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Sitapur News: पति टीए पत्नी प्रधान, बेटे को भुगतान

Fri, 06 Jan 2023 11:27 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Fri, 06 Jan 2023 11:27 PM IST
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husband ta wife head, pay to son
सीतापुर। मनरेगा को अफसरों और पंचायत प्रतिनिधियों ने खुद को पोषित करने का साधन बना लिया है। अफसरों-जनप्रतिनिधियों के गठजोड़ ने नियमों की धज्जियां उड़ाकर रख दीं। एलिया विकास खंड में पति तकनीकी सहायक है और पत्नी ग्राम प्रधान। इनके पुत्र की फर्म पर खूब कृपा बरसाई गई है।
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शासन के स्पष्ट निर्देश हैं कि पंचायत राज विभाग या ग्राम्य विकास विभाग के किसी भी कर्मचारी (स्थायी/संविदा) या उसके परिजनों की फर्मों को कोई काम न दिया जाए और न ही भुगतान किया जाए। आम तौर पर देखा जाता है कि विभागीय कर्मचारी अपने या अपने करीबी रिश्तेदारों की फर्मों को मनरेगा की वेंडर्स लिस्ट में पंजीकृत करा लेते हैं।
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बाद में न सिर्फ मनरेगा के सामग्री अंश का, बल्कि राज्य वित्त और 15वें वित्त के कार्यों का भुगतान इन्हीं फर्मों को किया जाता है। माना जाता है कि विकास कार्यों की आड़ में कर्मचारी खुद को ही उपकृत कर लेते हैं। शासन के निर्देशों की अनदेखी करते हुए जनपद के एलिया विकास खंड में भी गजब कारनामा हो गया।
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एलिया विकास खंड में मनरेगा के तहत तकनीकी सहायक के पद पर तैनात रामशंकर वाजपेयी की पत्नी आरती देवी इसी विकास खंड की ग्राम पंचायत भेलावा खुर्द की प्रधान भी हैं। मतलब यह कि पति टीए हैं और पत्नी प्रधान हैं। इनके बेटे आयुष वाजपेयी हैं और आयुष के नाम पर ही मनरेगा वेंडर्स लिस्ट में श्री बाला जी ट्रेडर्स फर्म पंजीकृत है।
इस फर्म को एलिया विकास खंड में कराए गए विभिन्न विकास कार्यों के बदले निर्माण सामग्री के नाम पर बड़े पैमाने पर भुगतान किया गया है। सिर्फ हथूरी ग्राम पंचायत से ही इस फर्म को करीब आठ लाख का भुगतान किया गया है।
मनरेगा में वेंडर्स लिस्ट में फर्म शामिल करने का अधिकार मनरेगा उपायुक्त को होता है। मनरेगा उपायुक्त उन्हीं फर्मों को वेंडर्स लिस्ट में फीड कराता है, जिनकी संस्तुति संबंधित खंड विकास अधिकारी करते हैं।
तकनीकी सहायक के बेटे की फर्म एलिया विकास खंड में कारोबार के लिए 16 जनवरी 2019 में दर्ज हुई थी। मतलब यह कि इस फर्म पर पिछले तीन वर्ष से कारोबार चल रहा है, लेकिन ब्लॉक के जिम्मेदारों से लेकर जिला मुख्यालय तक के जिम्मेदार इसकी अनदेखी करते रहे।

टीए और प्रधान पुत्र की फर्म पर सिर्फ एलिया विकास खंड से ही कृपा नहीं बरसी, बल्कि बेहटा और बिसवां से भी बड़े पैमाने पर भुगतान इस फर्म को किए गए हैं। मजे की बात यह है कि बेहटा और बिसवां के जिम्मेदार पता कराएंगे कहकर पूरे मामले से पल्ला झाड़ लेते हैं। दरअसल हकीकत यह है कि चहेती फर्म को भुगतान करने के एवज में जिम्मेदारों को भी खासा सत्कार और उपहार मिलता है। इसी वजह से वह चुप्पी साधे रहते है।
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