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165 गांवों पर मंडराया बाढ़ का खतरा
Amar ujala Bureau
Updated Wed, 13 Jul 2016 11:39 PM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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घाघरा के रौद्र रूप से तटीय इलाकों में बाढ़ आ गई है। रेउसा क्षेत्र में निर्मल पुरवा से फौजदार पुरवा जाने वाला मार्ग बाढ़ के पानी में डूब गया है। कोनी गांव बाढ़ के पानी से घिर गया है। नदी से बाहर आते पानी को देख तटीय क्षेत्र में हलचल मच गई है। लोग घरों का सामान समेट सुरक्षित स्थानों को पलायन कर रहे हैं।
प्रशासन ने अभी तक इस क्षेत्र के ग्रामीणों को बाढ़ की चेतावनी जारी नहीं की है। बुधवार को शारदा व घाघरा बैराजों से ढाई लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया। अब जलस्तर बढ़ने की आशंका में लोग परेशान हैं। लहरपुर से रामपुर मथुरा क्षेत्र तक करीब 165 गांवों पर बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है।
बुधवार सुबह जब निर्मल पुरवा के ग्रामीणों की नींद खुली तो उन्होंने घाघरा के पानी को नदी से बाहर आते देखा। दोपहर तक निर्मल पुरवा से फौजदार पुरवा के बीच का मार्ग नदी के पानी में समा गया। पानी तेजी से तटीय क्षेत्र की भूमि पर आगे बढ़ता नजर आया।
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कोनी गांव को चारों तरफ से बाढ़ के पानी ने घेर लिया है। इससे यह गांव अलग-थलग पड़ गया है। गांव से बाहर आने का मार्ग बाढ़ के पानी में समा गया है। लोगों को वहां से निकलने के लिए नाव का सहारा लेना पड़ रहा है।
निर्मल पुरवा के संतोष यादव, निर्मल यादव, बुद्धि सागर, दीप चंद, नन्हके निषाद आदि ग्रामीणों ने बताया कि जिस रफ्तार से घाघरा का पानी बढ़ रहा है, उससे लग रहा है कि देर रात तक बाढ़ की मुसीबत से क्षेत्र के 50 गांव घिर जाएंगे। तटीय क्षेत्र का कोनी बाढ़ की चपेट में आ गया है।
जबकि निर्मल पुरवा, दुर्गा पुरवा, गोडिय़न पुरवा, जैतहिया, चंद्रभाल पुरवा, सिसैया बाजार, नगीना पुरवा आदि गांव बाढ़ के मुहाने पर हैं। घाघरा नदी के बीच टापू पर बसे पचीसा गांव के करीब के खेत बाढ़ की चपेट में आ गए हैं। पचीसा गांव से लोगों का घाघरा पार जाना मुश्किल है।
करीब चार किलोमीटर दूरी तक हिलोरे मार रहा घाघरा नदी का पानी लोगों के लिए संकट बना हुआ है। लहरपुर क्षेत्र से होकर गुजरने वाली शारदा नदी का जल स्तर भी तेजी से बढ़ रहा है। सोंसरी, मानपुर, चंदवा सोत आदि गांवों पर बाढ़ का खतरा फिर से मंडराने लगा है।
काशीपुर के निकट घाघरा नदी कटान कर रही है। रामपुर मथुरा क्षेत्र के अंगरौरा, कनरखी, नया पुरवा आदि गांवों के पास की खेती बाढ़ के पानी के चपेट में आ रही है। बुधवार को शारदा व घाघरा बैराज से 249706 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। यह पानी काफी मात्रा में है, जो तटीय इलाकों में बाढ़ जैसे हालात पैदा करने के लिए काफी है।
कटान पीड़ितों को बसाने के लिए जो स्थान तय किए गए हैं, उन स्थानों की हालत जानने के लिए बुधवार को एसडीएम बिसवां उदय प्रताप सिंह मौके पर पहुंचे। एसडीएम ने ठेकेदार पुरवा व म्योड़ी छोलहा के निकट हालात का जायजा लिया। उन्होंने बताया कि कटान पीड़ितों को घर बनाने के लिए भूमि देने की कार्यवाही की जा रही है।
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प्रशासन ने अभी तक इस क्षेत्र के ग्रामीणों को बाढ़ की चेतावनी जारी नहीं की है। बुधवार को शारदा व घाघरा बैराजों से ढाई लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया। अब जलस्तर बढ़ने की आशंका में लोग परेशान हैं। लहरपुर से रामपुर मथुरा क्षेत्र तक करीब 165 गांवों पर बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है।
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बुधवार सुबह जब निर्मल पुरवा के ग्रामीणों की नींद खुली तो उन्होंने घाघरा के पानी को नदी से बाहर आते देखा। दोपहर तक निर्मल पुरवा से फौजदार पुरवा के बीच का मार्ग नदी के पानी में समा गया। पानी तेजी से तटीय क्षेत्र की भूमि पर आगे बढ़ता नजर आया।
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कोनी गांव को चारों तरफ से बाढ़ के पानी ने घेर लिया है। इससे यह गांव अलग-थलग पड़ गया है। गांव से बाहर आने का मार्ग बाढ़ के पानी में समा गया है। लोगों को वहां से निकलने के लिए नाव का सहारा लेना पड़ रहा है।
निर्मल पुरवा के संतोष यादव, निर्मल यादव, बुद्धि सागर, दीप चंद, नन्हके निषाद आदि ग्रामीणों ने बताया कि जिस रफ्तार से घाघरा का पानी बढ़ रहा है, उससे लग रहा है कि देर रात तक बाढ़ की मुसीबत से क्षेत्र के 50 गांव घिर जाएंगे। तटीय क्षेत्र का कोनी बाढ़ की चपेट में आ गया है।
जबकि निर्मल पुरवा, दुर्गा पुरवा, गोडिय़न पुरवा, जैतहिया, चंद्रभाल पुरवा, सिसैया बाजार, नगीना पुरवा आदि गांव बाढ़ के मुहाने पर हैं। घाघरा नदी के बीच टापू पर बसे पचीसा गांव के करीब के खेत बाढ़ की चपेट में आ गए हैं। पचीसा गांव से लोगों का घाघरा पार जाना मुश्किल है।
करीब चार किलोमीटर दूरी तक हिलोरे मार रहा घाघरा नदी का पानी लोगों के लिए संकट बना हुआ है। लहरपुर क्षेत्र से होकर गुजरने वाली शारदा नदी का जल स्तर भी तेजी से बढ़ रहा है। सोंसरी, मानपुर, चंदवा सोत आदि गांवों पर बाढ़ का खतरा फिर से मंडराने लगा है।
काशीपुर के निकट घाघरा नदी कटान कर रही है। रामपुर मथुरा क्षेत्र के अंगरौरा, कनरखी, नया पुरवा आदि गांवों के पास की खेती बाढ़ के पानी के चपेट में आ रही है। बुधवार को शारदा व घाघरा बैराज से 249706 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। यह पानी काफी मात्रा में है, जो तटीय इलाकों में बाढ़ जैसे हालात पैदा करने के लिए काफी है।
कटान पीड़ितों को बसाने के लिए जो स्थान तय किए गए हैं, उन स्थानों की हालत जानने के लिए बुधवार को एसडीएम बिसवां उदय प्रताप सिंह मौके पर पहुंचे। एसडीएम ने ठेकेदार पुरवा व म्योड़ी छोलहा के निकट हालात का जायजा लिया। उन्होंने बताया कि कटान पीड़ितों को घर बनाने के लिए भूमि देने की कार्यवाही की जा रही है।