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फिर कटी तेंदुआ माइनर की पटरी, पांच बीघा धान की फसल डूबी
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लहरपुर (सीतापुर)। इलाके से होकर गुजरने वाली तेंदुआ माइनर की पटरी एक बार फिर से कट गई। अबकी अलग-अलग दो जगहों पर पटरी कटी है। इससे माइनर का पानी खेतों में भर रहा है। लगभग 5 बीघा धान की फसल जलमग्न हो चुकी है। हालांकि आगे जाकर पानी ड्रेन में गिरने से अधिक नुकसान की संभावना नहीं है। एक सप्ताह पहले भी माइनर की पटरी पानी के दबाव से कट गई थी। आए दिन पटरी कटने से किसानों में रोष व्याप्त है।
दरअसल, तेंदुआ माइनर विगत 31 जुलाई को बरगदवा पुल के निकट सिददीक के खेत में कट गई थी। जिसे 4 अगस्त को दुरुस्त कराने के बाद पानी छोड़ा गया था। शनिवार को एक बार फिर माइनर की पटरी बरगदवा पुल के पश्चिम मौजी लाल के खेत के सामने कट गई। मौजीलाल ने परिवार और मजदूरों के साथ मिलकर कड़ी मशक्कत के बाद पटरी को बांध दिया। लेकिन बरगदहा पुल के निकट कटी पटरी को अभी भी ठीक नहीं कराया गया है।
इसलिए पानी खेतों से होता हुआ आगे ड्रेन में गिर रहा है। मौजी लाल ने बताया कि उसके खेत के सामने नहर कटने से ढाई बीघा धान की फसल में पानी भर गया है। इसी तरह जसकरन का डेढ़ बीघा, रूपनारायण का डेढ़ बीघा, फकीरा का 2 बीघा धान की फसल जलमग्न हो गई है। किसानों के अनुसार नहर विभाग द्वारा माइनर की टेल तक सफाई नहीं कराई जाती है। जिसके कारण पानी के दबाव से आए दिन जगह-जगह नहर कट जाती है और किसानों को भारी नुकसान का सामना करना पड़ता है। वहीं, विभागीय अधिकारी पटरी को किसानों द्वारा काटने की बात कह रहे हैं।
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नहर विभाग के अवर अभियंता मयंक त्रिपाठी ने बताया कि माइनर कटने की सूचना मिली है। पानी रोक दिया गया है। शीघ्र ही क्षतिग्रस्त पटरी को बांधकर पानी छोड़ दिया जाएगा। दरअसल, इस समय किसानों को सिंचाई के लिए पानी की आवश्यकता है। इसीलिए पटरी उन लोगों द्वारा काटी जाती है। जब पानी की धार से पटरी ज्यादा कट जाती है तो दोष विभाग पर मढ़ देते हैं।
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दरअसल, तेंदुआ माइनर विगत 31 जुलाई को बरगदवा पुल के निकट सिददीक के खेत में कट गई थी। जिसे 4 अगस्त को दुरुस्त कराने के बाद पानी छोड़ा गया था। शनिवार को एक बार फिर माइनर की पटरी बरगदवा पुल के पश्चिम मौजी लाल के खेत के सामने कट गई। मौजीलाल ने परिवार और मजदूरों के साथ मिलकर कड़ी मशक्कत के बाद पटरी को बांध दिया। लेकिन बरगदहा पुल के निकट कटी पटरी को अभी भी ठीक नहीं कराया गया है।
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इसलिए पानी खेतों से होता हुआ आगे ड्रेन में गिर रहा है। मौजी लाल ने बताया कि उसके खेत के सामने नहर कटने से ढाई बीघा धान की फसल में पानी भर गया है। इसी तरह जसकरन का डेढ़ बीघा, रूपनारायण का डेढ़ बीघा, फकीरा का 2 बीघा धान की फसल जलमग्न हो गई है। किसानों के अनुसार नहर विभाग द्वारा माइनर की टेल तक सफाई नहीं कराई जाती है। जिसके कारण पानी के दबाव से आए दिन जगह-जगह नहर कट जाती है और किसानों को भारी नुकसान का सामना करना पड़ता है। वहीं, विभागीय अधिकारी पटरी को किसानों द्वारा काटने की बात कह रहे हैं।
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नहर विभाग के अवर अभियंता मयंक त्रिपाठी ने बताया कि माइनर कटने की सूचना मिली है। पानी रोक दिया गया है। शीघ्र ही क्षतिग्रस्त पटरी को बांधकर पानी छोड़ दिया जाएगा। दरअसल, इस समय किसानों को सिंचाई के लिए पानी की आवश्यकता है। इसीलिए पटरी उन लोगों द्वारा काटी जाती है। जब पानी की धार से पटरी ज्यादा कट जाती है तो दोष विभाग पर मढ़ देते हैं।