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हरगोविंद और मनीष में हो सकता मुकाबला

Sat, 29 Jan 2022 11:24 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Sat, 29 Jan 2022 11:24 PM IST
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Hargovind and Manish may compete
सीतापुर। आखिरकार वही हुआ जिसकी चर्चाएं सियासी फिजा में कई दिनों से तैर रही थी। सिधौली सीट से टिकट न मिलने के अगले ही दिन पूर्व विधायक मनीष रावत की आस्था डगमगा गई। उन्होंने साइकिल से उतरकर कमल का हाथ थाम लिया। शनिवार को भाजपा की सदस्यता लेने की तस्वीरें सामने आते ही सिधौली की सियासत में भी करंट दौड़ गया।
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हाल फिलहाल सिधौली की सियासी पिच पर हरगोविंद और मनीष रावत आमने-सामने बैटिंग कर सकते हैं। एकाएक सपा छोड़कर चुनाव से ऐन वक्त पहले भाजपा में आने से यही मायने निकाले जा रहे हैं। हालांकि, अब हर किसी की नजरें पार्टी के अगले कदम पर टिकी हैं। इंतजार प्रत्याशी के नाम पर भाजपा की ओर से मुहर लगाने का हो रहा है। प्रत्याशी के नाम पर एलान होते ही सियासी जंग और तेज होने के आसार हैं। टक्कर कांटे की हो सकती है।
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तीसरी बार एक-दूसरे के खिलाफ ठोंक सकते हैं ताल
समाजवादी पार्टी ने सदर, महोली, लहरपुर, हरगांव, महमूदाबाद, बिसवां, मिश्रिख, सेवता में प्रत्याशियों को उतार दिया था, जबकि सिधौली सीट को लेकर लंबे समय से पेच फंसा हुआ था, लेकिन कयास इस बात के लगाए जा रहे थे कि इस बार हरगोविंद भार्गव को सपा टिकट दे सकती है। शुक्रवार को पार्टी ने सूची जारी की तो ठीक वैसा ही हुआ। सपा ने बसपा से आए हरगोविंद भार्गव पर जीत का भरोसा जताते हुए उन्हें सिधौली विधानसभा सीट से टिकट दे दिया है।
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हरगोविंद भार्गव ने 2007 में बसपा के टिकट से सिधौली विधानसभा सीट से चुनाव जीता था, लेकिन 2012 में सपा प्रत्याशी मनीष रावत जीते थे। 2017 में बसपा के टिकट से हरगोविंद फिर से विधायक बने थे। मनीष रावत ने 2012 में पहला चुनाव लड़ा था, जिसमें उन्हें विजय मिली थी, जबकि 2017 का दूसरा चुनाव हार गए थे। लगातार दो चुनावों में आमने-सामने रहने वाले मनीष और हरगोविंद फिर तीसरी बार चुनाव में एक-दूसरे के प्रतिद्वंद्वी हो सकते हैं।
जिसका था इंतजार...
जिले की अन्य विधानसभा सीटों पर प्रत्याशियों को उतारने के बाद सपा सिधौली सीट को लेकर असमंजस में थी। पार्टी हाईकमान निर्णय नहीं ले पा रही थी। उसके सामने एक तरफ कुंआ तो दूसरे तरफ खाई जैसे हालात नजर आ रहे थे, लेकिन लंबी जद्दोजहद के बाद आखिरकार शुक्रवार को सपा की ओर से प्रत्याशी के लिए हरगोविंद भार्गव के नाम का एलान करते ही भाजपा को मुफीद मौका मिल गया। अब भाजपा के लोग यही कह रहे हैं जिसका था इंतजार... मनीष रावत आ गए न।
सपाई से भाजपाई हो गए मनीष रावत
सियासी जानकारों की माने तो भाजपा इसी ताक में थी। इसी वजह से वह इस सीट को लेकर अपने पत्ते नहीं खोल रही थी। हकीकत यह भी है कि सिधौली सीट को लेकर पार्टी इस बार कोई रिस्क लेना नहीं चाहती थी। इसलिए भाजवा वेट एंड वॉच की तर्ज पर थी, लेकिन जब मौका मिला तो देरी नहीं लगाई। शुक्रवार को मनीष का टिकट कटा। शनिवार को वह सपाई से भाजपाई हो गए। राजनीतिक पंडितों की माने तो भाजपा की नजर मनीष पर पहले से ही थी, लेकिन वह सपा के दांव का इंतजार कर रही थी। दांव सामने आते ही भाजपा ने मनीष को अपने पाले में शामिल कर लिया।

41 साल से नहीं खिला कमल
सियासत के गुजरे पन्नों को पलटे तो सिधौली विधानसभा सीट पर पिछले 41 सालों से कमल नहीं खिला है। ऐसे में भाजपा की पूरी कोशिश इस सीट पर भी कमल खिलाने की है। इसीलिए पिछले महीने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यहां से जनसभा कर भाजपा की बंजर जमीन पर सियासत की फसल काटने के लिए ‘खाद-पानी’ दे गए थे। अब पार्टी ने मनीष रावत को लेकर एक और दांव चला है। उम्मीद कमल खिलाने की है।
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