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Sitapur News: 52 दिन बाद शिकंजे में शिकारी
Tue, 27 May 2025 12:31 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
Updated Tue, 27 May 2025 12:31 AM IST
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पिंजड़े में कैद हुआ बाघ।
लहरपुर (सीतापुर)। वन विभाग की टीम ने सोमवार भोर क्षेत्र में दहशत का पर्याप्य बने बाघ को 15 घंटे तक चले रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद ट्रेंकुलाइज (बेहोश) कर पकड़ लिया। पिछले 52 दिनों से लोग डर के साये में जी रहे थे।
सोमवार भोर ड्रोन से लोकेशन ट्रेस करने के दौरान बाघ रावल अदेसर व निबौरी के बीच नाले के करीब बैठा नजर आया। इसके बाद 25 फुट की दूरी से बाघ को सफलता पूर्वक ट्रेंकुलाइज कर लिया गया। ट्रेंकुलाइज गन की सुईं बाघ के चुभते ही वह उछलकर भागा और करीब 200 मीटर दूर जाकर बेहोश हो गया।
बेहोशी की हालत में बाघ को पिंजरे में कैद कर लिया गया। आसपास के 25 गांवों में बाघ की दहशत थी। अब तक यह पांच शिकार करने के साथ तीन किसानों पर भी हमला कर चुका था। ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है। लहरपुर वन रेंज के अदेसर गांव के करीब चार अप्रैल को सांड़ का शिकार कर बाघ ने अपनी मौजूदगी का अहसास कराया था। इसके बाद से क्षेत्र में लगातार बाघ की दहशत बनी हुई थी। पिंजरा व कैमरे लगाए जाने के बाद भी बाघ का कोई सुराग नहीं मिल पा रहा था। इस बीच वन विभाग ने मुख्य वन संरक्षक डॉ. रेनू सिंह से बाघ को ट्रेंकुलाइज करने की इजाजत मांगी।
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प्रभारी बिसवां के उप प्रभागीय वनाधिकारी विकास यादव, लहरपुर रेंजर अभिषेक सिंह व दुधवा टाइगर रिजर्व के पशु चिकित्सक डॉ. दयाशंकर की टीम ने रविवार सुबह 10 बजे से रात 10 बजे तक रेस्क्यू ऑपरेशन चला। सोमवार भोर तीन बजे से रेस्क्यू फिर शुरू किया गया। करीब 4:16 बजे रावल अदेसर व निबौरी गांव के बीच बहने वाले नाले के किनारे दिखाई दिया। रेस्क्यू टीम ने 25 फुट दूर से उसे ट्रेंकुलाइज किया। पिंजरे में कैदकर लहरपुर वन रेंज कार्यालय लाया गया। बाघ पूरी तरह स्वस्थ है।
डीएम बोले, सम्मानित की जाएगी टीम
डीएम अभिषेक आनंद ने लहरपुर वन रेंज कार्यालय पर पहुंचकर रेस्क्यू ऑपरेशन की जानकारी ली। कहा कि रेस्क्यू करने वाली टीम को सम्मानित किया जाएगा।
दुधवा या कतर्निया में छोड़ा जाएगा
बाघ को किसी सुरक्षित जंगल या दुधवा रिजर्व में छोड़ा जा सकता है। गर्मी का मौसम देखते हुए बाघ को राहत पहुंचाने के लिए पिंजरे के पास पंखा लगाया गया है।
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सोमवार भोर ड्रोन से लोकेशन ट्रेस करने के दौरान बाघ रावल अदेसर व निबौरी के बीच नाले के करीब बैठा नजर आया। इसके बाद 25 फुट की दूरी से बाघ को सफलता पूर्वक ट्रेंकुलाइज कर लिया गया। ट्रेंकुलाइज गन की सुईं बाघ के चुभते ही वह उछलकर भागा और करीब 200 मीटर दूर जाकर बेहोश हो गया।
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बेहोशी की हालत में बाघ को पिंजरे में कैद कर लिया गया। आसपास के 25 गांवों में बाघ की दहशत थी। अब तक यह पांच शिकार करने के साथ तीन किसानों पर भी हमला कर चुका था। ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है। लहरपुर वन रेंज के अदेसर गांव के करीब चार अप्रैल को सांड़ का शिकार कर बाघ ने अपनी मौजूदगी का अहसास कराया था। इसके बाद से क्षेत्र में लगातार बाघ की दहशत बनी हुई थी। पिंजरा व कैमरे लगाए जाने के बाद भी बाघ का कोई सुराग नहीं मिल पा रहा था। इस बीच वन विभाग ने मुख्य वन संरक्षक डॉ. रेनू सिंह से बाघ को ट्रेंकुलाइज करने की इजाजत मांगी।
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प्रभारी बिसवां के उप प्रभागीय वनाधिकारी विकास यादव, लहरपुर रेंजर अभिषेक सिंह व दुधवा टाइगर रिजर्व के पशु चिकित्सक डॉ. दयाशंकर की टीम ने रविवार सुबह 10 बजे से रात 10 बजे तक रेस्क्यू ऑपरेशन चला। सोमवार भोर तीन बजे से रेस्क्यू फिर शुरू किया गया। करीब 4:16 बजे रावल अदेसर व निबौरी गांव के बीच बहने वाले नाले के किनारे दिखाई दिया। रेस्क्यू टीम ने 25 फुट दूर से उसे ट्रेंकुलाइज किया। पिंजरे में कैदकर लहरपुर वन रेंज कार्यालय लाया गया। बाघ पूरी तरह स्वस्थ है।
डीएम बोले, सम्मानित की जाएगी टीम
डीएम अभिषेक आनंद ने लहरपुर वन रेंज कार्यालय पर पहुंचकर रेस्क्यू ऑपरेशन की जानकारी ली। कहा कि रेस्क्यू करने वाली टीम को सम्मानित किया जाएगा।
दुधवा या कतर्निया में छोड़ा जाएगा
बाघ को किसी सुरक्षित जंगल या दुधवा रिजर्व में छोड़ा जा सकता है। गर्मी का मौसम देखते हुए बाघ को राहत पहुंचाने के लिए पिंजरे के पास पंखा लगाया गया है।