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तीन स्टड बहे, पांच गांवों पर बाढ़ खतरा
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रेउसा क्षेत्र में नाव से सुरक्षित स्थान पर जाते लोग।
- फोटो : SITAPUR
रेउसा/रामपुर मथुरा (सीतापुर)। रेउसा में सोमवार को सरयू का जलस्तर स्थिर रहा, पर पानी के तेज बहाव से तीन सीमेंटेड स्टड व कई जियो बैग सरयू में समा गए। इससे तलहटी के पांच और गांवों पर बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है। सोमवार को पानी स्थिर रहने से कटान शुरू हो गई। लगभग 50 बीघा खेत सरयू में समा गए। बाढ़ प्रभावित गांवों में ग्रामीणों की मुसीबतें लगातार बढ़ती जा रही है। घरों से लेकर रास्तों व खेतों तक पानी भरा होने से प्रभावितों का गुजर-बसर मुश्किल होने लगा है।
बाढ़ ग्रस्त इलाके में संक्रामक रोग पनपने का खतरा भी बढ़ गया है। शुद्ध पेयजल की किल्लत होने लगी है। मुश्किलें बढ़ती देख प्रभावित गांवों से ग्रामीणों का पलायन जारी है। ब्लॉक रेउसा क्षेत्र में श्रीरामपुरवा के करीब बना स्टड पानी के तेज प्रवाह से क्षतिग्रस्त हो गया है। म्योडीछोलहा के प्रधान जगदीश प्रसाद यादव ने बताया, स्टड के तीन सीमेंटेड कटर व कई जियो बैग पानी में बह गए है। इससे भदिम्मरपुरवा, श्रीरामपुरवा, म्योडीछोलहा समेत पांच गांवों पर बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है।
बाढ़ प्रभावित नगीनापुरवा, बिल्लरपुरवा, मरेली व लोधपुरवा में सोमवार को पानी तो नहीं बढ़ा लेकिन ग्रामीणों की मुश्किलें कम होती नजर नहीं आ रही हैं। घर से लेकर रास्तों व खेतों तक हर तरफ पानी भरा होने से दैनिक क्रियाएं प्रभावित है। बाढ़ के पानी से संक्रामक रोग पनपने का खतरा भी पैदा हो गया है। बाढ़ प्रभावित गांवों के आसपास कटान भी होने लगी है। सोमवार को करीब 50 बीघा खेती योग्य जमीन नदी में समा गई। दर्जिनरेती, परमेश्वरपुरवा, महराजसिंहपुरवा, खुशीरामपुरवा के पास कटान करते हुए नदी का पानी आबादी की ओर बढ़ रहा है।
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रामपुर मथुरा इलाके में सरयू के पानी की रीडिंग सोमवार को 118.85 मीटर रही। खतरे के निशान से पानी 15 सेंटीमीटर नीचे है। रविवार के मुकाबले पांच सेंटीमीटर पानी कम हुआ है। लेकिन बाढ़ ग्रस्त अंगरौरा के बाशिंदो की जिंदगी मुश्किल होती जा रही है। घरों में पानी भरा होने पर खाने-पीने से लेकर उठने-बैठने व सोने तक में मुसीबतें उठानी पड़ रही हैं। मुसीबतें बढ़ने से कई ग्रामीण घर का सामान समेटकर पलायन कर गए। यह सभी लोग बांध पर डेरा डाले हैं। बाढ़ आने के दूसरे दिन भी कोई प्रशासनिक अधिकारी अंगरौरा नहीं पहुंचे। प्रभावितों को सुरक्षित ठिकानों की तरफ जाने के लिए नावें भी नहीं मिल रही हैं।
नहीं बन सके अस्थाई अस्पताल
बाढ़ आने पर हर साल रेउसा क्षेत्र के मारूबेहड, ढेलिया, मल्लापुर कांशीराम में स्वास्थ्य विभाग की ओर से अस्थाई अस्पताल बनाए जाते थे। इस बार बाढ़ का प्रकोप शुरू होने के बाद भी अस्थाई अस्पताल कहीं नजर नहीं आ रहे हैं। जबकि कई गांवों में बाढ़ का पानी भरा होने से संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। रेउसा सीएचसी प्रभारी डा. अनंत मिश्र ने बताया, इस समय स्टाफ कोरोना में लगा हुआ है। जल्द ही बाढ़ इलाके का दौरा कर व्यवस्था कराई जाएगी।
पेयजल का गहराया संकट
ब्लॉक रामपुर मथुरा अंतर्गत बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में शुद्ध पेयजल का संकट गहराता जा रहा है। यहां कोई भी हैंडपंप इतनी ऊंचाई पर नहीं है कि बाढ़ आने पर ग्रामीण उसका प्रयोग कर सकें। अधिकतर हैंडपंप बाढ़ के पानी से घिर गए हैं। जिससे स्वच्छ पेयजल की किल्लत होने लगी है।
बैराजों से सोमवार को लगभग पौने तीन लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। यह डिस्चार्ज रविवार के मुकाबले कम है। इससे नदियों का जलस्तर घट रहा है। पानी कम होने से बाढ़ प्रभावित गांवों के हालात भी सामान्य हो जाएंगे। तटवर्ती इलाके में लगातार नजर रखी जा रही है।
- राजकुमार गुप्ता, तहसीलदार बिसवां
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बाढ़ ग्रस्त इलाके में संक्रामक रोग पनपने का खतरा भी बढ़ गया है। शुद्ध पेयजल की किल्लत होने लगी है। मुश्किलें बढ़ती देख प्रभावित गांवों से ग्रामीणों का पलायन जारी है। ब्लॉक रेउसा क्षेत्र में श्रीरामपुरवा के करीब बना स्टड पानी के तेज प्रवाह से क्षतिग्रस्त हो गया है। म्योडीछोलहा के प्रधान जगदीश प्रसाद यादव ने बताया, स्टड के तीन सीमेंटेड कटर व कई जियो बैग पानी में बह गए है। इससे भदिम्मरपुरवा, श्रीरामपुरवा, म्योडीछोलहा समेत पांच गांवों पर बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है।
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बाढ़ प्रभावित नगीनापुरवा, बिल्लरपुरवा, मरेली व लोधपुरवा में सोमवार को पानी तो नहीं बढ़ा लेकिन ग्रामीणों की मुश्किलें कम होती नजर नहीं आ रही हैं। घर से लेकर रास्तों व खेतों तक हर तरफ पानी भरा होने से दैनिक क्रियाएं प्रभावित है। बाढ़ के पानी से संक्रामक रोग पनपने का खतरा भी पैदा हो गया है। बाढ़ प्रभावित गांवों के आसपास कटान भी होने लगी है। सोमवार को करीब 50 बीघा खेती योग्य जमीन नदी में समा गई। दर्जिनरेती, परमेश्वरपुरवा, महराजसिंहपुरवा, खुशीरामपुरवा के पास कटान करते हुए नदी का पानी आबादी की ओर बढ़ रहा है।
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रामपुर मथुरा इलाके में सरयू के पानी की रीडिंग सोमवार को 118.85 मीटर रही। खतरे के निशान से पानी 15 सेंटीमीटर नीचे है। रविवार के मुकाबले पांच सेंटीमीटर पानी कम हुआ है। लेकिन बाढ़ ग्रस्त अंगरौरा के बाशिंदो की जिंदगी मुश्किल होती जा रही है। घरों में पानी भरा होने पर खाने-पीने से लेकर उठने-बैठने व सोने तक में मुसीबतें उठानी पड़ रही हैं। मुसीबतें बढ़ने से कई ग्रामीण घर का सामान समेटकर पलायन कर गए। यह सभी लोग बांध पर डेरा डाले हैं। बाढ़ आने के दूसरे दिन भी कोई प्रशासनिक अधिकारी अंगरौरा नहीं पहुंचे। प्रभावितों को सुरक्षित ठिकानों की तरफ जाने के लिए नावें भी नहीं मिल रही हैं।
नहीं बन सके अस्थाई अस्पताल
बाढ़ आने पर हर साल रेउसा क्षेत्र के मारूबेहड, ढेलिया, मल्लापुर कांशीराम में स्वास्थ्य विभाग की ओर से अस्थाई अस्पताल बनाए जाते थे। इस बार बाढ़ का प्रकोप शुरू होने के बाद भी अस्थाई अस्पताल कहीं नजर नहीं आ रहे हैं। जबकि कई गांवों में बाढ़ का पानी भरा होने से संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। रेउसा सीएचसी प्रभारी डा. अनंत मिश्र ने बताया, इस समय स्टाफ कोरोना में लगा हुआ है। जल्द ही बाढ़ इलाके का दौरा कर व्यवस्था कराई जाएगी।
पेयजल का गहराया संकट
ब्लॉक रामपुर मथुरा अंतर्गत बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में शुद्ध पेयजल का संकट गहराता जा रहा है। यहां कोई भी हैंडपंप इतनी ऊंचाई पर नहीं है कि बाढ़ आने पर ग्रामीण उसका प्रयोग कर सकें। अधिकतर हैंडपंप बाढ़ के पानी से घिर गए हैं। जिससे स्वच्छ पेयजल की किल्लत होने लगी है।
बैराजों से सोमवार को लगभग पौने तीन लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। यह डिस्चार्ज रविवार के मुकाबले कम है। इससे नदियों का जलस्तर घट रहा है। पानी कम होने से बाढ़ प्रभावित गांवों के हालात भी सामान्य हो जाएंगे। तटवर्ती इलाके में लगातार नजर रखी जा रही है।
- राजकुमार गुप्ता, तहसीलदार बिसवां