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छोटे किसानों के लिए संजीवनी साबित होंगे एफ पीओ
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सीतापुर। फार्मर प्रोड्यूसर आर्गेनाइजेशन (एफपीओ) बनाकर छोटे किसान अधिक आय अर्जित कर सकते हैं। इस नीति की मूल अवधारणा किसान को कृषक उद्यमी के रूम में संगठित कर खेतीबाड़ी की सनातन भारतीय परंपराओं को दोबारा स्थापित करते हुए प्रत्येक किसान परिवार को पूर्ण आत्मनिर्भर बनाना है।
एफपीओ अन्नदाताओं के लिए संजीवनी साबित होंगे। कृषि विभाग इस कार्य में उनकी मदद करेगा। संगठन कृषि उत्पादों का प्रसंस्करण कर बिक्री करेगा। इससे जो फायदा होगा, उसका लाभ सभी किसान सदस्यों को समान रूप से मिलेगा। कम जोत वाले किसानों को मंडियों के भंवरजाल से मुक्ति मिलेगी।
जिले में तकरीबन 85 फीसदी किसान ऐसे हैं जो कम जोत वाले हैं। इन्हें पैदावार का उचित मूल्य नहीं मिल पाता है। इसका प्रमुख कारण यह है कि कम मात्रा में पैदा होने वाले गेहूं व धान आदि की बिक्री नहीं हो पाती है। यही किसान जब एफपीओ बनाकर अपने उत्पाद का प्रसंस्करण कर बिक्री करेंगे तो अधिक आय होगी। उदाहरण के तौर पर गेहूं की कीमत प्रति किग्रा 18 रुपये मिली जबकि आटा 30 रुपये प्रति किग्रा की दर से मिलता है।
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वहीं दूसरी तरफ किसान जब गेहूं का प्रसंस्करण कर उपभोक्ता को आटा बेचेंगे तो अधिक आय होगी। संगठन के सभी सदस्य शेयर होल्डर होंगे, सभी किसानों में आय समान रूप से वितरित की जाएगी। उप कृषि निदेशक के प्रयास से एफपीओ गठन की कार्यवाही की जा रही है। आठ ब्लॉकों में 12 एफपीओ का गठन किया जा चुका है।
एफपीओ का पंजीयन कंपनी अधिनियम 1956 (यथा संशोधित 2013) के तहत कराने के लिए न्यूनतम 10 किसान सदस्यों की आवश्यकता होगी। इन सभी किसानों के पैन कार्ड, आधार, पासबुक, दो-दो फोटो, खेत की खतौनी, मोबाइल नंबर एवं ई-मेल, कंपनी के दो प्रस्तावित नाम, प्रस्तावित दफ्तर के अपडेट जमा विद्युत बिल की प्रति, निदेशक एवं अंश धारकों की संख्या जरूरी है।
एफपीओ के पंजीयन के समय पांच निदेशक एवं पांच ही शेयर होल्डर होते हैं। भविष्य में आवश्यकता के अनुसार अधिकतम 15 निदेशक हो सकते हैं लेकिन शेयर होल्डर की संख्या की अधिकतम सीमा के बारे में अधिनियम में कोई स्पष्ट विवरण नहीं है। फिर भी एफपीओ में सुचारु व्यावसायिक प्रबंधन के लिए अधिकतम एक हजार शेयर होल्डर हो सकते हैं। इसमें कृषि विभाग किसानों की मदद करेगा।
एफपीओ पंजीकृत होने के बाद आगामी तीन वर्षों में कारोबारी गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए अधिकतम पांच लाख तक बैंक से ऋण मिलेगा। बैंक ऋण पर प्रभावी ब्याज दर पर चार फीसदी अनुदान उपलब्ध कराया जाएगा। इस सुविधा को प्राप्त करने के लिए एफपीओ में न्यूनतम 150 अंशधारक किसान होना आवश्यक होगा।
एफपीओ के सफल संचालन के लिए डीएम की अध्यक्षता में समिति गठित की गई है। समिति में उप कृषि निदेशक संयोजक सदस्य सचिव हैं। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी, जिला उद्यान अधिकारी, सहायक निदेशक मत्स्य व रेशम अधिकारी, मंडी सचिव, जिला प्रबंधक नाबार्ड, तीन विशेषज्ञ (कृषि विज्ञान केंद्र, आत्मा, स्थानीय उत्पादक संगठन) एवं महाप्रबंधक जिला उद्योग केंद्र सदस्य हैं।
समिति कार्यक्रम के क्रियान्वयन के लिए नीतिगत निर्णय लेगी। सेल का गठन किया जाना है। इसके द्वारा ब्लॉक स्तर पर एफपीओ के गठन के लिए किए जा रहे प्रयासों की संकलित जानकारी रखी जाएगी।
उप कृषि निदेशक अरविंद मोहन मिश्र ने बताया कि किसानों के लिए बहुत फायदेमंद है। छोटे-छोटे किसान अपने कम मात्रा के उत्पाद एकत्रित करके उसका प्रसंस्करण कर अधिक मूल्य प्राप्त कर सकते हैं। एफपीओ किसानों की आय बढ़ाने में काफी मददगार होगा।
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एफपीओ अन्नदाताओं के लिए संजीवनी साबित होंगे। कृषि विभाग इस कार्य में उनकी मदद करेगा। संगठन कृषि उत्पादों का प्रसंस्करण कर बिक्री करेगा। इससे जो फायदा होगा, उसका लाभ सभी किसान सदस्यों को समान रूप से मिलेगा। कम जोत वाले किसानों को मंडियों के भंवरजाल से मुक्ति मिलेगी।
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जिले में तकरीबन 85 फीसदी किसान ऐसे हैं जो कम जोत वाले हैं। इन्हें पैदावार का उचित मूल्य नहीं मिल पाता है। इसका प्रमुख कारण यह है कि कम मात्रा में पैदा होने वाले गेहूं व धान आदि की बिक्री नहीं हो पाती है। यही किसान जब एफपीओ बनाकर अपने उत्पाद का प्रसंस्करण कर बिक्री करेंगे तो अधिक आय होगी। उदाहरण के तौर पर गेहूं की कीमत प्रति किग्रा 18 रुपये मिली जबकि आटा 30 रुपये प्रति किग्रा की दर से मिलता है।
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वहीं दूसरी तरफ किसान जब गेहूं का प्रसंस्करण कर उपभोक्ता को आटा बेचेंगे तो अधिक आय होगी। संगठन के सभी सदस्य शेयर होल्डर होंगे, सभी किसानों में आय समान रूप से वितरित की जाएगी। उप कृषि निदेशक के प्रयास से एफपीओ गठन की कार्यवाही की जा रही है। आठ ब्लॉकों में 12 एफपीओ का गठन किया जा चुका है।
एफपीओ का पंजीयन कंपनी अधिनियम 1956 (यथा संशोधित 2013) के तहत कराने के लिए न्यूनतम 10 किसान सदस्यों की आवश्यकता होगी। इन सभी किसानों के पैन कार्ड, आधार, पासबुक, दो-दो फोटो, खेत की खतौनी, मोबाइल नंबर एवं ई-मेल, कंपनी के दो प्रस्तावित नाम, प्रस्तावित दफ्तर के अपडेट जमा विद्युत बिल की प्रति, निदेशक एवं अंश धारकों की संख्या जरूरी है।
एफपीओ के पंजीयन के समय पांच निदेशक एवं पांच ही शेयर होल्डर होते हैं। भविष्य में आवश्यकता के अनुसार अधिकतम 15 निदेशक हो सकते हैं लेकिन शेयर होल्डर की संख्या की अधिकतम सीमा के बारे में अधिनियम में कोई स्पष्ट विवरण नहीं है। फिर भी एफपीओ में सुचारु व्यावसायिक प्रबंधन के लिए अधिकतम एक हजार शेयर होल्डर हो सकते हैं। इसमें कृषि विभाग किसानों की मदद करेगा।
एफपीओ पंजीकृत होने के बाद आगामी तीन वर्षों में कारोबारी गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए अधिकतम पांच लाख तक बैंक से ऋण मिलेगा। बैंक ऋण पर प्रभावी ब्याज दर पर चार फीसदी अनुदान उपलब्ध कराया जाएगा। इस सुविधा को प्राप्त करने के लिए एफपीओ में न्यूनतम 150 अंशधारक किसान होना आवश्यक होगा।
एफपीओ के सफल संचालन के लिए डीएम की अध्यक्षता में समिति गठित की गई है। समिति में उप कृषि निदेशक संयोजक सदस्य सचिव हैं। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी, जिला उद्यान अधिकारी, सहायक निदेशक मत्स्य व रेशम अधिकारी, मंडी सचिव, जिला प्रबंधक नाबार्ड, तीन विशेषज्ञ (कृषि विज्ञान केंद्र, आत्मा, स्थानीय उत्पादक संगठन) एवं महाप्रबंधक जिला उद्योग केंद्र सदस्य हैं।
समिति कार्यक्रम के क्रियान्वयन के लिए नीतिगत निर्णय लेगी। सेल का गठन किया जाना है। इसके द्वारा ब्लॉक स्तर पर एफपीओ के गठन के लिए किए जा रहे प्रयासों की संकलित जानकारी रखी जाएगी।
उप कृषि निदेशक अरविंद मोहन मिश्र ने बताया कि किसानों के लिए बहुत फायदेमंद है। छोटे-छोटे किसान अपने कम मात्रा के उत्पाद एकत्रित करके उसका प्रसंस्करण कर अधिक मूल्य प्राप्त कर सकते हैं। एफपीओ किसानों की आय बढ़ाने में काफी मददगार होगा।