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ठंड के साथ बढ़ने लगीं धड़कनें, फूल रहीं सांसें
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जिला अस्पताल में पर्चा बनवाने के लिए लाइन में लगे मरीज व तीमारदार। - संवाद
- फोटो : SITAPUR
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सीतापुर। ठंड बढ़ते ही दिल के मरीजों की धड़कनें बढ़ गई है। जिला अस्पताल में करीब डेढ़ माह पहले रोजाना 80 से 100 मरीज आते थे। अब ऐसे मरीजों की संख्या 150 के पार हो गई है। लेकिन इन मरीजों को अस्पताल में बेहतर तरीके से इलाज मिलना मुश्किल हो रहा है। कारण, अस्पताल में ह्दय रोग का कोई विशेषज्ञ नहीं है और न ही दिल की जांच की सुविधा है।
ऐसे में कामचलाऊ तरीके से इन मरीजों का इलाज किया जा रहा है। हालत गंभीर होने पर इन्हें लखनऊ के लिए रेफर किया जाता है। इस समय सांस, ब्लॅड प्रेसर के मरीजों की संख्या भी बढ़ गई है। सोमवार को ओपीडी में करीब 1800 मरीज पहुंचे। ठंडक बढ़ने के साथ ही जिला अस्पताल में आने वाले मरीजों की संख्या में गिरावट तो आई है।
संक्रामक रोगों के मरीज घटे है। लेकिन दिल की बीमारी व सांस के मरीजों की संख्या बढ़ गई है। चिकित्सक भी बताते है कि ठंड में नसों में सिकुड़न आ जाती है। इसी वजह से ऐसे मरीजों की संख्या बढ़ जाती है। जिला अस्पताल में करीब डेढ़ माह पहले दिल की बीमारी के 80 से 100 मरीज रोजाना ओपीडी में आते थे। अब ऐसे मरीजों की संख्या 150 के पार हो गई है।
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अधिकतर मरीजों के दिल में दर्द व सांस फूलने की समस्या हो रही है। ऐसे मरीजों को अस्पताल में इलाज मिलना बहुत ही मुश्किल हो रहा है। कारण यह है जिला अस्पताल में करीब 10 साल से ह्दय रोग विशेषज्ञ का पद खाली चल रहा है। अस्पताल में ह्दय रोग की जांच की कोई विशेष सुविधा भी उपलब्ध नहीं है। केवल ईसीजी के द्वारा ही जांच की सुविधा मिल पाती है।
ऐसे में अगर कोई गंभीर मरीज आ जाता है तो उसको लखनऊ के लिए रेफर कर दिया जाता है। फिजीशियन ही जिला अस्पताल में हदय रोगियों का इलाज करते है। सोमवार को ओपीडी खुलने से करीब 1800 मरीज अस्पताल पहुंचे। इससे पर्चा काउंटर से लेकर दवा काउंटर तक भीड़ ही भीड़ दिखाई दी।
ठंड में बुजुर्ग बरते सावधानी
जिला अस्पताल के फिजीशियन डॉ. जेएन सिंह का कहना है इस समय सुबह-शाम काफी ठंड पड़ रही है। ऐसे में बुजुर्ग सुबह शाम बाहर निकलने से बचे। अगर निकलते है तो पूरी तरह से गर्म कपड़े पहने। धूप निकलने पर उसका आनंद ले। धुआं रहित अलाव तापने की कोशिश करे। जिस कमरे में रहे, वहां पर ऑक्सीजन लेवल का स्तर ठीक बना रहे। बंद कमरे में न लेटे।
मरीजों की संख्या बढ़ने का कारण
जिला अस्पताल के फिजीशियन डॉ. जेएन सिंह बताते है ठंड में नसें सिकुड़ने लगती हैं। इसकी वजह से सांस के मरीजों की दिक्कतें बढ़ जाती है। वहीं ब्लॅड प्रेशर हावी हो जाता है। दिल की नसों में भी सिकुड़न आने से दिल के मरीजों की परेशानी शुरू हो जाती है। इसलिए ठंड में खासकर बुजुर्गों व इनसे परेशान मरीजों को बहुत सावधानी बरतने की जरूरत होती है। नियमित दवाओं का सेवन करते रहे।
भीड़भाड़ में निकलने से बचें
बुजुर्ग मरीजों की संख्या बढ़ने से वह जिला अस्पताल आ रहे हैं। ऐसे में उनको कोविड प्रोटोकॉल का पालन करना भी जरूरी है। फिजीशियन जेएन सिंह बताते हैं कि ओमिक्रॉन वायरस को लेकर खतरा बढ़ा है। ऐसे में बेवजह अस्पताल आने से बचे। जरूरी होने पर आते है तो मास्क जरूर लगाएं। सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करें। तभी हम अपने आपको संक्रमित होने से बचा सकते है।
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ऐसे में कामचलाऊ तरीके से इन मरीजों का इलाज किया जा रहा है। हालत गंभीर होने पर इन्हें लखनऊ के लिए रेफर किया जाता है। इस समय सांस, ब्लॅड प्रेसर के मरीजों की संख्या भी बढ़ गई है। सोमवार को ओपीडी में करीब 1800 मरीज पहुंचे। ठंडक बढ़ने के साथ ही जिला अस्पताल में आने वाले मरीजों की संख्या में गिरावट तो आई है।
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संक्रामक रोगों के मरीज घटे है। लेकिन दिल की बीमारी व सांस के मरीजों की संख्या बढ़ गई है। चिकित्सक भी बताते है कि ठंड में नसों में सिकुड़न आ जाती है। इसी वजह से ऐसे मरीजों की संख्या बढ़ जाती है। जिला अस्पताल में करीब डेढ़ माह पहले दिल की बीमारी के 80 से 100 मरीज रोजाना ओपीडी में आते थे। अब ऐसे मरीजों की संख्या 150 के पार हो गई है।
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अधिकतर मरीजों के दिल में दर्द व सांस फूलने की समस्या हो रही है। ऐसे मरीजों को अस्पताल में इलाज मिलना बहुत ही मुश्किल हो रहा है। कारण यह है जिला अस्पताल में करीब 10 साल से ह्दय रोग विशेषज्ञ का पद खाली चल रहा है। अस्पताल में ह्दय रोग की जांच की कोई विशेष सुविधा भी उपलब्ध नहीं है। केवल ईसीजी के द्वारा ही जांच की सुविधा मिल पाती है।
ऐसे में अगर कोई गंभीर मरीज आ जाता है तो उसको लखनऊ के लिए रेफर कर दिया जाता है। फिजीशियन ही जिला अस्पताल में हदय रोगियों का इलाज करते है। सोमवार को ओपीडी खुलने से करीब 1800 मरीज अस्पताल पहुंचे। इससे पर्चा काउंटर से लेकर दवा काउंटर तक भीड़ ही भीड़ दिखाई दी।
ठंड में बुजुर्ग बरते सावधानी
जिला अस्पताल के फिजीशियन डॉ. जेएन सिंह का कहना है इस समय सुबह-शाम काफी ठंड पड़ रही है। ऐसे में बुजुर्ग सुबह शाम बाहर निकलने से बचे। अगर निकलते है तो पूरी तरह से गर्म कपड़े पहने। धूप निकलने पर उसका आनंद ले। धुआं रहित अलाव तापने की कोशिश करे। जिस कमरे में रहे, वहां पर ऑक्सीजन लेवल का स्तर ठीक बना रहे। बंद कमरे में न लेटे।
मरीजों की संख्या बढ़ने का कारण
जिला अस्पताल के फिजीशियन डॉ. जेएन सिंह बताते है ठंड में नसें सिकुड़ने लगती हैं। इसकी वजह से सांस के मरीजों की दिक्कतें बढ़ जाती है। वहीं ब्लॅड प्रेशर हावी हो जाता है। दिल की नसों में भी सिकुड़न आने से दिल के मरीजों की परेशानी शुरू हो जाती है। इसलिए ठंड में खासकर बुजुर्गों व इनसे परेशान मरीजों को बहुत सावधानी बरतने की जरूरत होती है। नियमित दवाओं का सेवन करते रहे।
भीड़भाड़ में निकलने से बचें
बुजुर्ग मरीजों की संख्या बढ़ने से वह जिला अस्पताल आ रहे हैं। ऐसे में उनको कोविड प्रोटोकॉल का पालन करना भी जरूरी है। फिजीशियन जेएन सिंह बताते हैं कि ओमिक्रॉन वायरस को लेकर खतरा बढ़ा है। ऐसे में बेवजह अस्पताल आने से बचे। जरूरी होने पर आते है तो मास्क जरूर लगाएं। सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करें। तभी हम अपने आपको संक्रमित होने से बचा सकते है।