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घाघरा के खौफ से बढ़ रहीं धड़कनें
Amarujala Bureau
Updated Mon, 29 May 2017 11:30 PM IST
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नदी
- फोटो : amar ujala
घाघरा के बढ़ते जलस्तर को देखकर तटीय क्षेत्र में बसने वाले ग्रामीण की धड़कनें तेज होने लगी हैं। हालांकि पानी अभी काफी दूर है, बावजूद इसको लोगों को बाढ़ का खौफ सताने लगा है। शायद यही वजह है कि लोगों ने अभी से ही बाढ़ से निपटने की तैयारियां शुरू कर दी हैं। जहां ग्रामीण चिंतित हैं, वहीं प्रशासन अभी पूरी तरह से बेपरवाह नजर आ रहा है।
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जिले की लहरपुर, बिसवां व महमूदाबाद तहसील क्षेत्र में आबादी का एक बढ़ा हिस्सा शारदा व घाघरा नदी के तट पर बसा हुआ है। हर वर्ष बरसात आने पर नदियां उफनाने लगती हैं। आबादी व खेत खलिहान, सड़कं बाढ़ के पानी में समा जातेहैं।
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यही वजह है कि तटीय क्षेत्र में बसे कोनी, नगीना पुरवा, दुर्गापुरवा, रामलाल पुरवा, ठेकेदार पुरवा, जैतहिया आदि दर्जनों गांव के सैकड़ों परिवार चिंतित हैं। निर्मल पुरवा के संतोष यादव, दिनेश कुमार, राम नरेश, सोमवारी, धर्मदास आदि ग्रामीणों का कहना है कि गांव समाप्त होने के बाद अब कुछ ग्रामीण दुर्गा पुरवा गांव के मार्ग पर, कुछ ठेकेदार पुरवा गांव के मार्ग पर तो कुछ परिवार चहलारी पुल जाने वाले मार्ग पर झोपड़ी डालकर गुजर बसर करने को मजबूर हैं।
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अभी तक प्रशासन ने कोई मदद नहीं दी। संतोष का परिवार दुर्गापुरवा गांव में रहता है। संतोष अपने गांव की बर्बादी देख चुके हैं, अब घाघरा दुर्गा पुरवा से सटकर बह रही है। ऐसे में एक बार फिर से उनके दिल में कटान व तबाही का खौफ सता रहा है। प्रशासन की संजीदगी की बात करें, तो अभी इस क्षेत्र में ऐसे कोई इंतजाम नहीं किए गए हैं, जिससे तटीय क्षेत्र में बसी आबादी को घाघरा नदी के कटान से बचाया जा सके।