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हरैय्या कूच कर गया आस्था का सैलाब

Tue, 16 Mar 2021 12:26 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Tue, 16 Mar 2021 12:26 AM IST
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Haraiyya traveled
चौरासी कोसी परिक्रमा में अगले पड़ाव हरैया के लिए रवाना होते परिक्रमार्थी। (संवाद) - फोटो : SITAPUR
संदना/रामगढ़/नैमिषारण्य (सीतापुर)। पौराणिक 84 कोसी परिक्रमा अपने पहले पड़ाव कोरौना पर रात्रि विश्राम के बाद सोमवार को भोर में दूसरे पड़ाव हरैय्या के लिए रवाना हो गई। हरैय्या, हरदोई जनपद में आता है। इस दौरान साधु संत रामनाम का जाप करते हुए आस्था की डगर पर बढ़ते ही चले गए। कोई साइकिल से चल रहा था तो कोई पैदल ही रामधुन में मस्त रहा। थकान महसूस होने पर पेड़ की छांव का आनंद लिया। फिर अपने लक्ष्य की ओर कदम बढ़ाते चले गए।
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जिन मार्गों से परिक्रमा निकली वहां के लोगों ने श्रद्धालुओं का स्वागत किया। उन्हें पानी पिलाकर आशीर्वाद लिया। दिनभर यह सिलसिला चलता रहा। धर्म और आस्था की प्रतीक इस यात्रा में रामादल भजन कीर्तन और जयकारों के बीच पहले पड़ाव कोरौना पर रात्रि विश्राम के बाद सोमवार को सुबह चार बजे से दूसरे पड़ाव की ओर कूच कर गए। 84 कोसी परिक्रमा समिति के अध्यक्ष महंत भरतदास ने दूसरे पड़ाव पर आगमन की अगुवाई की।
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इस पावन धर्मयात्रा में राम नाम भक्तिरस में डूबे परिक्रमार्थी दूसरे पड़ाव के बीच पड़ने वाले तीर्थ और प्राचीन मंदिरों का दर्शन कर पुण्य लाभ कमाया। इस दौरान श्रद्धालुओं ने प्राचीन मंदिर कुमनेश्वर, कुर्कुरी तीर्थ, कुर्यूमेश्वर, भगवती, कैलासन, खबीसनाथ, मानसरोवर तीर्थ, कोटिशवर महादेव, धोधार्क, खगपति आदि का दर्शन पूजन किया। करीब 25 किलोमीटर पैदल चलकर सोमवार को रामादल हरैय्या तीर्थ में विश्राम करेंगे। उसके बाद मंगलवार सुबह यह धर्मयात्रा परिक्रमा के तीसरे पड़ाव नगवां कोथांवा हरदोई के लिए प्रस्थान करेगी।
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धर्मराज का तप स्थल है कैलाशन तीर्थ
कैलाशन तीर्थ के बारे में मान्यता है कि यहां धर्मराज ने तपस्या की थी। यहां भगवान शिव का एक प्राचीन मंदिर है, जिससे लाखों श्रद्धालुओं की आस्था जुड़ी हुई है। धर्मराज द्वारा यहां तप करने के कारण यह क्षेत्र धर्मारण्य के नाम से भी जाना जाता है। कई मंदिर गोमती के दाएं बाएं किनारे पर स्थित है।
बिजली ने खूब छकाया
संदना। 84 कोस परिक्रमा मेला के प्रथम पड़ाव कोरौना में बिजली आपूर्ति व्यवस्था ने परिक्रमार्थियों को खूब परेशान किया। प्रत्येक वर्ष परिक्रमा मेला के पड़ावों पर 24 घंटे विद्युत आपूर्ति की जाती रही है। इस दौरान सुचारु रूप से आपूर्ति बनाए रखने के लिए कर्मचारी व अधिकारी मेला में मुस्तैद रहते थे। इस वर्ष 24 घंटे आपूर्ति के आदेश नहीं दिए गए थे। रविवार शाम को दो घंटे विद्युत बाधित रही। सोमवार सुबह जब परिक्रमार्थी दूसरे पड़ाव को जाने की तैयारी कर रहे थे। तभी विद्युत आपूर्ति ब्रेकडाउन हो गई। फिर पांच घंटे बाद नौ बजे आपूर्ति बहाल हो सकी। तब तक परिक्रमार्थी जा चुके थे।
चोरों ने साफ किए हाथ
रामगढ़ (सीतापुर)। पहले से ही चोरियों के लिए चर्चित कैलास आश्रम पर भी पुलिस चाक चौबंद नहीं दिखी। वहां पर तीर्थ में स्नान करते समय उचक्कों ने दो श्रद्धालुओं के पैसे मोबाइल आदि पार कर दिए। श्रद्धालु चंद्रकांत यादव ने बताया कि वह सिधौली से परिक्रमा करने के लिए आए है। हरैय्या प्रस्थान के लिए रास्ते में कैलाश आश्रम तीर्थ में स्नान कर रहा था। उसी दौरान उच्चकों ने पैंट से 600 रुपये नगद व मोबाइल आदि उठा ले गए। जिसमें दुकान की चाबी भी थी। गोंडा से आए श्रद्धालु कैलाश नाथ ने बताया कि कैलास तीर्थ में स्नान करते समय उचक्कों ने उनकी पैंट ही उठा ली। उसमें 300 रुपये रखे थे।
आदि गंगा मां गोमती में लगाई डुबकी
रामगढ़। 84 कोस परिक्रमा के दूसरे पड़ाव हरैय्या जाते समय श्रद्धालुओं ने आदि गंगा मां गोमती में डुबकी लगाकर कैलाश आश्रम स्थित मंदिर में दर्शन कर पूजा अर्चना की। रास्ते में भक्तों ने श्रद्धालुओं के लिए चाय, बिस्किट, पूड़ी-सब्जी आदि की व्यवस्था की थी।
बाला जी ब्रिक फील्ड रामगढ़ के संचालक अमन मिश्र द्वारा पांडाल लगाकर रामादल को बूंदी आदि प्रसाद का वितरित किया गया। यात्रा में जहां कई जगह भंडारे संचालित हो रहे हैं, वहीं कई श्रद्धालु ग्रुप में भी आए थे। जिन के लिए सामूहिक भोजन बनाया जाता है। कई परिक्रमार्थी बाबा फक्कड़ भाव से मिट्टी का चूल्हा चौका बनाकर लकड़ी कंडे की मदद से अपने लिए दाल सब्जी बनाई। रूखी सूखी खाकर पूरे 15 दिन त्याग और वैराग्य के भाव से भगवान के सुमिरन में लगे रहे।
शराब चढ़ाकर भक्तों ने मांगी मन्नत
रामगढ़। कैलास आश्रम में एक ऐसा मंदिर है, जहां मन्नत पूरी करने के लिए लोग शराब चढ़ाते हैं। मंदिर परिसर में बंदर भी शराब के आदी है। शराब मंदिर में चढ़ाने के बाद बंदर पी जाते है। मान्यता है कि भगवान खबीसनाथ पर शराब चढ़ाने से मांगी गई मन्नत पूरी जरूर होती है। श्रद्धालुओं ने शराब चढ़ाकर अपनी मन्नत मांगी।
स्थानीय उत्पादों की हुई बिक्री
इस पावन यात्रा में 15 दिन हर पड़ाव पर उत्सव जैसा माहौल होता है। दिनभर यात्री मार्ग में चलते है। शाम को जब वह पड़ाव पर पहुंचते हैं तो वहां पर मेले जैसा माहौल होता है। भजन कीर्तन सत्संग के बीच मेले में झूले का भी अपना अलग ही जलवा दिखता है। इस मेले में मिट्टी, लकड़ी, कपड़े से बने स्थानीय उत्पादों की बिक्री अपने शबाब पर रहीं। परिक्रमार्थी भी अपनी जरूरत की चीजों के साथ ही क्षेत्र की प्रचलित चीजें भी अपने साथ ले जाते दिखे।

ग्रामीणों ने श्रद्धालुओं का किया सहयोग
इस परिक्रमा में जहां परिक्रमार्थी भक्ति भाव से धर्म पथ पर चलते हैं, वहीं परिक्रमा के मार्ग में आने वाले गांव के लोग भी श्रद्धालुओं की हर संभव मदद के लिए तत्पर दिखाई देते है। परिक्रमा मार्ग में जिन ग्रामीणों के खेत और बाग पड़ रहे थे। वह किसान अपने खेत और बाग में सफाई की व्यवस्था खुद कर रहे थे। परिक्रमावासियों को यहां पर रुकने की व्यवस्था दे रहे थे।
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