपने पांच भाइयों में तीसरे नंबर पर थे। पहला आश्रम के पहले महंत देवीदास महाराज थे।
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उनके निधन के बाद वर्ष 2008 में भरत दास आश्रम की गद्दी पर आसीन हुए थे। बाल्यकाल से ही इनके अंदर अध्यात्म के प्रति लगाव था। जिसके चलते उन्होंने 18 वर्ष की आयु में ही गृह त्याग कर नैमिषारण्य आ गए थे। अपने गुरु के सानिध्य में ही उन्होंने आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त की।
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बुधवार सुबह जैसे ही महंत के निधन की खबर मिली, उनके शिष्य नैमिष के पहला आश्रम में इकट्ठा होना शुरू हो गए। उनकी पहचान डंका वाले बाबा के रूप में भी थी। फाल्गुन में प्रतिवर्ष होने वाली चौरासी कोसीय परिक्रमा का प्रारंभ पारंपरिक रूप से डंका बजा कर किया जाता है । जिसके चलते यहां गद्दीनशीन संत को डंका वाले बाबा की उपाधि भी दी जाती है।
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महंत के पार्थिव शरीर को नैमिषारण्य तीर्थ में भ्रमण कराकर पहला आश्रम ले जाया गया, जहां उन्हें उनके शिष्य ननकू दास ने मुखाग्नि दी। जिसमें बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। महंत को श्रद्धांजलि देने के लिए महंत बजरंग दास, जगदाचार्य देवेन्द्रानन्द सरस्वती, पुजारी राज नारायण पांडेय, पूर्व मंत्री रामपाल राजवंशी, महंत संतोष दास, महंत वीरेंद्राचार्य, महंत देवानंद गिरी, चरणदास त्यागी, सरोज सिंह, बजरंग दास, गुड़िया, महेश तिवारी आदि मौजूद रहे।
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