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Sitapur News: सीएमओ सीतापुर को मानवाधिकार आयोग का नोटिस
Wed, 13 Sep 2023 12:05 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
Updated Wed, 13 Sep 2023 12:05 AM IST
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सीतापुर। मुख्य चिकित्साधिकारी की लापरवाही पर मानवाधिकार आयोग ने सख्त रवैया अपनाते हुए नोटिस जारी किया है। यदि इस नोटिस का सीएमओ ने संतोषजनक उत्तर नहीं दिया तो उन पर सवा लाख रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा। यह जुर्माना पांच स्वास्थ्यकर्मियों के जीपीएफ भुगतान में देरी करने के कारण लगेगा। इस जुर्माना राशि से प्रत्येक पीड़ित को पच्चीस हजार रुपये मुआवजा राशि के रूप में दिए जाएंगे।
पीड़ित नवल किशोर मिश्रा ने बताया कि वे बीते 28 फरवरी 2022 को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र खैराबाद से स्वास्थ्य पर्यवेक्षक के पद से सेवानिवृत्त हुए थे। नियमानुसार सेवानिवृत्ति के दिन ही जीपीएफ भुगतान हो जाना चाहिए था लेकिन सेवानिवृत्ति के डेढ़ साल बाद जीपीएफ भुगतान हो पाया। इससे उनको काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा।
उनकी तरह ही स्वास्थ्य पर्यवेक्षक सतीश चंद्र मिश्रा, एएनएम माधुरी मिश्रा, सुमंत तिवारी और राम लाडली का भी जीपीएफ भुगतान अटकाया गया। इस मामले को लेकर पीड़ित ने फरवरी 2023 में मानवाधिकार आयोग का दरवाजा खटखटाया।
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इसके बाद आयोग ने मुख्य सचिव संग स्वास्थ्य विभाग के उच्चाधिकारियों को नोटिस जारी किया। इसके बाद सीएमओ सीतापुर को भी नोटिस मिला। इसमें कहा गया है कि क्यों न आपके ऊपर इस लापरवाही के कारण सवा लाख रुपये का जुर्माना लगाया जाए। इस नोटिस का जवाब देने के लिए उन्हें छह सप्ताह का समय दिया गया है।
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पीड़ित नवल किशोर मिश्रा ने बताया कि वे बीते 28 फरवरी 2022 को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र खैराबाद से स्वास्थ्य पर्यवेक्षक के पद से सेवानिवृत्त हुए थे। नियमानुसार सेवानिवृत्ति के दिन ही जीपीएफ भुगतान हो जाना चाहिए था लेकिन सेवानिवृत्ति के डेढ़ साल बाद जीपीएफ भुगतान हो पाया। इससे उनको काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा।
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उनकी तरह ही स्वास्थ्य पर्यवेक्षक सतीश चंद्र मिश्रा, एएनएम माधुरी मिश्रा, सुमंत तिवारी और राम लाडली का भी जीपीएफ भुगतान अटकाया गया। इस मामले को लेकर पीड़ित ने फरवरी 2023 में मानवाधिकार आयोग का दरवाजा खटखटाया।
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इसके बाद आयोग ने मुख्य सचिव संग स्वास्थ्य विभाग के उच्चाधिकारियों को नोटिस जारी किया। इसके बाद सीएमओ सीतापुर को भी नोटिस मिला। इसमें कहा गया है कि क्यों न आपके ऊपर इस लापरवाही के कारण सवा लाख रुपये का जुर्माना लगाया जाए। इस नोटिस का जवाब देने के लिए उन्हें छह सप्ताह का समय दिया गया है।