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गर्भवती को गोद में लेकर अस्पताल पहुंचा युवक
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सीतापुर। सरकार और जिम्मेदार स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर करने के लाख दावे कर लें, लेकिन हकीकत किसी से छिपी नहीं है। शनिवार को एक ऐसी ही दिल को झकझोर देने वाली तस्वीर उस जिला में देखने को मिली, जहां पर लोगों की जिंदगियां बचाई जाती हैं। धरती के भगवान मरीज की जान में जान डालकर उसे नया जीवन देते हैं, लेकिन इस वाकये को देखकर लगा कि कुछ भी नहीं बदला है। सबकुछ भगवान भरोसे ही है।
खगेसियामऊ गांव की रहने वाली छोटी देवी पत्नी दीपक कुमार ढाई माह के गर्भ से थी। शनिवार को उसे प्रसव पीड़ा शुरू हुई। अस्पताल लाने के लिए गर्भवती का पति एंबुलेंस बुलाने को लेकर 102 नंबर काफी देर तक मिलाता रहा, लेकिन मदद की बात तो दूर कॉल तक नहीं लग सकी। परेशान दीपक ने किराए से एक ई-रिक्शा बुक करवाया और पत्नी को लेकर जिला अस्पताल पहुंचा। पत्नी को ई-रिक्शा से उतारकर किसी तरह जिला अस्पताल की इमरजेंसी में लेकर गया, तब तक उसकी हालत और बिगड़ चुकी थी।
गर्भवती को अधिक ब्लीडिंग हो रही थी। डॉक्टरों ने देखने के बाद बताया कि बच्चे में कुछ गड़बड़ है। जिला महिला अस्पताल ले जाने की सलाह दी। डफरिन ले जाने के लिए दीपक दीपक और उसकी मां स्ट्रेचर की तलाश करने लगी। काफी देर तक स्ट्रेचर नहीं मिला। एक-दो थे भी तो मौजूद स्वास्थ्य कर्मियों ने देने से मना कर दिया, इससे परेशान युवक ने पत्नी को गोद में उठा लिया और जिला अस्पताल से लेकर महिला अस्पताल की ओर दौड़ पड़ा।
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जिला अस्पताल के गेट पर पहुंचते ही एक के बाद एक वाहन सड़क से गुजर रहे थे। पत्नी को लेकर युवक भीड़ में सड़क पार करने की हिम्मत नहीं जुटा रहा था। उसकी हालत देखकर कुछ लोग मदद को जुट गए। काफी जद्दोजहद के बाद युवक पत्नी को लेकर डफरिन पहुंचा।
डफरिन गेट पर ही युवक को रोक लिया गया। कोविड-19 के लागू प्रोटोकाल से उसे गुजरना पड़ा। दस मिनट यहां पर लग गए, तब तक ऐसे ही वह गोद में ही पत्नी को लिए खड़ा रहा। डफरिन का हाल भी जिला अस्पताल से जुदा नहीं था। यहां भी दीपक को पत्नी के लिए स्ट्रेचर नसीब नहीं हुआ। गोद में लेकर वह इमरजेंसी पहुंचा। डॉक्टरों ने महिला को देखा। बताया बच्चा खराब हो चुका। महिला हालत खतरे से बाहर है।
सीएमएस जिला अस्पताल डॉ. अनिल अग्रवाल नेे बताया कि जिला अस्पताल में स्ट्रेचर की व्यवस्था है। स्ट्रेचर इमरजेंसी के गेट पर ही रहता है तो कैसे नहीं मिला? कहने को कोई कुछ भी कह सकता है।
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खगेसियामऊ गांव की रहने वाली छोटी देवी पत्नी दीपक कुमार ढाई माह के गर्भ से थी। शनिवार को उसे प्रसव पीड़ा शुरू हुई। अस्पताल लाने के लिए गर्भवती का पति एंबुलेंस बुलाने को लेकर 102 नंबर काफी देर तक मिलाता रहा, लेकिन मदद की बात तो दूर कॉल तक नहीं लग सकी। परेशान दीपक ने किराए से एक ई-रिक्शा बुक करवाया और पत्नी को लेकर जिला अस्पताल पहुंचा। पत्नी को ई-रिक्शा से उतारकर किसी तरह जिला अस्पताल की इमरजेंसी में लेकर गया, तब तक उसकी हालत और बिगड़ चुकी थी।
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गर्भवती को अधिक ब्लीडिंग हो रही थी। डॉक्टरों ने देखने के बाद बताया कि बच्चे में कुछ गड़बड़ है। जिला महिला अस्पताल ले जाने की सलाह दी। डफरिन ले जाने के लिए दीपक दीपक और उसकी मां स्ट्रेचर की तलाश करने लगी। काफी देर तक स्ट्रेचर नहीं मिला। एक-दो थे भी तो मौजूद स्वास्थ्य कर्मियों ने देने से मना कर दिया, इससे परेशान युवक ने पत्नी को गोद में उठा लिया और जिला अस्पताल से लेकर महिला अस्पताल की ओर दौड़ पड़ा।
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जिला अस्पताल के गेट पर पहुंचते ही एक के बाद एक वाहन सड़क से गुजर रहे थे। पत्नी को लेकर युवक भीड़ में सड़क पार करने की हिम्मत नहीं जुटा रहा था। उसकी हालत देखकर कुछ लोग मदद को जुट गए। काफी जद्दोजहद के बाद युवक पत्नी को लेकर डफरिन पहुंचा।
डफरिन गेट पर ही युवक को रोक लिया गया। कोविड-19 के लागू प्रोटोकाल से उसे गुजरना पड़ा। दस मिनट यहां पर लग गए, तब तक ऐसे ही वह गोद में ही पत्नी को लिए खड़ा रहा। डफरिन का हाल भी जिला अस्पताल से जुदा नहीं था। यहां भी दीपक को पत्नी के लिए स्ट्रेचर नसीब नहीं हुआ। गोद में लेकर वह इमरजेंसी पहुंचा। डॉक्टरों ने महिला को देखा। बताया बच्चा खराब हो चुका। महिला हालत खतरे से बाहर है।
सीएमएस जिला अस्पताल डॉ. अनिल अग्रवाल नेे बताया कि जिला अस्पताल में स्ट्रेचर की व्यवस्था है। स्ट्रेचर इमरजेंसी के गेट पर ही रहता है तो कैसे नहीं मिला? कहने को कोई कुछ भी कह सकता है।