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राम धुन पर झूमी तीर्थ नगरी

Thu, 25 Mar 2021 11:52 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Thu, 25 Mar 2021 11:52 PM IST
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Jhoomi tirtha nagri on Ram dune
मिश्रिख में पंच कोसी परिक्रमा करते श्रद्घालु। (संवाद) - फोटो : SITAPUR
मिश्रिख (सीतापुर)। पंच कोसी परिक्रमा के दूसरे दिन गुरुवार को दधीचि की पावन धरा पर आस्था की अलौकिक छटा बिखरी। राम धुन पर तीर्थ नगरी झूम उठी। पग-पग पर आस्था के बिखरे रंगों से तपोभूमि राममय हो गई। उदासीन अखाड़े के साधू संतों समेत करीब तीन लाख परिक्रमार्थियों ने दधीचि कुुंड में शाही स्नान कर मोक्ष की कामना की। स्नान करने के बाद परिक्रमार्थियों ने नाचते-गाते और झूमते हुए अपने पंडालों में पहुंचे। सांझ ढलते ही कीर्तन-भजन शुरू हो गया, इससे भक्ति भाव और हिलोरे मारने लगी।
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84 कोसी परिक्रमा नैमिषारण्य से शुुरू होकर हरदोई के पड़ावों पर ठहरते हुए अपने अंतिम 11वें पड़ाव मिश्रिख को पहुंच गई थी। 10वें पड़ाव कोल्हुआ बरेठी से रामादल मिश्रिख पहुंची थी। इसके बाद बुधवार से मिश्रिख में पंच कोसीय परिक्रमा की शुरुआत साधू-संतों और परिक्रमार्थियों ने की। गुरुवार को पंच कोसी परिक्रमा का दूसरा दिन था। दूसरे दिन उदासीन अखाड़ा और देश-विदेश से लेकर आसपास के क्षेत्रों से आए साधू-संतों समेत परिक्रमार्थियों ने सुबह ही दधीचि कुंड में ब्रह्म मुहूर्त की बेला में शाही स्नान किया।
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करीब तीन लाख लोगों ने आस्था की डुबकी लगाई है। इसके बाद जल से आचमन कर मोक्ष की कामना की। स्नान करने के बाद कोई सजी हुई कार तो कोई हाथी तो कोई ट्रैक्टर-ट्रॉलियों पर सवार होकर अपने-अपने पंडाल स्थल पर पहुंचा। कुछ देर यहां ठहरने के बाद परिक्रमार्थियों का रेला पंच कोसी परिक्रमा करने के लिए निकल पड़ा। करीब दो से तीन घंटे में पंच कोसी परिक्रमा के बाद रामादल ने वापस रामलीला मैदान पर लगे अपने पंडालों में आकर डेरा जमा लिया।
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शाम होते ही परिक्रमार्थी, जिसमें महिला, पुरुष से लेकर बच्चों तक कीर्तन-भजन में जुट गए। शाम से शुरू हुआ कीर्तन-भजन का कार्यक्रम देर रात तक चलता रहा। जगह-जगह हो रहे भजन-कीर्तन से वातावरण पूरी तरह से भक्तिमय दिखा। भक्तिभाव का अनूठा संगम देखकर ऐसा लग रहा था कि, मानो दधीचि की इस धरा पर साक्षात पर भगवान उतर आए हों।
अभी तीन और यहां पर आस्था के ऐसे ही अद्भुत रंग देखने को मिलेंगे। पंच कोसी परिक्रमा करने के बाद लोग अपने-अपने घरों को लौट जाएंगे, लेकिन अभी इन तीन दिनों में आस्था और उमंग के जो विहंगम दृश्य देखने को मिलेंगे, वह अद्भुत, अलौकिक और अविस्मणीय होंगे।
सेवा भाव में हिस्सा ले रहे लोग
पांच दिनों तक चलने वाली पंच कोसी परिक्रमा अपने दो दिन पूूरे कर चुकी है। दूसरे दिन इस धार्मिक नगरी में परिक्रमा करने आए संत, सन्यासियों और परिक्रमार्थियों का धर्म निष्ठा से लोग सेवा भाव करने के लिए बढ़ चढ़कर हिस्सा ले रहे थे। जगह-जगह पंडाल सजे हुए थे। कथा, भागवत, रासलीला का दौर जारी है।

...देवता धरती पर उतर आए
तीर्थ नगरी में परिक्रमार्थियों का सैलाब के डेरा जमाने के बाद सुबह से शाम तक जगह-जगह हो रहे भंडारे, शाम होते ही भजन-कीर्तन के शुरू होने और श्रद्धालुओं के अलग-अलग रंग देखकर ऐसा लगता है कि इस देव भूमि सभी देवता लोक कल्याण के लिए भूमि पर निवास करने आ गए हैं।
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