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... और बाढ़ में मिट गया पुरैना गांव का अस्तित्व
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flood in sitapur
- फोटो : SITAPUR
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रामपुर मथुरा/रेउसा। विकास क्षेत्र रामपुर मथुरा अंतर्गत पुरैना गांव के 20 घर कटान की जद में आकर सरयू नदी में समाहित होने के साथ ही इसका अस्तित्व हमेशा के लिए मिट गया। यहां के सभी घर कटकर नदी में समा गए हैं। अब यहां के लोग तटबंध पर डेरा डालने को विवश हैं। गांजरी क्षेत्र में बाढ़ घटने के साथ ही सरयू ने कटान तेज कर दी है। बुधवार को सरयू नदी का जलस्तर 118.20 मीटर दर्ज किया गया। खतरे के निशान से 80 सेमी नीचे पहुंच चुकी सरयू की धारा तटीय क्षेत्र के बाशिंदों पर अब कटान का कहर बरपा रही है।
रामपुर मथुरा क्षेत्र के पुरैना मजरा शुकुलपुरवा में कुल 40 घर थे। इनमें से 20 घर पिछले वर्षों आई बाढ़ में कट गए थे। अबकी बाढ़ घटने से कटान तेज हुई तो 24 घंटे में ही पुरैना के सुरेश, भोंदू, झींनक, सोनेलाल, इंदल, कुंवारे, बिलास, चंद्रशेखर, ज्ञानचंद्र, इंद्रदेव, रामचरण, नगीना आदि के इस गांव में शेष बचे 20 घर कटकर सरयू में समा गए। सभी घर कट जाने से अब पुरैना गांव का अस्तित्व हमेशा के लिए समाप्त हो गया। यहां के सभी लोग तटबंध पर पॉलिथीन के नीचे रहकर सरकारी इमदाद की प्रतीक्षा कर रहे हैं। वहीं अंगरौरा गांव के पास कटान करती सरयू नदी की धारा राकेश और राममिलन के घर की ओर तेजी से बढ़ रही है। इस बीच मुन्नू गौतम का 3 बीघा खेत नदी में समा चुका है।
दूसरी तरफ रेउसा इलाके में बुधवार की सायं पांच बजे शुरू हुई मूसलाधार बारिश ने बाढ़ पीड़ितों की चिंता बढ़ा दी है। इसके अलावा परमेश्वरपुरवा और फौजदारपुरवा के आसपास कटान जारी है। बुधवार को लगभग 40 बीघा कृषि योग्य भूमि सरयू में समाहित हो गई। लगातार हो रही कटान से लोग परेशान हैं।
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रामपुर मथुरा क्षेत्र के पुरैना मजरा शुकुलपुरवा में कुल 40 घर थे। इनमें से 20 घर पिछले वर्षों आई बाढ़ में कट गए थे। अबकी बाढ़ घटने से कटान तेज हुई तो 24 घंटे में ही पुरैना के सुरेश, भोंदू, झींनक, सोनेलाल, इंदल, कुंवारे, बिलास, चंद्रशेखर, ज्ञानचंद्र, इंद्रदेव, रामचरण, नगीना आदि के इस गांव में शेष बचे 20 घर कटकर सरयू में समा गए। सभी घर कट जाने से अब पुरैना गांव का अस्तित्व हमेशा के लिए समाप्त हो गया। यहां के सभी लोग तटबंध पर पॉलिथीन के नीचे रहकर सरकारी इमदाद की प्रतीक्षा कर रहे हैं। वहीं अंगरौरा गांव के पास कटान करती सरयू नदी की धारा राकेश और राममिलन के घर की ओर तेजी से बढ़ रही है। इस बीच मुन्नू गौतम का 3 बीघा खेत नदी में समा चुका है।
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दूसरी तरफ रेउसा इलाके में बुधवार की सायं पांच बजे शुरू हुई मूसलाधार बारिश ने बाढ़ पीड़ितों की चिंता बढ़ा दी है। इसके अलावा परमेश्वरपुरवा और फौजदारपुरवा के आसपास कटान जारी है। बुधवार को लगभग 40 बीघा कृषि योग्य भूमि सरयू में समाहित हो गई। लगातार हो रही कटान से लोग परेशान हैं।
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